निर्मल कुमार शर्मा ‘

जर्मनी के कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर के प्रचारमंत्री गोयबल्स ने एक बार कहा था कि ‘एक झूठ को लगातार सौ बार बोलने पर वह सच लगने लगता है ! ‘ ठीक वही स्थिति प्रखर प्रतिभा सम्पन्न,न्यासंगत,तार्किक,विनम्रता की मूर्ति,क्षमाशील,विकट परिस्थितियों में भी अविचलित रहते उसका समाधान के साथ सफलतापूर्वक अपना जीवन यापन करने वाली, अपना सम्पूर्ण जीवन कष्टों और जलालतों से भरी जिन्दगी जीने को अभिशप्त द्रौपदी मृत्यु के उपरांत भी भारतीय पुरूषवादी घटिया सोच से अपने ऊपर हजारों सालों से एक मिथ्यारोपण का आरोप झेलने को अभिशप्त रही है कि, ‘महाभारत युद्ध कराने की असली दोषी द्रौपदी ही है,क्योंकि यह युद्ध उनके दुर्योधन को यह कहने से कि ‘अंधस्य अंधो वै पुत्रः मतलब अंधे का पुत्र अंधा होता है ‘ कहकर अपमानित करने से हुआ ! ‘ जबकि महाभारत के वास्तविक व प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार उक्त घृणित व अति निंदनीय घटना के होने के समय द्रौपदी उस जगह पर थीं ही नहीं ! मूल महाभारत ग्रंथ में वर्णित तथ्यों पर आधारित आलेख के अनुसार वास्तविकता यह है कि इस अत्यंत फ़ूहड़ व अश्लील घटना के समय दुर्योधन की मूर्खता पर सबसे पहले भीम,फिर अर्जुन और उसके बाद अन्य सभी पांडव हँसे थे ! यक्षप्रश्न यह भी है कि वह अत्यंत व्यवहारिक मेधावी और विदुषी महिला द्रौपदी जो अपने पाँच पुत्रों के हत्यारे अश्वत्थामा तक को क्षमा कर दिया हो,वह अपने घर आये अपने पति से भी ज्येष्ठ दुर्योधन जैसे अतिथि का अपमान क्यों करेंगी ?
आश्चर्य और दु:ख इस बात का भी है कि किसी निरपराध स्त्री मतलब द्रौपदी पर बगैर कोई अपरा़ध किए ही इतना बड़ा झूठा लांछन महाभारत काल से अब तक यथावत लगता रहा ! क्या हजारों वर्षों तक पूरे भारतवर्ष में ऐसा एक भी न्यायपरक,निष्पक्ष,निस्पृह और बहादुर व्यक्ति या संस्था इस घोर अमानवीय झूठ को पर्दाफाश कहने का साहस ही नहीं कर पाया ? सम्पूर्ण भारतीय परिदृश्य में द्रौपदी के साथ इस तरह के सफेद झूठ को हजारों सालों तक मिथ्यारोपित करते रहने जैसा दुष्कृत्य करते रहने की मिशाल दुनिया में कोई अन्य उदाहरण विरलतम् ही होगा या नहीं होगा !
द्रौपदी जैसी बहादुर,निर्भीक,बुद्धिमान, तर्कशील और हर जुल्म का अत्यंत बहादुरी और बुद्धिमत्ता के साथ प्रतिकार और विरोध करने वाली भारतीय महिला भारतीय धार्मिक पुस्तकों में कोई और वर्णित नहीं है ! उदाहरणार्थ चाहे युधिष्ठिर जैसे कापुरूष,झूठे और चरित्रहीन व्यक्ति द्वारा अपने छोटे भाई अर्जुन की पत्नी द्रौपदी को अपनी हवन का शिकार बनाने की खातिर अपनी माँ कुन्ती से ‘हम प्रसाद लाये हैं ‘,झूठ बोलकर प्राप्त करने वाला प्रसंग हो या चाहे संदेहास्पद चरित्र वाले कथित धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा जुए में अपना संपूर्ण राज्य,अपने चारों भाईयों सहित अपनी संयुक्त पत्नी को भी जुए में हारने जैसी शर्मनाक और सर्वकालीन निन्दनीय कुकृत्य करने या अपनी इज्जत,अस्मिता और स्त्रियोचित मर्यादा को कौरवों के द्वारा धूलधूसरित होते समय जो तर्क दिया उसके सामने समकालीन पुरूषवादी सोच के सभी प्रकाण्ड जनों के मुँँह पर ताले जरूर लग गये,निरूत्तर होना पड़ा,मौन धारण करना पड़ा !
