मुनेश त्यागी
आंधियों ने तय किया है
कोई दीपक नही जलेगा,
दीपकों ने तय पाया है
आंधियों को देख लेंगे।
जुल्मतों ने शोर मचाया
रोशनियों को रोक लेंगे,
रोशनियों ने तय किया है
जुल्मतों को देख लेंगे।
हाकिम तो अब दास बने हैं
पूंजी और बेईमानी के,
लोग भी अब कह रहे हैं
हाकिमों को देख लेंगे।
दुश्मन फिर से डरा रहे हैं
आशिकों की जात को,
आशिक भी तो कह रहे हैं
दुश्मनों को देख लेंगे।
जालिम भी अब दिखा रहे हैं
दारो- रसन- ओ- सूलियां,
लोग भी अब कह रहे हैं
फांसियों को देख लेंगे।

