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खौफजदा क्यों है मोदी सरकार

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हिसाम सिद्दीकी

तारीख (इतिहास) में पहली बार तीन सौ तीन सीटेंं जीतकर बीजेपी की मुकम्मल अक्सरियत हासिल करके दोबारा मरकजी सत्ता में आए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार इतनी खौफजदा क्यों है। यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। कभी वह अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए यूएपीए और राजद्रोह जैसे सख्त कवानीन का इस्तेमाल करते हैं, कभी अपने मुखालिफ लीडरान, जजों, सरकारी अफसरान, अपने वजीरों और सहाफियों यहां तक कि अपने खुशामदी सहाफियों तक की जासूसी कराते हैं तो कभी किसी प्रदेश में मेम्बरान असम्बली खरीद कर दूसरी पार्टियों की सरकार गिरवाते और बीजेपी की सरकारें बनवाते हैं।

कारपोरेट दुनिया के अपने दोस्तों के इशारे पर उन्हें ही फायदा पहुंचाने के लिए नए किसानी कानून लाते हैं जब किसान उन कवानीन की मुखालिफत में आंदोलन करते हैं मोदी का मीडिया सेल किसानों को दहशतगर्द, खालिस्तानी और पाकिस्तानी एजेण्ट कहकर बदनाम करता है तो खुद मोदी आंदोलन करने वाले किसानों को ‘आंदोलन जीवी’ बताने लगते हैं। मोदी और बीजेपी सरकारों के खिलाफ अगर कोई अखबार सच्ची खबरें शाया (प्रकाशित) करता है और कोई चैनल खबरें दिखाता है तो उनपर इनकम टैक्स के छापे पड़ने लगते हैं।वह खुद और उनकी सरकार में शामिल दूसरे वजीर पार्लियामेंट से सड़क तक हर जगह झूट बोलते हैं। उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान चारों तरफ कोहराम मचा रहा। यूपी में न अस्पतालों में बिस्तर मिल रहे थे, न आक्सीजन, न दवाएं और इंजेक्शन, न श्मशान और कब्रस्तान में जगहें। योगी सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम दिखी, गंगा के किनारे उन्नाव-कानपुर से गाजीपुर-बलिया तक लाशें ही लाशें दिखाई दीं। जिनकी तसावीर मीडिया में आने के बाद पूरी दुनिया में देश की जबरदस्त बदनामी हुई। इसके बावजूद बनारस आकर वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने इंतेहा दर्जे का झूट बोलते हुए योगी आदित्यनाथ की पीठ थपथपाई और कह दिया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान योगी सरकार ने जितने अच्छे तरीके से काम किया वह बेमिसाल (अभूतपूर्व) था।मोदी और उनकी सरकार के खौफ का आलम यह है कि देश में रोज बरोज बढती बेरोजगारी का अंदाजा आम लोगों को न लगने पाए, इसलिए उन्होने बेरोजगारी के आदाद व शुमार (आंकडे़) रखने का सिस्टम ही खत्म कर दिया।

मुकम्मल अक्सरियत होने के बावजूद उनके खौफ की शायद यह वजह है कि इतने बड़े पैमाने पर गलतबयानी (झूट) करने और हर मोर्चे पर नाकाम रहने वाली सरकार देश की तारीख (इतिहास) में कभी बनी ही नहीं। लोक सभा में कांग्रेस मेम्बरान की तादाद इतनी भी नहीं है कि पार्टी के किसी लीडर को लीडर आफ अपोजीशन का दर्जा मिल पाता। इसके बावजूद मोदी सोते-जागते कांग्रेस और राहुल गांधी पर ही हमलावर रहते हैं। चंद रोज पहले उन्होंने पार्लियामेंट में ही कह दिया कि कांग्रेस उन्हें हज्म नहीं कर पा रही है। सवाल यह है कि जिस पार्टी की इतनी भी हैसियत नहीं है कि उसके किसी लीडर को लीडर आफ अपोजीशन का दर्जा मिल सके। अगर वह पार्टी मोदी को हज्म (पचा) नहीं कर पा रही है तो मोदी इतने परेशान क्यों हैं?मोदी के मीडिया सेल ने बेशुमार काला धन खर्च करके पूरे देश में राहुल गांधी की तस्वीर (छवि) ‘पप्पू’ की बनवा दी। वजह सिर्फ यह है कि मोदी और उनकी सरकार सियासी एतबार से अगर सबसे ज्यादा किसी से खौफ खाती है तो वह कांग्रेस और राहुल गांधी ही हैं। जिस तरह पूरा आरएसएस आज तक पंडित जवाहर लाल नेहरू और उनकी शख्सियत से खौफजदा रहता है ठीक उसी तरह मोदी और उनकी सरकार आजकी कांग्रेस और उसके लीडर राहुल गांधी से खौफजदा रहते हैं। राफेल सौदा हो, पेगासस के जरिए जासूसी कराने का मामला हो, किसान कानून हो या सरकार का देश मुखालिफ कोई दूसरा कदम।

राहुल गांधी ही हर मोर्चे पर पूरी तरह बेखौफ होकर सरकार से लड़ते दिखाई दिए हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि अपोजीशन के तमाम लीडरान में अकेले राहुल गांधी है जिन्होने हर मोर्चे पर मोदी सरकार और आरएसएस से मोर्चा लिया है। बाकी लीडरान ने मोर्चा लेना तो दूर किसी ने राहुल गांधी का साथ तक नहीं दिया। अब मगरिबी बंगाल में मोदी को धूल चटाने के बाद ममता बनर्जी ने जरूर हर मामले में मोदी से मोर्चा लेना शुरू किया है।मोदी और उनकी सरकार के खौफजदा रहने की एक वजह यह भी है कि सात साल बाद अब ऐसा महसूस होने लगा है कि मोदी में एक कामयाब वजीर-ए-आजम बनने की सलाहियत ही नहीं है। वह जितनी छोटी-छोटी बातों में मुलव्विस होते हैं उसे देखकर साफ लगता है कि वजीर-ए-आजम तो दूर किसी प्रदेश का कोई मामूली वजीर भी ऐसी हरकत नहीं करेगा। अमरीका के कई सदर और दुनिया के बेश्तर (अधिकांश) मुमालिक में ऐेसे हुक्मरां हुए हैं जो बहुत ही मामूली घरों और पसमंजर से आए थे लेकिन अपने मुल्क का हुक्मरां बनने के बाद उन्होने खुद को हुक्मरां के मेयार और वकार के मुताबिक ढालने का काम किया। मोदी शायद दुनिया के अकेले हुक्मरां हैं जो किसी मामूली कुन्बे से आए और वजीर-ए-आजम बन गए तो वह वजीर-ए-आजम के ओहदे के वकार और मेयार को खींच कर अपने मेयार पर ले आए। यह बात देश और देश की जम्हूरियत के लिए इंतेहा दर्जे तक नुक्सानदेह और खतरनाक है। हैरत तो यह है कि उन्होने वजीर-ए-आजम के ओहदे और देश के साथ क्या किया है इसका उन्हें एहसास होने के बजाए उन्हें इस बात पर फख्र है कि वह जो कुछ कर रहे हैं वही सही है।

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