इसीलिए भारतीय पुरूषवादी तत्वों और पितृसत्तात्मक समाज के ठेकेदारों ने द्रौपदी जैसे उस विलक्षण,वाक्पटु ,विदुषी और वीरांगना स्त्री से उसके मरने के हजारों वर्षों के बाद भी ये गलत लाँछन बदलास्वरूप आरोपित कर रहे हैं ! आश्चर्य और दु:ख इस बात का भी है कि ‘वही झूठ ‘ बार-बार भारतीय टेलीविजन,महाभारत सीरियल के निर्देशक,अन्य तमाम लेखकों आदि द्वारा, महाभारत और उसके समकालीन अन्य मूल ग्रंथों के बगैर गहन और गंभीर अध्ययन और शोध किए ही देश की करोड़ों जनता को ‘वही झूठ ‘ परोस रहे हैं !
भारतीय पुरूष प्रधान समाज को कभी भी स्त्रियों की ओजस्विता बर्दाश्त नहीं !
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हकीकत यह है कि हमारे समाज और हमारे देश में स्त्रियां या तो देवी बना कर या तो किसी बड़े मंदिर में या पार्क में बने मंदिर या घर में बने मंदिर में रख दी जातीं हैं या फिर उन्हें कुलटा, चरित्रहीन या व्याभिचारिणी घोषित करके उनको बुरी तरह दबाया-कुचला और लांछित किया जाता रहा है ! बीच का कोई भी रास्ता उनके लिए हमारे भारतीय समाज में नहीं है ! पुरूष प्रधान सोच वाले इस देश सब कुछ सहन किया जा सकता है परन्तु एक स्त्री की बुद्धिमत्ता,बहादुरी, ओजस्विता,तेजस्विता,विदग्धता या तार्किकता को कभी भी बर्दाश्त ही नहीं किया जा सकता ! भारतीय समाज की यह क्रूर और बीभत्स विद्रूपता और हतप्रभ कर देने वाली बिडंबना है कि उसके घर की कोई स्त्री यथा उसकी पत्नी या स्वयं उसकी पुत्री भी किसी गंभीर समस्या के समाधान के मुद्दे पर उससे जवाब-सवाल करे,और संयोग से अगर इस तरह की कोई एक-आध स्त्री भारतीय समाज में पैदा भी हुई तो उसके दमन के लिए सारा भारतीय पुरूष वाली सोच वाला समाज उसके खिलाफ प्रायः एकजुट हो जाता है !और उसके बाद द्रौपदी और सीता जैसी तेज-तर्रार,वीरांगना, विदुषी और तर्कशील स्त्रियों का गर्व और तेज दोनों ही नष्ट करने की सुनियोजित कोशिशें और भी तेज हो जातीं हैं। ऐतिहासिक तौर पर महाभारत कालीन,सर्वकालीन महान, विदुषी और वीरांगना महिला द्रौपदी की दयनीय हालत का आकलन करके देखिए कि जो अपराध उन्होंने कभी किया या कहा ही नहीं,वही सब कुछ घटिया लांधन और आरोप उनके मत्थे मढ़कर युगों-युगों से उन्हें लांछित और अपमानित किया जा रहा है !
