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गुलअफ्शा, नसरीन और रुकैया को क्यों नहीं बचा सका ट्रिपल तलाक कानून

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मुजफ्फरनगर/शामली

केस- 1: गुलअफ्शा, शामली (यूपी)
‘हमारी शादी को 4 साल हो गए थे, पर ससुराल में कभी खुश नहीं रही। पति पीटता था, ननद ने एक बार जलाने की भी कोशिश की, पर देवर ने बचा लिया। पति को काम के लिए सऊदी अरब जाना था। मेरे अब्बू ने पैसे दिए। वह सऊदी चला गया, वहां से फोन किया और तीन बार तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर लिया। मैं हाथ जोड़कर योगीजी-मोदीजी से इंसाफ मांगती हूं।’

केस-2: नसरीन, मुजफ्फरनगर (यूपी)
‘मेरी शादी 4 साल रही, शौहर मुझसे ठीक से बात नहीं करते थे। 2 साल की बेटी है, इसलिए बर्दाश्त करती रही। एक दिन पति के भांजे ने मेरे साथ रेप किया। मेरा सब्र टूट गया। पति को ये बात बताई, तो उसने पीट-पीटकर मेरा हाथ तोड़ दिया। पहले घर से निकाला, फिर फोन पर तीन बार तलाक बोलकर जिंदगी से भी निकाल दिया।’
(नसरीन बदला हुआ नाम है, रेप केस होने की वजह से महिला का सही नाम नहीं दिया गया है)

केस-3: रुकैया, मुजफ्फरनगर (यूपी)
‘पिछले साल जून में मेरी शादी हुई थी, 4 महीने भी नहीं चली। शादी के 10वें दिन ही पति ने पीटना शुरू कर दिया। मैंने अब्बू को बताया कि मेरे साथ बहुत बुरा हो रहा है। अब्बू ने मायके बुला लिया। शौहर ने एक दिन फोन पर पैसे मांगे, मैंने मना किया तो उसने तीन बार तलाक.. तलाक.. तलाक कहकर फोन रख दिया, सब खत्म।’

गुलअफ्शा, नसरीन और रुकैया, नाम भले अलग हैं, लेकिन कहानी एक है। पति से अनबन हुई और उन्होंने तीन बार तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर लिया। ये सब तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने के बावजूद हुआ।

राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद 30 जुलाई, 2019 को PM मोदी ने कहा था, ‘इस बिल का पास होना महिला सशक्तिकरण की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। तुष्टिकरण के नाम पर देश की करोड़ों माताओं-बहनों को उनके अधिकार से वंचित रखने का पाप किया गया। मुझे इस बात का गर्व है कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक देने का गौरव हमारी सरकार को मिला है।’

इस भरोसे के बाद भी गुलअफ्शा, नसरीन और रुकैया की कहानियां बताती हैं कि कानून से उनकी जिदंगी में कुछ नहीं बदला। तीनों की कहानी उन्हीं से सुनने मैं दिल्ली से करीब 115 किमी दूर शामली और 130 किमी दूर मुजफ्फरनगर पहुंची।

तीन महीने पहले गुलअफ्शा का तलाक, पुलिस ने कहा- मर्जी से अलग हुए
सबसे पहले मैं गुलअफ्शा से मिली। उनका घर शामली के मोहल्ला पंसारियान में है। उम्र 23 साल। गोद में 3 साल की बेटी है, जो रोती हुई मां को देख रही है। परिवार उन्हें बार-बार समझाता है कि सब ठीक हो जाएगा, खुदा पर भरोसा रखो। गुलअफ्शा की शादी 16 अगस्त, 2019 को मुजफ्फनगर के मोहम्मद समून से हुई थी।

वे कहती हैं, ‘अब्बू रेहड़ी चलाते हैं। मुश्किल से शादी की थी। गांव का घर बेच दिया। शुरू में पति का बर्ताव अच्छा था। फिर मारपीट करने लगे, ननद बहुत मारती थी, मैं ये सोचकर घर नहीं बताती कि अब्बू परेशान होंगे। शादी के एक साल बाद बेटी पैदा हो गई। समून को बेटी होना पसंद नहीं आया। उसका व्यवहार और खराब हो गया। वो तलाक देने की बात करने लगा। मुझे पीटता और फोटो फेसबुक पर डालता था।’

