शराबी परहेजगार से कहता है कि तू मुझे धार्मिक स्थान पर बैठ कर शराब क्यों नही पीने देता,फिर कहता है ये परहेजगार मुझे वो जगह बता दे जहाँ ईश्वर न हो । ये एक मशहूर शेर का तर्जुमा है
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हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली ,,,,,,,,
ये भी एक मशहूर गज़ल के बोल है ।
मित्रों अब आप समझ ही गए होंगे कि मैं क्या बात करने जा रहा हूँ । जी हा बात है हमारे प्रदेश की नई शराब नीति की ,बार शॉप और आहतों की जो सुविधा पीने के लिए मयकशो को मिल रही थी वो अब अप्रैल की पहली तारीख से नही मिलेगी । बात इतनी सी है लेकिन सभी अपने अपने ढंग से उसका आंकलन कर रहे है वैसे ही जैसे अंधे हाथी के अंग छू कर कर रहे थे ।
प्रदेश के मुखिया जी को अब समझ मे आया कि लोग शराब पी कर वाहन चलाते है जिससे दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है अच्छा है देर आये दुरस्त आये,पुलिस का कहना है कि अपराधों का ग्राफ गिरेगा,बंदा घर मे पियेगा तो अधिक से अधिक पत्नी या परिवार से विवाद करेगा , इसका एक पहलू ये भी है कि कई पत्नियां इस बात से भी खुश होगी कि जो पति घर रात 12 बजे आता था वो 9 बजे ही आ जायेगा ।
जो भी हो मेरी नज़र में यह एक अच्छा फैसला सरकार ने लिया है नशे को हतोत्साहित करने की दिशा में बढ़ता कदम है,प्रदेश में जितने भी आहते चल रहे थे वो सभी अधिकांश बाहुबलियों के थे आहतों में शराबियों के नाम पर असामाजिक तत्व का जमावड़ा रहता था कई बार ये तत्व आहतों से निकल कर लूटपाट की वारदातों को अंजाम देते थे किसी ने इस बात की फिक्र भी की थी कि आहतों को चलाने वाले,चखना बेचने वाले बेरोजगार हो जाएंगे तो मेरा कहना है चखना बेचने वालों से चखना खरीद कर लोग घर भी तो ले जा सकते है,अहाता चलाने वाले बाहुबली को कोई फर्क नही पड़ने वाला इस लिए इस बात की चिंता न करें कोई देश के कितने ही महा नगरों में बार शॉप या आहते नही है परंतु वहां शराब बिक्री में किसी प्रकार की कमी नही आई है,शौकीनों के लिए नए परमिट बार खुलेंगे। ताबड़तोड़ लिया गया शासन का ये फैसला राजनीतिक गलियारों में किसी फायरब्रांड नेता की जीत के रूप में भी निरूपित किया जा रहा है आने वाले चुनावो को देखते महिला मतदाता को खुश करने का प्रयास भी है.
इसका परोक्ष फायदा ये भी है कि पोलिस वाले गली मोहल्लों में मुस्तेदी से गश्त करेंगे कि कोई मयकश जाम छलकाते मिल जाये तो कुछ शुभ लाभ हो जाय ।
इस फैसले से महिला वर्ग प्रसन्न है , थोड़ी दिक्कत उन पियक्कड़ों को है जो चोरी छिपे पीते है , उनके घर के प्रसाधन उनके पीने का साधन बन सकते है ,समस्या है तो समाधान भी निकल आते है
किसी शायर ने खूब कहा है ।
जब तक थी बोतल में बंद मैं आबरू से थी ।किसी ओछे के मुंह लगी और बदनाम हो गई ।