इस देश और यहां के समाज की विद्रूपता और क्रूरता देखिए सर्वकालीन महान महिला द्रौपदी के खिलाफ संयुक्तरूप से और सुनियोजित बदनाम करने का षड्यंत्र देखिए कि अगर आप किसी भी भारतीय से पूछें कि कौरवों और पांडवों के बीच लड़े गए महाभारत युद्ध का मूल कारण क्या था ? तो महिला और पुरुष सहित लगभग संपूर्ण भारतीय समाज बगैर किसी संकोच और लज्जा के बेशर्मी से यह तत्काल उत्तर देगा कि इसके लिए द्रौपदी पूर्ण रूप से जिम्मेदार है,क्योंकि अगर वह अपने पति से ज्येष्ठ दुर्योधन को ‘अंधे का पुत्र अंधा ’ कहकर अपमानित नहीं कहती तो यह युद्ध कदापि नहीं होता ! वह आगे कहेगा कि इसी अपमान से तिलमिलाकर और प्रतिशोध की ज्वाला में धधककर दुर्योधन ने द्रौपदी द्वारा किए गए अपने अपमान का हिसाब चुकाने के लिए जुए का खेल खेला !
द्रौपदी ने कभी भी दुर्योधन से असभ्य व्यवहार नहीं किया था !
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जबकि सच्चाई यह है कि चीर हरण के पहले के जीवन काल में द्रौपदी कभी भी दुर्योधन पर हंसी ही नहीं है ! न ही उसने दुर्योधन को कभी भी और कहीं भी ‘अंधस्य अंधो वै पुत्र: मतलब अंधे का पुत्र अंधा होता है ‘ जैसा कोई कटु वचन ही कहा है ! महाभारत का लिखित तथ्य यह है कि द्रौपदी उस समय वहां उपस्थित ही नहीं थीं,जब दुर्योधन पांडवों के मय-निर्मित महल में पानी को ठोस जमीन और ठोस जमीन को द्रव या पानी समझ कर उसमें घुटनों तक डूब रहा था या टकरा रहा था या स्वयं को बचने का प्रयास कर रहा था या जहां दरवाजा था,वहां खाली जगह समझकर आगे बढ़कर उस दीवार से अपने सिर टकराए जा रहा था या वास्तविक दरवाजे को दीवार समझ कर वहां बचने की कोशिश करके हास्य का पात्र बन रहा था !
अंधस्य अंधो वै पुत्र: मतलब अंधे का पुत्र अंधा होता है – द्रौपदी ने कहा,ये बात किसी भी धार्मिक पुस्तक में नहीं लिखा है !
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महाभारत के सभा पर्व का यह सैंतालीसवां अध्याय,जिसमें कालातीत वीरांगना और विदुषी महिला द्रौपदी पर दुर्योधन को अपमानित करने का ऐतिहासिक लांछन लगाया जाता है,जिससे कौरवों और पांडवों में शत्रुता की नींव पड़ने की बात है,खुद में एक बहुत छोटा सा अध्याय है। लेकिन यह दु:खद और झूठी बात गीता प्रेस से लेकर इलाहाबाद के इंडियन प्रेस तक से प्रकाशित किसी भी पुस्तक में दुर्योधन पर हंसने वालों में द्रौपदी कहीं भी नहीं है। दुर्योधन पर उस समय हंसने वालों में सर्वप्रथम है भीम है जिससे प्रेरित होकर अर्जुन हंसता है,फिर नकुल-सहदेव और उनके बाद सेवकों तक के हंसने की बारी आती है ! उसके बाद वहां उपस्थित सभी सभा भी हंस पड़तीत है ! लेकिन द्रुपद सुता द्रौपदी या पांचाली तो वहां है ही नहीं ! फिर इस दु:खद व बेहद फ़ूहड़ तथा अश्लील प्रसंग में द्रौपदी द्वारा दुर्योधन पर हंसने का प्रसंग कैसे जुड़ गया ? निश्चित तौर पर द्रौपदी जैसी विलक्षण महिला को बदनाम करने और सार्वजनिक तौर पर लांछित करने के लिए यह अफवाहें और मिथ्या चरण सुनियोजित तरीके से प्रचारित-प्रसरित की गईं ! जबकि सदा अपने बड़ों का सम्मान करने वाली,अपने युग के सभी उपलब्ध ज्ञान और शिक्षण पद्धतियों में विधिवत दीक्षित द्रौपदी अपने एक आमंत्रित अतिथि का अपमान कैसे कर सकतीं थीं ! वास्तविकता और हकीकत यह है कि तत्कालीन पुरूषवादी सोच वाले स्त्री विरोधी भारतीय समाज को द्रौपदी जैसी विलक्षण और वीरांगना स्त्री विदग्धता ही सहन नहीं हुई !
