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फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच इतनी टेंशन क्यों?

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 महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति सरकार में दरार के संकेत लगातार मिल रहे हैं। सीटों, विभागों और योजनाओं पर लगातार मतभेद और टकराव सामने आ रहे हैं। एकाथ शिंदे की नाराजगी खुलकर सामने आई है और सरकार में एक के बाद एक कई मुद्दों पर असहमति बनी हुई है।

गंगाधर ढोबले
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर उथलपुथल है। BJP, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार वाली एनसीपी की सत्तारूढ़ महायुति में दरार के स्पष्ट संकेत हैं। पिछले साल अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हुए थे। उसके बाद से मतभेद और टकराव के कई घटनाक्रम हुए।

महायुति में अब तक जो कुछ हुआ, उस पर एक नजर डालते हैं :

इस घटनाक्रम पर गौर करें तो शिंदे-BJP टकराव की परतें खुलती नजर आएंगी। शिंदे को यह महसूस होना स्वाभाविक है कि उन्हें घेरा जा रहा है और उनकी उपेक्षा व अनदेखी की जा रही है। शिंदे ने अपनी नाराजगी छिपा भी नहीं रखी है। एक-दो बार वह मंत्रिमंडल की बैठक में नहीं गए। BJP या अजित पवार की बैठकों का उन्होंने बहिष्कार किया। उसी विषय पर अपनी स्वतंत्र बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री सहायता निधि की तरह ही अपना स्वतंत्र सहायता फंड भी बना लिया है। ऐसा लगता है कि शिंदे को हाशिए पर लाने के लिए BJP और अजित पवार एक हो गए हैं।

2029 का चुनाव अकेले अपने दम पर जीतने की रणनीति का पहला टारगेट शिंदे ही लगते हैं। शिंदे को उनके गृह जिले ठाणे में घेरा जा रहा है। यह मोर्चा BJP के मंत्री गणेश नाईक संभाल रहे हैं। उन्होंने जिले में शत-प्रतिशत BJP का नारा दिया है। विदर्भ में भी शिंदे की BJP नाकाबंदी कर रही है। रामटेक से शिंदे सेना के मंत्री आशीष जायसवाल जीते हैं। उनके कट्टर विरोधी मल्लिकार्जुन रेड्डी को BJP ने अपना लिया है।

BJP से चुनौती

कोंकण इलाके में भी शिंदे का टकराव BJP से होगा। वहां उद्धव ठाकरे की शिवसेना के पैर उखड़ गए हैं। उद्धव की पार्टी के पास विनायक राउत, वैभव नाईक और भास्कर जाधव जैसे गिने-चुने नेता बचे हैं। इनका भी कोई भरोसा नहीं। वैसे भी ज्यादातर शिवसैनिक शिंदे के साथ दिखाई देते हैं। इसलिए शिंदे को कोंकण में उद्धव से नहीं, BJP से चुनौती मिलेगी। अन्य अंचलों में भी कमोबेश यही स्थिति है।

विकल्प नहीं

ये सारी बातें साफ कह रही हैं महायुति में सब ठीक नहीं है। यह दरार अवसर आते ही और चौड़ी होगी, लेकिन अभी वह समय नहीं आया है। सरकार को कोई खतरा नहीं है। शिंदे के पास भी अपनी नाराजगी जताने के अलावा अभी दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

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