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दो दिन बाद तुम्हारी लड़की को वापस कर देंगे ! ‘

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निर्मल कुमार शर्मा

इस देश के स्वतंत्र होने के 74 साल बाद बिहार के बैशाली जिले के जंदाहा प्रखंड के तीसीओता थाने के अंतर्गत आनेवाले किसी छोटे से गाँव से एक दलित खेतिहर मजदूर की लड़की का उसके पूरे कुनबे के सामने ही गाँव के ही कुछ ठाकुर और चौधरियों के 6-7 गुँडे जबरन अपहरणकर उठा ले जाते हैं,घरवाले जब उनका विरोध करते हैं,तो वे अपनी पिस्तौलों को लहराते हुए उनकी मां-बहन की जातिवादी गाली देते हुए व उन्हें भी गोली मारने तक की धमकी देते हुए उनकी लड़की को जबरन अपने घर को लेकर चले जाते हैं ! जब उस अभागी लड़की के परिजन उन दरिंदे ठाकुरों के घर जाकर अपनी लड़की को वापस करने की फरियाद करते हैं तब वे उनको यह कहते हुए भगा देते है कि ‘दो दिन बाद तुम्हारी लड़की को वापस कर देंगे ! ‘
इस हृदयविदारक घटना के दो दिन बाद भी दरिंदों द्वारा उस लड़की को परिजनों को नहीं लौटाया जाता है,अपितु 6 दिन बाद उसकी अधनंगी लाश एक स्थानीय नहर में तैरती हुई बरामद होती है ! परिजनों के अनुसार उनकी लड़की से दरिंदों ने पहले बलात्कार किया है,फिर साक्ष्य मिटाने के लिए उसकी गर्दन दबाकर उसकी नृशंसता से हत्या करके उसके मृत शरीर को नहर में फेंक दिया ! तो ये है आधुनिक भारत की यह घिनौनी तस्वीर ! मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इतना कुछ होने के बावजूद भी वहाँ की स्थानीय पुलिस उस अभागन लड़की से बलात्कार हुआ यह अभी भी मानने को तैयार नहीं है ! इस दरिंदगी भरी घटना को अंजाम देने के बाद वे गुँडे,दरिंदे और बलात्कारी फरार हो गये हैं,इस लेख को लिखे जाने तक पुलिस अभी तक उन्हें गिरफ्तार करने में असफल रही है !
सन् 2020 के भारत सरकार के आँकड़ों के अनुसार इस देश में प्रतिदिन 77 बलात्कार के मामले होते हैं यानी लगभग प्रति 20 मिनट में यहाँ प्रायः किसी गरीब दलित मजदूर या खेतिहर मजदूर की बेटी के साथ गाँव या कस्बे के दबंग गुँडे बलात्कार कर रहे होते हैं ! भारत में यह कटुसच्चाई,वास्तविकता और सामान्य सी बात है कि अक्सर बलात्कार के मामले में स्थानीय पुलिस ,प्रशासन और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट भी दबंग बलात्कारी दरिंदों को बचाने की भरपूर कोशिश करते हैं !भारत में बलात्कार के मामले में मुझे इस बात को कहने में जरा भी संकोच और झिझक नहीं है कि भारतीय जातिवादी कुव्यवस्था इसके लिए सबसे जिम्मेदार तत्व है ! तथाकथित उच्च जातियों की यह घोषित और सामान्य मान्यता है कि ‘नीची जाति की औरतें और उनकी लड़कियाँ इसी काम के लिए होतीं हैं ! ‘ और दूसरी बात ग्राम प्रधान,स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन,न्यायालय आदि सभी जगहों पर इन कथित उच्च जातियों का ही वर्चस्व है,वे सभी मिलजुलकर ऐसे मामलों को दबंग बलात्कारियों और गुँडों को प्रायः बचा ही लेते हैं !

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद,

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