दुनिया भर में बहुप्रचारित पूरे महाभारतकाल में जितने कठोर प्रश्न यक्ष ने पांडवों और युधिष्ठिर से नहीं किए,उससे भी हजार-लाख गुना कठोर और यथार्थवादी, सत्यपरक,मानवीय और तर्कसंगत प्रश्न वीरांगना और विदुषी द्रौपदी ने कौरवों की सभा में भारतीय समाज में सार्वजनिक रूप से महाभारतकालीन कथित योग्यतम् और श्रेष्ठतम् पुरूषों यथा भीष्म, कृपाचार्य,द्रोणाचार्य और मूर्ख तथा कापुरूषों पांडवों यथा युधिष्ठिर,भीम,अर्जुन,नकुल और सहदेव आदि से खुलेआम किए ! महाकवि व्यास लिखित महाभारतकालीन इस वीरांगना और विदुषी नायिका ने अपने प्रश्नों और तर्कशक्ति से पूरी कौरवों की सभा को ही निरुत्तर करके रख दिया ! बारह वर्ष के वनवास में उसके प्रश्नों से युधिष्ठिर अनेक बार न सिर्फ मौन धारण करने को विवश हुआ बल्कि विदुषी महिला द्रौपदी के सामने उसके गिड़गिड़ाने तक की दयनीय स्थिति भी देखी जा सकती है !
द्रौपदी जैसी वाकपटु ,तर्कशील और वीरांगना महिला की उक्त वर्णित बहादुरी और न्यायोचित तार्किकता ही उसे पुरुषवादी मानसिकता के भारतीय समाज की आंखों की किरकिरी बना गई ! यह भी विचारणीय है कि पूरे महाभारतकाल में द्रौपदी ने कभी भी एक भी अनावश्यक,व्यर्थ व अतार्किक प्रश्न कभी नहीं किया है। फिर द्रौपदी जैसी विदुषी और वीरांगना महिला के खिलाफ ऐसा झूठ कैसे गढ़ दिया गया ? आज के वर्तमान समय में भी यह सर्वमान्य तथ्य है कि किसी भी परिवार में लड़ाई – झगड़े की मुख्य वजहें धन,संपत्ति ,जमीन-जायदाद और स्त्रियां ही होतीं हैं ! पूरा महाभारत भी एक प्रकार से उक्त वर्णित कारणों से ही लड़ा गया ! पूरा महाभारत युद्ध भी कौरवों और पांडवों के बीच हुए जर-जमीन का झगड़ा प्रकारांतर से एक पारिवारिक कलह का मामला ही तो था !
महाभारत युद्ध का असली गुनहगार कथित धर्मराज युधिष्ठिर है !
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वास्तविकता यह है कि कौरवों द्वारा बेईमानी करने,दुत्कारने और उत्तराधिकार में कम हिस्सा पाने के बावजूद कृष्ण आदि की मित्रता की वजह से पांडव लगातार उन्नति कर रहे थे,आगे बढ़ रहे थे,एक तरह से उनका राज्य,मान,यश,कीर्ति और धन आदि सभी कुछ ठीक से फल-फूल रहा था लेकिन उनके और कौरवों के बीच स्त्री से जुड़ा कोई मुद्दा भी नहीं था। महाभारत की इस कहानी में स्त्री का वह अत्यंत घटिया मुद्दा चरित्रहीन, लंपट,जुआरी,ढुलमुल आचरण वाले कथित धर्मराज युधिष्ठिर ने जुए के अति निन्दनीय खेल खेलकर कौरवों के हाथ में पकड़ाकर दिया !