‘एक बार उसने कहा कि उसे सऊदी अरब जाना है, 2 लाख रुपए चाहिए। मैंने अब्बू को बताया। उन्होंने कर्ज लेकर रुपए दिए।’

मैंने गुलअफ्शा से कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून है। ये तो अपराध है। वे कहती हैं कि ‘हमें नहीं पता था। किसी ने मेरे मामा को बताया, तब मालूम हुआ। हम पुलिस के पास गए थे। पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया, बातचीत से मामला सुलझाने की सलाह दी।’

गुलअफ्शा से मिलने के बाद मैं शामली महिला थाने पहुंचीं। यहां SHO निधि चौधरी ने बताया कि ‘हमने दोनों पक्षों को बात करने के लिए बुलाया था। गुलअफ्शा के पति ने तलाक की बात से इनकार किया है। दोनों ने आपसी समझ से एक-दूसरे से अलग होने का फैसला लिया है।’

मैंने एडिशनल एसपी ओमप्रकाश सिंह से भी बात की। वे कहते हैं कि ‘किसी पति-पत्नी के बीच मतभेद होता है, तो हम पहले बातचीत से सुलझाने की कोशिश करते हैं। मामला नहीं सुलझता, तो कानून के तहत कार्रवाई करते हैं।’

नसरीन ने तलाक के बाद केस दर्ज कराया, कार्रवाई कुछ नहीं
शामली से करीब 40 किमी दूर मुजफ्फरनगर में मुझे नसरीन मिलीं। उन्हें सारी बातें तारीखों के साथ याद हैं। दो साल की बेटी को सीने से लगाए नसरीन बताती हैं, ‘मेरी शादी 9 अगस्त 2019 को हुई थी। पति मैकेनिकल इंजीनियर हैं, नाम नजीब है। ससुराल में कभी इज्जत नहीं मिली। पति दहेज मांगता था, शराब पीकर खूब पीटता। नजीब की बहन 15-16 साल से साथ में रहती है। 16 नवंबर 2022 को उसके लड़के नसीम ने मेरे साथ रेप किया।’

‘मैंने घर में बताया, उन्होंने मुझे चुप कर दिया। एक महीने बाद 23 दिसंबर 2022 को मुझे तलाक दे दिया। मैंने थाने में शिकायत की। पुलिस ने तीन तलाक की शिकायत तो ले ली, लेकिन नसीम के खिलाफ रेप की जगह छेड़छाड़ में केस दर्ज किया। 2 जनवरी 2023 को FIR की थी, 4 महीने हो गए कोर्ट-कचहरी करते हुए, पर कुछ नहीं हुआ।’

नसरीन से मिलने के बाद मैं चरथावल पुलिस थाने गई। SHO राकेश शर्मा बताते हैं कि ‘हमने शिकायत के तुरंत बाद एक्शन ले लिया था। लड़के को हिरासत में भी लिया था, उस पर केस दर्ज किया, लेकिन कोर्ट के स्टे की वजह से उसे जेल नहीं भेजा।’

मैंने नसरीन के सही रिपोर्ट न लिखने के आरोप पर पूछा तो बोले, ‘जैसा उन्होंने लिखकर दिया, हमने उसी के हिसाब से कार्रवाई की। हम किसी की FIR को थोड़ी बदल सकते हैं। ये आरोप गलत हैं।’

रुकैया का पति दो दिन जेल में रहा, फिर जमानत मिली
22 साल की रुकैया मुजफ्फरनगर के दधेडू गांव में रहती हैं। उनका निकाह 17 जून 2022 को साजिद से हुआ था। दोनों की अरेंज मैरिज थी। चार महीने में ही साजिद ने रुकैया को तलाक दे दिया। रुकैया बताती हैं, ‘शादी के बाद से ही पति पीटने लगा था। परेशान होकर मैं मायके आ गई। कुछ दिन के बाद साजिद ने फोन किया और पैसे मांगे। मैंने मना किया फिर उसने फोन पर ही तीन बार तलाक कहकर फोन रख दिया।’

रुकैया ने पति के साथ चैट के कुछ स्क्रीनशॉट दिखाए। साजिद ने इसमें लिखा था कि निकाह निभाने वाली लड़कियां मेकअप नहीं मांगती। कपड़े नहीं देखतीं, वो जेवर नहीं मांगतीं।

