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विज्ञापन जनित सम्मान की गंगा  का फायदा मीडिया वाले क्यों ना उठाएं?

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धंधेबाजों से भी, गजब धंधा किया जा रहा है !!! यहां पैसे देकर सम्मानित होने का चलन बढ़ गया है

इंदौर/भोपालः (राजेन्द्र के गुमा/सात्विक गुप्ता) भामक विज्ञापन प्रसारित करने पर कने वाली कार्यवाही की खनेवाले अखबार, लगातार भ्रामक विज्ञापन खप यो है हमारे यहां का सिस्टम ही ऐसा से चला जिम्मेदारों की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है. कारोबारी, डॉक्टर, असा वा अन्य कोई जो चाहे वो विज्ञापन जनित पेड समान ले सकता है और अपनी बहवाली के साथ, स्वमेव जनित सफलता की कहानी गढ़ा करवा सकता है फिर भाते ही अंदर से पूरे खरखते हो।

धंधेबाजों से सजब धंधा किया जाया है कई लोग ऐसे विज्ञापन जनित पेड सम्म्हन पा हे है, धंधेबाजों से भी, गजब का धंधा किया रहा है ।।। जिनके प्रोजेक्ट बेचेबिनहीं जिन अफसरों पर विभागीय जांच कल सी है वो विज्ञापन जनित पेड़ सम्मान की कहानी में सफलता का एंका बजा रहे है।।। यहां पैसे देकर

सम्मानित होने का चालन बढ़ गया है. सफेद कागज पर काला खेल आपकों

नजरों के सामने सफेद कागार पर काला चल रहा है, वो भी उनके द्वारा खेला जा है जो दुनिया के फाले खेल को उजागर करने का दंभ भरते है. करें भी क्यों नहीं हर करोड़ों लोगों पर राज कर लेते है, दोष उनको देते है, ये कभी नहीं सोचते की हम ताकतवर के साथ

से लेते हैल को यल और को मह कहने कोशिश नहीं की है? जनता भी सब

की हिम्मत अधिकतर लोगों में नहीं होती है, यहां की भगत सिंह पड़ोसी के घर में जन्म ले, वे सोच है तो अखबार वाले भी बाजारवाद का फायदा क्यों ना …? लोग अपनी लड़ाई भी लड़ने की है उमीद दूसरे से करते है, खुद के लिए भी जोखिम भूना नहीं चाहते है तो मीडिया वाले भी जरा क्यों हर कोई व्यय करा है तो सिर्फ मोडिया वालों से ही पूरी उम्मीद क्यों की जाती है? जो इस तरह के बाजार में नहीं है, हिलोमेटिक खबर नाहीं, सोधी खबर लिखते है उन अखबारों की कितने लोग बाद करते है, खरीदते है?

हर कोई, हर किसी को सम्मानित कर रहा है- विज्ञापन जनित पेड सम्मान पाने वालों में हैई ऐसे लोग है जो शासन के द्वारा के लिए बनाई सूची में शामिल है। जिस तरह हर तीस्से बहन पर किसी ना किसी प्रोफेशन का सिन्केत लय दिखता है, उसी तरह लगभग हर तीसरा व्यक्ति विज्ञापन जनित सम्मान सजए बैठ है। विज्ञापन जनित सम्मान से सम्मानित होने वाले खेलको अखबारों में आका प्रचार करने, प्रसारित करने का ऑफर दिया जा रहा है, जिस फिला के लोगों को विज्ञापन जनित सम्मान दिया जाता है, उ फिल्ड के दूसरे लोगों के कामसमों की खबरें भी प्रकाशित को जाती है। क्या विज्ञापन जनित सामान के प्रचार से जनता को धोखा देने की

की खबर देक मतलब कई प्रश्नों को खद्ध करना हो गया है

पवित्र होने का कुचित प्रयास विज्ञापन वनित सम्मान पाने वाला हर अफर भूमि कारोबारी और अन्य, गंगा में दुबकी लगाने की तरह, सम्मानित होने के विज्ञापन की गंगा में नहा कर अपने आपको पवित्र और पापरहित समक्ष रहे है?

