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नेहरू के लालच की पूर्ति में पटेल सहभागी क्यों बने?

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– संजीव शुक्ल

जो लोग नेहरू की महत्त्वाकांक्षा और प्रधानमंत्री बनने के लालच को विभाजन का जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें पटेल के बयानों को भी पढ़ना चाहिए। ऐसे लोगों को यह भी बताना चाहिए कि नेहरू के लालच की पूर्ति में पटेल सहभागी क्यों बने? आख़िर नेहरू की इच्छापूर्ति के प्रयासों में पटेल को आगे आने की क्या जरूरत थी? पटेल को तो प्रधानमंत्री बनना नहीं था, तो वो क्यों विभाजन की मांग के पैरोकार बने?
अगर हम कायदे से देखें तो पटेल के बयानों से तत्कालीन परिस्थितियों की गम्भीरता को समझा जा सकता है।सरदार पटेल एक जगह कहते हैं कि “यदि हमने पाकिस्तान की माँग को स्वीकार नहीं किया तो इस देश में अनेक पाकिस्तान बन जाएंगे। हर दफ़्तर में पाकिस्तान की एक इकाई होगी” यह वक्तव्य मुस्लिम लीग की कारगुजारियों को बताने के लिए पर्याप्त है।पटेल ने वर्तमान माहौल से दुखी होकर कहा कि “जिन्ना विभाजन चाहते हों अथवा नहीं, लेकिन अब हम स्वयं विभाजन चाहते हैं”।

पटेल ज्यादा व्यवहारिक दृष्टि अपना रहे थे, जबकि गांधी जी ज्यादा सैद्धांतिक थे। जब अंग्रेजों ने “समूह से बाहर होने के अधिकार” को लेकर लीग के पक्ष में फैसला सुनाया तो पटेल क्रिप्स को पत्र लिखते हैं कि “आप जानते हैं गांधीजी पूरी तरह से हमारे समझौते के खिलाफ थे, लेकिन मैंने अपना जोर लगाया। आपने मेरे लिए एक बेहद प्रतिकूल स्थितियां बना दी हैं”।पटेल और नेहरू ने सत्ता के लिए नहीं अपितु सांप्रदायिक उन्माद से उपजी गृहयुद्ध की त्रासदी से बचने के लिए बंटवारा स्वीकार किया था।

पटेल ने गांधी से कहा था – “सवाल यह है कि गृहयुद्ध या विभाजन। जहाँ तक गृहयुद्ध का सवाल है, कोई नहीं कह सकता कि यह कब शुरू होगा और कहाँ जाकर रुकेग? सच है कि हिंदू अंत में जीत सकते हैं, लेकिन केवल एक अप्रत्याशित और बहुत बड़ी कीमत देकर ही”।

इसलिए बंटवारे के लिए गांधी, नेहरू या कांग्रेस को जिम्मेदार बताए जाने की दलीलें तत्कालीन परिस्थितियों को जानबूझकर नजरअंदाज करने की सुनियोजित चाल है। बंटवारे का यह सरलीकरण निष्कर्ष धूर्ततापूर्ण सोच है।क्या नेहरू और पटेल का यही दोष था कि उन्होंने गृहयुद्ध उत्पन्न करने वाले जिन्ना की हठधर्मिता के आगे झुकने से इंकार कर दिया।   जो बंटवारे का विरोध करे वही दोषी? क्या बंटवारे को रोक पाने की असफलता ही किसी को बंटवारे का दोषी सिद्ध कर देगी? और जो धर्म आधारित बंटवारे की पुरजोर मांग करे रहे थें(मुस्लिम लीग और हिन्दू महा सभा) वह पाक-साफ हो जाएंगे।   

  – संजीव शुक्ल

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