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राहुल की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक:लोकसभा कब पहुंचेंगे, बंगला कब मिलेगा

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राहुल गांधी की सजा पर रोक लग गई है। मोदी सरनेम मानहानि मामले में सूरत कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने आज 134 दिन बाद पलट दिया। अब राहुल फिर से सांसद घोषित होंगे, सरकारी आवास मिलेगा, चुनाव लड़ सकेंगे। इस फैसले से जुड़े 10 जरूरी सवालों के जवाब…

सवाल-1: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा कि, ‘ट्रायल कोर्ट के फैसले का व्यापक असर हुआ है। न सिर्फ राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन का अधिकार प्रभावित हुआ, बल्कि उन निर्वाचकों का भी जिन्होंने उन्‍हें चुना था। ट्रायल जज ने अधिकतम सजा सुनाने के लिए कोई वजह नहीं दी है। अंतिम निर्णय होने तक सजा के आदेश पर रोक लगाना जरूरी है।’

सवाल-2: राहुल गांधी फिर से सांसद कब बनेंगे?

किसी सांसद को 2 साल से ज्यादा की सजा सुनाए जाने पर संसद सदस्यता स्वतः खत्म हो जाती है। ऐसे में राहुल के कन्विक्शन पर स्टे लगाए जाने के बाद उनकी संसद सदस्यता बहाल हो जाएगी। सदस्यता बहाल होने की जानकारी लोकसभा सचिवालय अधिसूचना जारी करके देगा। इसमें कुछ घंटों से कुछ महीने भी लग सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद फौरन बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मुलाकात कर जल्द से जल्द उनके संसद सदस्यता को बहाल करने की मांग की है। लोकसभा स्पीकर ने कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद इस पर फैसला लेने की बात कही है।

सवाल-3: अगर लोकसभा सचिवालय राहुल की सदस्यता बहाल करने में देरी करता है, तो क्या रास्ते हैं?

अगर किसी वजह से लोकसभा सचिवालय राहुल की सदस्यता बहाल करने में देरी करता है, तो वो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। इसी साल एक मामला देखने को मिला था।

लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल को कवारत्ती में एक सत्र अदालत से हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया गया। उन्हें 10 साल की जेल की सजा की सजा सुनाई गई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 13 जनवरी 2023 को एक अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता को अयोग्य ठहरा दिया।

25 जनवरी को केरल हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद फैजल ने हाईकोर्ट के आदेश को आधार बनाकर लोकसभा सचिवालय से अपनी सदस्यता दोबारा से बहाल करने की मांग की।

इस बीच चुनाव आयोग ने उनके लोकसभा सीट पर उपचुनाव का भी ऐलान कर दिया था। फैजल ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट में 29 मार्च को इस मामले में सुनवाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता बहाल कर दी।

सवाल-4: राहुल को सरकारी घर कब मिलेगा, इसका प्रॉसेस क्या होगा?

सांसदों को बंगले का आवंटन केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के निदेशालय के जरिए किया जाता है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसदों को बंगला आवंटन और रद्द करने के लिए सांसदों वाली एक सदन समिति है।

ये समिति ही केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से बंगला आवंटन का सिफारिश करती है। सदस्यता बहाल होने के बाद इस समिति की सिफारिश के आधार पर राहुल को बंगला आवंटित हो गया। हालांकि, जरूरी नहीं कि उन्हें 12 तुलगक रोड वाला बंगला ही आवंटित हो, जहां वो पहले रह रहे थे।

सवाल-5: कन्विक्शन पर रोक लग गई, तो क्या ये केस खत्म हो गया?

सजा पर रोक लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को फौरी तौर पर राहत दी है। इस फैसले के बाद उनकी संसद सदस्यता बहाल हो जाएगी। अगर ये स्थिति 2024 के चुनाव तक बनी रहती है तो वे चुनाव भी लड़ सकेंगे। लेकिन, अभी ये केस खत्म नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट में ये केस आगे चलेगा और कोर्ट 2 प्रमुख बातों पर विचार करेगा। पहला- क्या राहुल गांधी मानहानि के मामले में दोषी हैं? दूसरा- अगर दोषी हैं तो कितनी सजा होनी चाहिए?