रुकैया कहती हैं, ‘मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हारी शिकायत पुलिस में करूंगी, तो वो मेरे घर आया और गालियां देने लगा। बोला- तुझसे जो बनता है कर, यहां सबके सामने तुझे फिर तलाक देता हूं।’

रुकैया के माता-पिता भी पास में बैठे थे। रुकैया की अम्मी लगातार रोए जा रही थीं। मैंने रुकैया के पिता मोहम्मद इमरान से बात की, तो गुस्सा हो गए। कहने लगे, ‘ये सब वक्त की बर्बादी है, कई पत्रकार आए और चले गए, हम गरीबों की कोई नहीं सुनता। सरकार ने नाम का कानून बनाया है। इसका असर तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा। टीवी पर खूब हल्ला हुआ, मगर हमारी बेटियों के साथ तो वही हो रहा है, जो पहले से होता आ रहा हैं।’

कानून बनने के बाद भी गुलअफ्शा, नसरीन और रुकैया के साथ ऐसा क्यों हो रहा है, ये सवाल मैंने भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की फाउंडर जकिया सोमन से पूछा। तीन तलाक के खिलाफ और मुस्लिम महिलाओं को हाजी अली मजार में एंट्री का कानूनी हक दिलाने के लिए जकिया सोमन ने कानूनी लड़ाई लड़ी है।

जकिया कहती हैं, ‘कानूनी और कुरानी, दोनों रूप से तीन तलाक मान्य नहीं है। सरकार इसके खिलाफ कानून बना चुकी है, ये अब भी कई परिवारों को पता नहीं है। सरकार को चाहिए कि इस बारे में छोटे शहरों और गांवों में लोगों को बताए, ताकि ऐसे मामले कम हों।’

सुप्रीम कोर्ट की वकील फरहा फैज ने भी तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। वे कहती हैं, ‘तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने के बाद शुरुआत में इसका असर दिखा, फतवे आने बंद हो गए, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता मौलाना फिर मनमर्जी करने लगे।’

कुरान या हदीस में कहीं नहीं लिखा ट्रिपल तलाक
इस्लाम के जानकारों के मुताबिक, प्री-इस्लामिक अरब में लोग पत्नी से गुलामों जैसा बर्ताव करते थे। कई तरह के तलाक होते थे। तब पैगंबर हजरत मोहम्मद सब खत्म कराकर तलाक-ए-अहसन लाए। बाद में दूसरे खलीफा हजरत उमर के जमाने में उनके पास कुछ महिलाएं आईं और कहा कि हमारे पति कई-कई दफा तलाक कहते हैं, लेकिन फिर रिश्ता बना लेते हैं।

ऐसे में हजरत उमर ने कहा- यदि तीन तलाक कहते हैं, तो इसे तलाक माना जाएगा। स्थिति को देखते हुए इसे फौरी राहत माना गया था। वो खुद इसे स्थायी नहीं चाहते थे। तीन बार तलाक कहना तो कुरान में है ही नहीं।

तीन तलाक कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, नवंबर में सुनवाई
ट्रिपल तलाक कानून को अलग-अलग संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन याचिकाओं पर नवंबर, 2023 में सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने 22 अगस्त, 2017 को ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया था।

तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली महिलाएं खाली हाथ
तीन तलाक के खिलाफ उत्तराखंड की शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वे कहती हैं, ‘मेरे पति रिजवान अहमद ने कोर्ट के फैसले के बाद शादी बहाल करने के लिए कॉन्टैक्ट नहीं किया। कानूनी तौर पर, मैं अब भी उनकी पत्नी हूं। हालांकि मेरे पति ने दूसरी शादी कर ली है।’

पिटीशनर्स में शामिल इशरत जहां की शादी पति मुर्तजा अंसारी के फोन पर तीन तलाक कहने के बाद खत्म हो गई थी। वे कहती हैं, ‘सभी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, लेकिन मुझे क्या हासिल हुआ? कुछ नहीं। कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला। मेरे पति ने दूसरी शादी की और फिर मुझे वापस लेने की पेशकश की। उसने मुझे कानूनी रूप से तलाकनामा नहीं भेजा है, न ही मैंने खुला के जरिए तलाक लिया है।’ (शायरा बानो और इशरत जहां ने ये बातें अगस्त 2022 में द हिंदू से बातचीत में कही थीं)

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