कोई प्रमाणिकता नहीं विज्ञापन जनित ऐसे सम्मान देने की कोई प्रयागिकता और अधिकारिता है भी या नहीं, कौन जांचे ? क्या के जनता के साथ भोला करने और धामक

विज्ञापन में सफलता के शिखर पर, वास्तविकता में संघर्ष जारी

विज्ञापन जनित सम्मान में कई व्यों के संघर्ष की कहानी गढ़ जडा ही है, उनमें से ऐसे कई व्यक्ति का अब भी जारी है, किंतु यो सफल होने के लिए, सम्मान के विज्ञापन में जपने आपको सफल बता रहे है।

अब तो शंका की नजर से देखें जाने लगे

विज्ञापन जनित सम्मान से सम्मानित होने काले व्यक्ति अब एक दूसरे को ही शंका को नजर से देख रहे है, मन ही मन मुस्कुरा के है. सम्मानित करने की एक दुकान और खुलने हैो सकता है अब इस खबर के बाद दुकान तने के पहले मंगल जए कांकि वास्तविकता ये भी है कि ऐसे विज्ञापन जनित सम्मान से जो फायदे मिलाए जा रहे है के पदे हो नहीं रहे है। मौल में भी यह है कि मौत के कई लोम बंद हो यो है. पढ़ते रहे, आप सोते रहें, इम जगाने की कोशिश करते होंगे…..

सम्मानित होने के ऑफर विज्ञापन जनित सम्मान देने वाले, ऐसे सम्मान पाने के लिए, लोगों को फोन लगा कर और मिल कर सम्मानित होने के व्यवसायिक फायदे गिना रहे है ऑफर दिया जा रहा है. इतनी गति में घर कर फला सम्मान दिया जाएगा और प्रकाशित, प्रसारित भी किया जाएगा। अब तो इस तरह सम्मानित होने वाले भी एक दूसरे को देख कर कुटित मुस्कान के साथ मुस्कुरा रहे है और मन ही मन सोच रहे है, ये भी मेरे जैस

इतने सम्मानित हो चुके है कि, सम्मानित को भी, सम्मान की दृष्टि से नहीं देख रहे

है- इस सहा और प्रदेश में लगभग हर सक्षम अफसर, डॉक्टर, भू कारोबारी और एसे ही कई लोग सम्मानित हो चुके है, हर तीसरा ऐम्स आर्थिक सक्षम व्यक्ति सामान की मुस्कान और सम्मानित होने के विज्ञापन की तस्वीर लिए घूम रहा है, पर ऑफिस में सम्मानित होने के विज्ञापन सजा रखें ये हो गए है कि ऐसे सम्मानित व्यक्तियों को भी लोग सामान की दृष्टि से नहीं देख रहे

तक रूप से भी सम्मानित होने सदाती है, बस बोलतो नहीं है, क्या करें भी बाजार का हिस्सा हो गई है अन्यथा कोई तो आवाज उत्तक्या आवाजाने के समय जनअधिकतर लोग मूकदर और बुद्धिशन बन जाते है ?…

विज्ञापन जनित सम्मान की गंगा में

विज्ञापन देने की श्रेणी में नहीं आते है? धंधेबाजों से गजब धंधा अंधेबाजों से भी गजब धंधा किया जाता है, कि कई सम्मानित तो ऐसे हैं जिनपर भी चल रही है. जांच के कारण प्रमोशन नहीं हो रहे है. भू प्रोजेक्ट कई ऑफर देने के बाद भी बेचे, बिक नहीं रहे है। ऐसे सम्मानित कई अफसर अपी पोस्टिंग में बने रहने के लिए गुन लगा रहे है. विज्ञापन जनित सम्मान के विज्ञापन में जिन लोगों को सफलता का आसमान छू बताया जा या है, उनमें से कई के लोन पाए नहीं जा रहे है (लोन जमा नहीं हो रहे है, कई आरोप भी है। हवाही की जा तो है !!! सम्मानित होने के विज्ञापन में, कई लोग सफलाड के आसमान छू यो है, वो वास्तविकता में खुद कई परेशानियों का सामना कर रहे है, उनकी वास्तविकता देखना हो तो एक बार उनके प्रोजेक्ट के लिए संपर्क करके देख लो, जिनके सारे भूखं बिक चुके होते हैं, उनके ही, कई भूखंड सिमेल में बिकने आ जाते है 

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