अगर राहुल मानहानि के मामले में दोषी पाए जाते हैं तो स्थितियां बनेंगी। या तो दो साल की पूरी सजा मिलेगी या दो साल से कम। दो साल की सजा होने पर उनकी संसद सदस्यता खत्म हो जाएगी और 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। 2 साल से कम सजा होने पर जेल जाना पड़ेगा, लेकिन सदस्यता बहाल रहेगी और चुनाव लड़ सकेंगे। अगर निर्दोष पाए गए तो उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सवाल-6: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में क्या राहुल चुनाव लड़ सकेंगे?

अगर ये स्थिति 2024 के चुनाव तक बनी रहती है तो राहुल चुनाव लड़ सकेंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद राहुल को दोषी पाया और दो साल की सजा सुना दी, तो उनके चुनाव लड़ने पर रोक लग जाएगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि राहुल को मानहानि मामले में मैक्सिम 2 साल की सजा मिले, इसकी संभावना कम है।

सवाल-7: क्या सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी जा सकती है?

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करके सभी पक्षों से जवाब मांगा था। सभी बातों पर विचार करने और दोनों पक्षों की की बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की पीठ ने यह आदेश दिया है। संविधान के अनुच्छेद-141 के तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले देश का कानून माने जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील विराग गुप्ता के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद-137 के तहत विशेष स्थितियों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू याचिका दायर की जा सकती है। इस बारे में संविधान के अनुच्छेद-145 के तहत सुप्रीम कोर्ट के नियम और अनेक पुराने फैसले हैं। लेकिन राहुल गांधी मामले पर रिव्यू याचिका की गुंजाइश नहीं बनती।

इस मामले में राहुल गांधी ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी यानि विशेष अनुमति याचिका दायर किया था जिसके लिए संविधान के अनुच्छेद-136 में प्रावधान हैं। आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी एडमिट करने के साथ अंतरिम आदेश पारित किया है। पुराने मामलों के निपटारे के बाद ही नई एसएलपी पर सुनवाई होती है।

कोयला घोटाला मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में एडमिट किया था जिस पर अब 8 साल बाद सुनवाई की संभावना बन रही है। इसलिए राहुल गांधी की एसएलपी में फाइनल सुनवाई में कई साल लग सकते हैं। इसलिए मान हानि मामले में राहुल की सजा और दोषमुक्ति का निर्धारण करने वाले फाइनल फैसले में लम्बा वक्त लग सकता है।

सवाल-8: सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या दलीलें दी?

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा…

सवाल-9: सुप्रीम कोर्ट में पूर्णेश मोदी की तरफ से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने क्या दलीलें दी?

महेश जेठमलानी की दलीलें…

सवाल-10: राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के और कितने मामले पेंडिंग हैं?

राहुल गांधी पर मानहानि के 4 और मुकदमे चल रहे हैं, जिन पर फैसला आना बाकी है…

  1. 2014 में राहुल गांधी ने संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाया था। एक संघ कार्यकर्ता ने राहुल पर IPC की धारा 499 और 500 के तहत मामला दर्ज कराया था। ये केस महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट में चल रहा है।
  2. 2016 में राहुल गांधी के खिलाफ असम के गुवाहाटी में धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा था कि 16वीं सदी के असम के वैष्णव मठ बरपेटा सतरा में संघ सदस्यों ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया। इससे संघ की छवि को नुकसान पहुंचा है। ये मामला भी अभी कोर्ट में पेंडिंग है।
  3. 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ झारखंड की राजधानी रांची में एक और केस दर्ज किया गया। ये केस रांची की सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में चल रहा है। राहुल के खिलाफ IPC की धारा 499 और 500 के तहत 20 करोड़ रुपए मानहानि का केस दर्ज है। इसमें राहुल के उस बयान पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें उन्होंने ‘मोदी चोर है’ कहा था।
  4. 2018 में ही राहुल गांधी पर महाराष्ट्र में एक और मानहानि का केस दर्ज हुआ। ये मामला मझगांव स्थित शिवड़ी कोर्ट में चल रहा है। IPC की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज है। केस संघ के कार्यकर्ता ने दायर किया था। राहुल पर आरोप है कि उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या को BJP और संघ की विचारधारा से जोड़ा।
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