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नीलगाय का नाम नीलगाय क्यों पड़ा?

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नीलगाय का नाम नीलगाय क्यों पड़ा? सागर के नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर का दावा है कि नीलगाय का संरक्षण मुगलों ने किया था. क्योंकि, इनका खूब शिकार हो रहा था. ये भी बताया कि मुगलों की तरह ही नीलगाय का भी अपना हरम होता है., जो कर्मचारियों ने बनाया है. जानें रोचक तथ्य..

नीलगाय तो आपने जरूर देखी होगी. इसे किसानों का सबसे बड़ा दुश्मन कहा जाता है. लेकिन, इनके नाम में बड़ा कन्फ्यूजन है. मृग यानी हिरन प्रजाति में आने वाली इस नीलगाय में ना तो नीला रंग होता है और ना ही गाय की जैसी कोई खूबी, तो फिर इसे नीलगाय क्यों कहते हैं? दरअसल, घोड़े जैसे दिखने वाली नीलगाय को रोजड़ा नाम से भी जाना जाता है. मुगल काल में जब इनका शिकार अधिक होने लगा, तब मुगल राजाओं ने इसका नाम बदलकर नीलगाय कर दिया था, ताकि गाय जोड़ने की वजह से लोग शिकार करना बंद कर दें.

इसके अलावा इनकी और एक बड़ी खूबी है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता होगा और शायद ही किसी ने देखा होगा. दरअसल, मादा नीलगायों का एक झुंड होता है, जिसमें एक नर नीलगाय होता है. झुंड की मादाओं पर सिर्फ उसी नर नीलगाय का अधिकार होता है, जो ज्यादा ताकतवर हो. इसके लिए नर नीलगाय को अपनी मजबूती सिद्ध करनी होती है. नीलगाय की तरह ही मुगलों ने भी हरम का पैटर्न अपनाया था, जिसमें शक्तिशाली राजा कई रानियां रखता था, इसलिए मुगलों ने इनका संरक्षण किया. रोजड़ा का नाम नीलगाय कर दिया.

जंगल से दुर्लभ वीडियो आया सामने
मध्य प्रदेश में सागर के नौरादेही टाइगर रिजर्व से दो नर नीलगायों की लड़ाई का वीडियो सामने आया है, जो बेहद दुर्लभ है. क्योंकि, अमूमन नर नीलगायों की लड़ाई नहीं दिखती. दूसरा इस लड़ाई में नर नीलगाय अपना रंग बदल रहे हैं. वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह बताते हैं, जंगल में वनरक्षक, वनश्रमिक 24 घंटे होते हैं, जिनको जंगल के अंदर के दृश्य देखने को मिलते हैं. कुछ ऐसे दृश्य होते हैं जो दुर्लभ होते हैं. वो ना तो अधिकारियों और ना ही पर्यटकों को देखने में मिलते हैं. इस वजह से हमने कर्मचारियों की मोबाइल से ही फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी की ट्रेनिंग करवाई है, ताकि नेचर के इस तरह के इवेंट हम भी जान सकें. हमारे ही कर्मचारियों ने यह एक वीडियो बनाया है. इसमें दो मेल नीलगाय लड़ रहे हैं. ये मादाओं पर अधिकार के लिए लड़ रहे हैं. इनकी व्यवस्था हरम जैसी होती है. हर मादा के समूह से एक नर जुड़ा होता है, झुंड की हर फीमेल से मेटिंग राइट्स रखता है. मादाओं के झुंड में एंट्री के लिए मेल एक दूसरे को चैलेंज करते हैं, जो जीतता झुंड उसका.

रंग बदलकर देते संकेत
डिप्टी डायरेक्टर ने आगे बताया, जंगल के अंदर से आए इस वीडियो में देख सकते हैं कि दो नीलगायों की लड़ाई में जो दो नर बहुत काले रंग का दिख रहे हैं, वे मेटिंग के लिए बिल्कुल रेडी हैं. फेनोमेन लेवल जब बहुत हाई होता है, तब उनका यह कलर होता है. यह दोनों साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा बलशाली कौन है, जो ज्यादा बलशाली होगा, वही मैक्सिमम फीमेल से मेटिंग करेगा, ताकि भविष्य की जो संतान हों वह भी पिता जैसी मजबूत हों.

फीमेल से संबंध बनाने के पहले बदल जाता रंग
नीलगाय में जो मादा होती है, वह थोड़े से भूरे कलर या कैमल कलर की होती है. जो नर होता है, उसकी शुरुआत में तो अंतर कलर से कर ही नहीं सकते. लेकिन, जैसे-जैसे वह मेच्योर होते जाते हैं, भूरे से इनका कलर काला होने लगता है. उसमें भी जब मेटिंग पीरियड आता है, तब चटकीला काला हो जाता है. मेटिंग के बाद हल्का काला हो जाता है तो यह चेंज आता है.

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