Site icon अग्नि आलोक

*राहुल गांधी देश ही नहीं विदेशों में भी क्यों हैं लोकप्रिय!*

Share

  -सुसंस्कृति परिहार 

हालांकि भारत देश की सरकार की नज़र में राहुल गांधी की प्रतिष्ठा लेशमात्र भी नहीं है जबकि वे लोकसभा में प्रतिपक्ष नेता के पद पर विपक्षी दलों द्वारा चयनित हैं।पांच बार से सांसद हैं।वे उत्तर और दक्षिण भारत के सांसद रहे हैं , इस तरह वे समूचे देश की बड़ी आबादी का सदन में प्रतिनिधित्व करते हैं। संवैधानिक रुप से उन्हें केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है।एक तरह से वे देश के शैडो प्रधानमंत्री की हैसियत रखते हैं। लेकिन भारत सरकार उनकी जितनी उपेक्षा कर रही है उन घटनाओं से राहुल गांधी की छवि देश और विदेश में और अधिक मुखर होती जा रही है।

आपको विदित हो संवैधानिक नियम है कि देश में जब कोई विदेशी राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री आता है तो प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता से मिलवाने की व्यवस्था करवाते हैं तथा उनके सम्मान में दिए भोज वार्ताओं सादर आमंत्रित करते रहे  है।यह सब इसलिए ज़रूरी होता है कि देश के पक्ष और विपक्ष मिलकर संपूर्ण देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।और देश के विकास की सहमति बनाएं यह परम्परा भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटलजी और फिर मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल तक जारी रही।  लेकिन दकियानूस और प्रतिपक्ष को समाप्त करने करने वाली 2014 से सत्ता पर आरुढ़ सरकार राहुल गांधी के सत्य से डरी हुई और इतनी मक्कार है कि उसने  संविधान का उपहास उड़ाते हुए,इस कार्यविधि पर रोक लगाई हुई है जो अनुचित और संविधान प्रदत्त मान्य प्रावधानों का सरासर उल्लंघन है। यह प्रजातंत्र को फ़ासिज़्म की ओर ले जाने का जीता जागता प्रमाण है।

ऐसे कथित लोकतांत्रिक देश के प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी को दुनिया इसलिए सुनना चाहती है। उनकी भारत जोड़ो यात्रा ने भी दुनिया को महात्मा गांधी की यात्राओं की याद दिला दी।इस यात्रा ने उन्हें देश की ज्वलंत समस्याओं से रुबरु कराया। उन्हें जिस तरह विभिन्न याचिकाओं के जरिए परेशान किया गया उसकी कई कहानियां हैं।हाल ही में नेशनल हेराल्ड को लेकर झूठे अपराध में उनकी मां कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी को कितनी परेशानियां झेलनी पड़ी उसका निराकरण हाल ही में हुआ है और इस मनगढ़ंत आरोप से इस परिवार को मुक्ति मिली है।ऐसी ही अनेक यातनाएं उनके मानसिक उत्पीड़न हेतु स्वत: मोदीजी और भाजपा नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने उन्हें दी हैं।इस सबके बावजूद आज राहुल गांधी अपनी जान जोखिम में रख साहस के साथ  निर्भीकता पूर्वक सत्य और संविधान की रक्षार्थ जुटे हुए हैं।उसकी चर्चा बराबर विदेशों में युवाओं और नेताओं के बीच होती हैं।इतना ही नहीं उन्हें सुनने अमेरिका और यूरोप के कई विश्व विद्यालय उन्हें आमंत्रित कर चुके हैं। उन्हें वहां आयातित भारतीय समुदाय से नहीं बल्कि वहां रह रहे भारतीयों के अलावा क्षेत्र विशेष के युवाओं से जो सम्मान मिल रहा है।वह भी सरकार की आंख का कांटा है।

आज जब चारों ओर लोकतंत्र  के आवरण में फासिस्ट ताकतें अपना रुतबा बढ़ा रही हैं उस वक्त लोकतांत्रिक रास्ते से इन ताकतों के छल और छद्म से भरे कथित लोकतंत्र के ख़िलाफ़ राहुल द्वारा उठाई ये आवाज़ विदेशों में लोकप्रिय हो रही है।लगता तो ऐसा है कि महात्मा गांधी के बाद उनके पथ का राही राहुल दुनिया में कथित  लोकतांत्रिक देशों में पूंजी वादी और फ़ासिस्ट ताकतों के ख़िलाफ़ एक युवा आंदोलन तैयार कर रहा है।जिसकी महती आवश्यकता है।

जहां तक देश का सवाल है यहां ऐसी ताकतों की बुनियाद 1925 में रख दी गई जो लगभग नब्बे साल बाद  झूठ-फरेब से देश की सत्ता पर काबिज़ हैं।पहले आमचुनाव में 30% जनता ने प्रभु राम के नाम पर वोट देकर इन्हें  जिताया लेकिन इसके बाद  सत्ता हाथ में आते ही इस सरकार ने वोट चोरी, सांसदों विधायकों की खरीद फरोख्त और स्वतंत्र जांच एजेंसियों की विरोधियों पर दबिश,झूठे इल्ज़ामों की दहशत, अल्पसंख्यकों की घोर उपेक्षा, कारपोरेट का साथ , कार्यपालिका, न्याय पालिका का दुरुपयोग और धर्मांधता की बदौलत सत्ता हथियाई है। अब दस साल बाद जाके ये रहस्य उजागर हुआ है जिसे राहुल गांधी ने मय प्रमाणों के सामने लाया है।अब तो राहुल गांधी की आंधी चल रही है और देश की जनता उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रुप में देखने लगी हैं। जबकि उनके करीबी जानते हैं वे प्रधानमंत्री बनने के इच्छुक नहीं हैं लेकिन कांग्रेस और ऐसे लोगों की सरकार चाहते हैं जो संविधान और सत्य के साथ खड़े हों। क्योंकि राहुल गांधी को मनमोहन सिंह जी ने राहुल को दो प्रधानमंत्री बनने का आफर दिया, लेकिन वे मंत्री भी नहीं बने। ठीक अपनी मां की तरह जिन्होंने दो बार प्रधानमंत्री पद को ठुकराया।इसकी मिसाल दुनिया में कहीं नहीं मिलती।

यही वजह है कि राहुल गांधी की लोकप्रियता का ग्राफ निरंतर ऊंचा उठता जा रहा है।जिसे लेकर हमारी सरकार की बैचेनी बढ़ रही है।आने वाले समय में यकीन है कि देश सत्य, अहिंसा और संवैधानिक रास्ते पर पुनः अग्रसर होकर देश ही नहीं दुनिया को फासिस्ट ताकतों से बचाएगा।

Exit mobile version