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समूचे यरुशलम और गाजा पट्टी क्षेत्र में क्यों बने युद्ध जैसे हालात

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केसी त्यागी

समूचे यरुशलम और गाजा पट्टी क्षेत्र में हालात काफी गंभीर हो गए हैं। पिछले दिनों एक यहूदी आराधना स्थल पर गोलाबारी हुई, जिसमें 1 दर्जन से अधिक यहूदी मारे गए। आरोप है कि यह हमला गाजा पट्टी के फिलिस्तीनी चरमपंथी गुट हमास के समर्थकों ने किया। इससे पहले इस्राइली सैनिकों ने जेनिन शरणार्थी शिविर में घुसकर वहां कई फिलिस्तीनियों को मार दिया था। यहूदियों पर हुआ हमला उसी का जवाब माना जा रहा है।

इस हमले पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमने अपने जीवन में जो भीषण हमले देखे हैं, उनमें यह एक है। घटना को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन का इस्राइल दौरा तय हो चुका है। इसी बीच इस्राइल ने नए तरीके से विवादास्पद वेस्ट बैंक के कब्जे वाले क्षेत्र में पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि यहां ऐसा कुछ करने पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की रोक है। जाहिर है, दोनों पक्ष फिर से आमने-सामने हैं, जिसकी कुछ ठोस वजहें हैं।

अभी के संकट के चलते संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिलिस्तीनी, इस्लामी और कुछ तटस्थ मुल्कों के अनुरोध पर एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई। संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के राजदूत ने पिछले दिनों अरब देशों के राजदूतों और 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन तथा 120 सदस्यीय गुट निरपेक्ष आंदोलन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस्राइली रक्षामंत्री बेन-ग्विर की यात्रा और नई सरकार के इर्द-गिर्द व्यापक अतिवाद के वातावरण को वर्तमान तनाव का कारण बताया है। जॉर्डन, इजिप्ट, लेबनान, सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, ईरान, तुर्की आदि राष्ट्रों के प्रमुखों ने भी इस यात्रा को अपवित्र करना और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से जब इस्राइली कब्जे को लेकर राय मांगी तो कोर्ट ने भी फिलिस्तीन के पक्ष में फैसला सुनाया। अब सभी हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र इस आदेश को लागू करने की मांग कर रहे हैं तो इस्राइल ने इसे सिरे से नकार दिया है।

(लेखक जेडीयू के पूर्व सांसद हैं)

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