*समाजवादी पार्टी के मुखिया श्री अखिलेश यादव जी और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती की मुलाक़ात की इन तस्वीरों पर विवाद हो गया है श्री राम मनोहर लोहिया जी के आदर्शों पर चलने का दावा करने वाले समाजवादी पार्टी के मुखिया का यूँ एक हिंदू धर्म गुरु के चरणों में झुकना बहुत से लोगों को रास नहीं आ रहा लोग श्री अखिलेश यादव जी के इस कदम की आलोचना भी कर रहे हैं पहले से ही डॉ बाबा सहाब भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर भीम दिवाली मनाने का एलान कर चुके अखिलेश यादव अब तमाम हिंदू धर्मगुरुओं के सामने चरणवंदना करते नज़र आ रहे हैं ऐसे में सोशल मीडिया पर इसे लेकर एक बार फिर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं*_
_*वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर दिलीप सी मंडल ने इन तस्वीरों को अपनी फ़ेसबुक वॉल पर शेयर करते हुए बेहद गंभीर टिप्पणी की उन्होंने श्री अखिलेश यादव जी की तुलना श्री मुलायम सिंह यादव जी से करते हुए उस वाक़ये को भी याद किया जब श्री मुलायम सिंह यादव जी ने इन्हीं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को गिरफ्तार करवा दिया था प्रोफेसर दिलीप मंडल ने इस बारे में लिखा सपा संस्थापक श्री मुलायम सिंह यादव जी तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे देश के रक्षा मंत्री रहे प्रधानमंत्री की कुर्सी के क़रीब पहुँचे वे कभी किसी बाबा के पैरों के नीचे नहीं बैठे हमेशा बराबरी पर बैठे श्री अखिलेश यादव जी के सलाहकारों को सोचना चाहिए कि ये कैसी इमेज बन रही है*_
_*जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने बनारस में 201 ब्राह्मणों के पैर धोकर चरणामृत पीया था तो श्री राम मनोहर लोहिया जी ने उसे अश्लील हरकत कहा था हमारे दौर के नेता वैचारिक रूप से इतने कमज़ोर कैसे हो गए इतने सारे बाबाओं में से भी श्री अखिलेश यादव जी ने इनके ही पैरों के नीचे बैठना पसंद किया ये तो भयंकर रूप से राजनीति बयान बाज़ी करने वाले बाबा हैं इनके बयानों में कौन सा आध्यात्म है–*_
_*आज श्री अखिलेश यादव जी जिस शंकराचार्य स्वरूपानन्द के पैर पकड़ रहे हैं उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव जी ने 7 मई 1990 को आज़मगढ़ में गिरफ़्तार करवाया था पूरा यूपी शांत रहा था केंद्र में श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार के साथ मिलकर पक्का बंदोबस्त किया था स्वरूपानन्द अयोध्या में जबरन शिलान्यास करने जा रहे थे ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो रहा था श्री मुलायम सिंह यादव जी इसके बाद भी मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बने उसी पार्टी की विरासत श्री अखिलेश यादव जी को मिली है लाइन सीधी होनी चाहिए*_
_*7 मई 1990 को श्री मुलायम सिंह यादव जी ने शंकराचार्य को गिरफ्तार करवाया था इसी साल 24 अक्टूबर को श्री लालू प्रसाद यादव जी ने श्री लालकृष्ण अडवाणी जी को क़ैद किया था अगले 25 साल तक ये दोनों नेता राज्य और केंद्र में छाए रहे दोनों ही प्रधानमंत्री की कुर्सी के बेहद क़रीब तक पहुँचे कई बार मुख्यमंत्री बने ज़्यादातर हिंदुओं ने ही इनको वोट दिया था ये पोस्ट श्री अखिलेश यादव जी के लिए है*__*बीच सड़क पर खड़े लोग कुचले जाते हैं*_
_*वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल जी ने उन खबरों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए जिनमें यही शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की बात करते हैं ये वही शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती हैं जो कहते हैं कि एससी-एसटी एक्ट से समाज टूट जाएगा अब आप ही बताइए जो आदमी बहुजन समाज के फ़ायदे के लिए बनी व्यवस्थाओं को ही ख़त्म करने की वकालत करता है उसके चरणों में एक बहुजन नेता का यूँ हाथ जोड़कर बैठ जाना क्या संदेश देता है?*_
_*इस बारे में मंडल आर्मी नाम के हैंडल से लिखा गया जिसके चरणों में अखिलेश यादव पड़े हैं यह बही पोथीराम उपाध्याय उर्फ स्वरूपानंद सरस्वती है जिसने अहीरों को गैर हिन्दू दंगाई घोषित किया था तो क्या श्री अखिलेश यादव जी पोथीराम उपाध्याय के चरणों में लोट कर हिन्दू होने का सर्टिफिकेट लेने गए थे?*_
प्रो दिलीप मंडल ने अखिलेश यादव पर क्यों कहा जो सड़क के बीच में खड़े होते हैं कुचले जाते हैं’ ?

