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क्यों खाना जरूरी है चूना 

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      नग़्मा कुमारी अंसारी 

कहते हैं जो चुना आप पान में या देशी सुर्ती में खाते है वो सत्तर बीमारी ठीक कर देता है.

चूना अमृत है. कैल्सियम का भंडार है। चूना एक टुकडा छोटे से मिट्टी के बर्तन मे डालकर पानी से भर दे. चूना गलकर नीचे और पानी ऊपर होगा. वही एक चम्मच पानी किसी भी खाने की वस्तु के साथ लेना है.

     50 के उम्र के बाद कोई कैल्शियम की दवा शरीर मे जल्दी नही घुलती चूना तुरन्त घुल व पच जाता है.  जैसे किसी को पीलिया हो जाये माने जॉन्डिस उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना. गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है।

    यही चूना नपुंसकता की अच्छी दवा है. अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे. जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी भी अच्छी दवा है यह चूना।

     बिद्यार्थियों के लिए चूना बहुत अच्छा है. मेधा और लम्बाई बढाता है. गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए. दही नही है तो दाल में मिला के खाओ. दाल नही है तो पानी में मिला के पियो.

     इससे लम्बाई बढने के साथ स्मरण शक्ति भी बढ़ती है। मतिमंद बच्चे की यह अच्छी दवा है. जो बच्चे बुद्धि से कमतर है, देर में काम करते है, देर में सोचते है, हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे।

    बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो अच्छी दवा है चूना। हमारे घर में जो माताएं है, अगर पचास की उम्र से पहले उनका मासिक रुक गया है तो उनको गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना चाहिए. दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना चाहिए।

  गर्भावस्था में चूना रोज खाना चाहिए. गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है. अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर मिलाके रोज पिलाइए. नौ महीने तक लगातार दीजिये. तीन खास फायदे होंगे :

 1. माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी.

2. नॉर्मल डिलवरी होगी.

2. बच्चा हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा.

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