कथित धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा किए गए इस घोर निन्दनीय जुए की इस घटना से महाभारत की कहानी में स्वाभाविक रूप से द्रौपदी जैसी एक अत्यंत विदुषी और वीरांगना महिला की अस्मिता को तार-तार करने और सार्वजनिक तौर पर उनकी मान-मर्यादा को बट्टे लगाने के दुष्कर्म करने का एकमात्र दोषी कापुरूष कथित तौर पर धर्मराज युधिष्ठिर ही था ! क्योंकि इस अत्यंत घृणित घटना से,जिसमें कथित धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा जुआ खेलने और एक बेहद गैर-जिम्मेदार और मर्यादाहीन आचरण में अपनी पत्नी तक को दाव पर लगा कर हार जाने से मर्यादावादी पुरुषोचित कुंठा एकदम तिलमिला गई और उस दाव के समानांतर द्रौपदी के भीतर एक भारी दोष देखना आवश्यक हो गया था !
अत्यंत विदुषी द्रौपदी को नाहक बदनाम करने के लिए ये मिथ्यारोपण मढ़ा गया है !
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फिर तत्कालीन पुरूष प्रधान भारतीय समाज के लिए द्रौपदी पर यह एक एकदम झूठ और मिथ्या आरोप बहुत सोचविचारकर और सुनियोजित तौर पर गढ़कर,थोप दिया गया,जो महाभारत के किसी भी संस्करण में न लिखे होने के बावजूद आज तक भी हरेक भारतीय के मन में स्थाई रूप से अंकित है। इस मिथ्या लांछन और आरोप का जितना बड़ा कारण वर्तमान पुरूषवादी भारतीय समाज है,उससे भी कहीं बड़ा और गहरा कारण वर्तमान समय के संचार के सबसे बड़े साधन भारतीय टेलीविजन, समाचार पत्र,टीवी सीरियल्स,सिनेमा के स्त्री विरोधी लेखक,निर्माता,निर्देशक और कथित महिला लेखिकाएं भी हैं,जो बगैर सोचे-समझे बिना गंभीर रूप से चिंतन और शोध किए महाभारत युद्ध जैसे युद्ध के लिए कापुरूष,चरित्रहीन,लंपट कथित धर्मराज युधिष्ठिर के सारे कुकृत्यों और दोषों को अपने ही वर्ग की एक वीरांगना और विदुषी महिला द्रौपदी पर मढ़ दीं हैं !
यह पौराणिक तथ्य है कि द्रौपदी ने तो अपने पांच पुत्रों के हत्यारे अश्वत्थामा तक को क्षमादान दे दिया था,जिस महिला ने कथित धर्मराज युधिष्ठिर के झूठ की वजह से अपनी स्त्री मर्यादा और शील तक का घोर अनैतिक व अति घृणित विभाजन तक को सहन किया,उन्हीं महिला वीरांगना महिला पर यह भारतीय समाज अपने मर्यादारहित,कौरवोचित आचरण के जरिए लगातार अपमानित करने के अवसर खोजता रहा है ! इसी तरह का एक घृणित प्रसंग द्रौपदी को बदनाम करने के लिए महाभारत में कर्ण से द्रौपदी के प्रेम की कपोल-कल्पित कथा को जोड़ना भी है !
द्रौपदी को बदनाम करने में पुरूष लेखकों से महिला लेखिकाएं ज्यादा जिम्मेदार हैं !
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ऐसी अनेकों घृणित कथाएं द्रौपदी के प्रति वर्तमान समय की कथित लेखक-लेखिकाओं की अदृश्य कुंठा का एक महत्वपूर्ण और ज्वलनशील उदाहरण और प्रमाण हैं। भारतीय समाज और साहित्य में महाभारतकालीन ऐतिहासिक व पौराणिक तौर पर अद्वितीय, अतुलनीय और अद्भुत,वीरांगना व अत्यंत व्यवहारिक विदुषी नायिका द्रौपदी ने अपने जीवन काल में कभी यह कल्पना भी नहीं की होंगी और न कभी सोची होंगी कि उन्होंने अपने जीवन काल में वे कभी भी जिस शब्द को बोली ही नहीं,उस बात की मिथ्या आंच भी उसके दामन को पुरूषवादी भारतीय समाज उस पर थोपकर युगों-युगों तक पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में दागदार बनाती रहेगी और पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के कथित पुरूष तथा महिला बुद्धिजीवियों का पूरा कुनबा भी भीष्म की तरह मुंह बांधे एक निष्क्रिय व निस्तेज दर्शक बना रहेगा !
