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नरेंद्र मोदी आंदोलन से क्यों डरते हैं ?

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गोपाल राठी, पीपरिया

नरेंद्र मोदी जेपी आंदोलन के समय युवा थे l इमरजेंसी लगी सारे विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया l गिरफ्तारी के डर से मोदी साहेब गायब हो गए और फिर इमरजेंसी के बाद प्रकट हुए l इस दौरान वे कहाँ कहां छिपते रहे और क्या किया किसी को नहीं मालूम l जबकि इसी समय इस बिरादरी के शिवराजसिंह चौहान जो उस समय विद्यार्थी परिषद के नेता थे  गिरफ्तार किए गए l जब उनकी आयु महज़ 16 वर्ष थी l शिवराजसिंह 19 महीने जेल में रहे जबकि मोदी जी 19 महीने जेल से बाहर मटरगश्ती करते रहे l वे स्टेशन पर चाय बेचते थे जैसी एक काल्पनिक कहानी और लांच की गई कि मोदी जी इमरजेंसी में भूमिगत रहकर जार्ज फर्नांडिस के बॉडी गार्ड थे l यह कहानी जार्ज के मरने के बाद सामने आई l जीते जी अगर यह झूठ फैलाया जाता तो जार्ज खुद खंडन कर देते है l इमरजेंसी में जार्ज के साथी रहे और बड़ौदा डायनामाइट केस के सहअभियुक्त रहे किसी भी व्यक्ति ने इस कहानी की पुष्टि नहीं की है l

राममंदिर के लिए आडवाणी की रथयात्रा को  हम राम के नाम पर राजनैतिक पाखंड मानते रहे है l लेकिन भारतीय राजनीति का यह वही समय था   जब साम्प्रदायिकता परवान चढ़ने लगी l धुर्वीकरण एक राजनैतिक औजार बना l आडवाणी जी की इस रथयात्रा में नरेंद्र मोदी भी साथ थे l रथयात्रा  बिहार पहुंचने पर  आडवाणी जी की गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी l गिरफ्तारी के डर से मोदी जी रथयात्रा के बिहार पहुंचने के पहले ही गायब हो गए और महीनों दिखाई नहीं दिए l बाद में बाबरी विध्वंस के लिए जुटाई गई कार सेवकों की भीड़ में भी मोदी जी कहीं नहीं दिखे l जबकि इस कार्यक्रम में संघ भाजपा के साधारण कार्यकर्ता से लेकर दिग्गज नेता मौजूद थे l यहां भी गिरफ्तारी के डर से  मोदी जी ने दूर रहना श्रेयस्कर समझा l भाजपा में बहुत से नेता देखे लेकिन गिरफ्तारी और जेल जाने से डरने वाला मोदी जैसा कोई दूसरा नहीं देखा l

आंदोलनकारी की पहली पहचान यही होती है कि वह गिरफ्तारी जेल और पुलिस प्रताडना से नहीं डरता l वह अपने उद्देश्यों के लिए हर जोखिम उठाने को ततपर रहता है l हर त्याग के लिए सहर्ष तैयार रहता है l देश की आज़ादी के आंदोलन में अहिंसक और सशस्त्र आंदोलन में यकीन रखने वालों ने अपने अपने ढंग से योगदान दिया l यह 1857 से 1947 तक यह आंदोलन अनवरत चलता रहा l  अनगिनत लोगों ने अपना बलिदान दिया l जेल की यंत्रणा  सही l

संघ परिवार का स्वतन्त्रता के आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा इसलिए वे आंदोलन का महत्व ही नहीं समझते l आंदोलन लोकतंत्र की आत्मा है l विश्व मे जहाँ भी लोकतंत्र है वहां इसका प्रयोग किया जाता है l तानाशाह इसे पसन्द नहीं करते ,इसकी उपेक्षा करते है ,इसका मज़ाक उड़ाते हैं ,बदनाम करते है और क्रूरता से दमन करते हैं l

दुनिया को बदलने वाले आंदोलनकारी ही रहे हैं l संघ की शाखा में दण्ड पेलने वाले कायर नहीं l दुनिया के सबसे बड़े आंदोलन कारी राष्ट्रपिता थे .शायद इसलिए चड्डी वालों ने उन्हें मरवा दिया .आंदोलन लोकतंत्र की आत्मा है l जो आंदोलन से डरता है उंसे कुचलता है या बदनाम करता है वह लोकतंत्र का सबसे बड़ा विरोधी है l

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