वास्तविकता और कटु सच्चाई यह है कि महाभारत युद्ध कराकर हजारों-लाखों लोगों की निर्मम हत्या कराने का असली गुनहगार कथित धर्मराज युधिष्ठिर सीधे तौर पर जिम्मेदार था ! सबसे पहले उसके द्वारा कुछ अन्य कुकर्मों पर भी दृष्टिपात कर लेना चाहिए,उदाहरणार्थ यह जगजाहिर बात है कि पांचाल राज्य के राजा द्रुपद नरेश द्वारा आयोजित स्वयंवर में मछली की आंख में अपना सटीक तीर भेदकर स्वयंवर में द्रौपदी को जीतकर लाने वाला श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन ही द्रौपदी का नियमसम्मत और सामाजिक दृष्टिकोण से असली पति था,लेकिन पतित,व्यभिचारी,लंपट और जुआरी कथित धर्मराज युधिष्ठिर अपनी मां से छूठ बोलकर उस अबला नारी द्रौपदी का भी खुद को पति बनाने के साथ अपने अन्य तीन भाइयों को भी द्रौपदी का पति बनाने का अक्षम्य अपराधी और गुनहगार है !
महिला लेखिकाएं भी द्रौपदी जैसी एक अत्यंत बहादुर,विलक्षण महिला के बारे में इस लांछन का प्रसंग लिखने से पूर्व गंभीर अध्ययन ,मनन-चिंतन नहीं करतीं ! वे भी भारतीय पुरूषवादी घटिया सोच में खुद को बेशर्मी से सम्मिलित होकर बेगुनाह और निष्छल चरित्र वाली वीरांगना और विदुषी महिला द्रौपदी को कोसने में शरीक हो जातीं हैं !
इसके अलावा जुए में खुद हार जाने के उपरांत अपने अन्य भाइयों और साझा पत्नी को उनकी बगैर पूर्व सहमति के जुए में हार जाने वाला घोर अपराधिक कुकृत्य करनेवाला,असभ्य, मूर्ख तथा जुआरी कथित धर्मराज युधिष्ठिर द्रौपदी के सटीक और तर्कसंगत प्रश्नों के सामने मुंह झुका लेने और कौरवों द्वारा भरी सभा में अपनी पत्नी द्रौपदी की अस्मत को नीलाम करके जो जघन्यतम् अपराध किया,वह महाभारत युद्ध कराने का असली सूत्रधार और गुनहगार तथा दोषी है !
अब द्रौपदी जैसी विलक्षण विदुषी व वीरांगना को लांछन मुक्त करने के यत्न किए जाने चाहिए
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द्रौपदी जैसे वीरांगना और बुद्धिमति महिला के लिए सबसे उचित सम्मान और न्याय के लिए सबसे उचित सद् कार्य यह होगा कि इस देश के बेहद निष्पक्ष विद्वतजन लोगों द्वारा मूल महाभारत और उसके समकालीन ऐतिहासिक ग्रंथों का गहन और गंभीर का अध्ययन और शोध करके कालातीत,महान और विलक्षण प्रतिभा संपन्न,वीरांगना और विदुषी महिला द्रौपदी को इस मिथ्या कलंक से मुक्त करवाने का काम करें । उस महान वीरांगना के प्रति सही पश्चाताप भी यही होगा कि भविष्य में ‘इस लांछन ‘से उन्हें मुक्त किया जाय और जुआरी,लंपट तथा व्यभिचारी कथित धर्मराज युधिष्ठिर जैसे वास्तविक दोषियों को महाभारत युद्ध कराने के असली अपराधी घोषित करने हेतु नामित किया जाय ।
-निर्मल कुमार शर्मा ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक, पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र,निष्पक्ष,बेखौफ,आमजनहितैषी,न्यायोचित व समसामयिक लेखन,संपर्क-9910629632, ईमेल – nirmalkumarsharma3@gmail.com