अग्नि आलोक

क्या चार्जशीट से बढ़ेगी ट्रंप की ताकत

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आनंद प्रधान

डोनाल्‍ड ट्रंप अमेरिकी इतिहास में पहले ऐसे पूर्व राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ कोर्ट ने आपराधिक मामले में अभियोग तय किया है। हालांकि, ट्रंप के लिए कोर्ट-कचहरी और कानूनी विवाद नए नहीं हैं, लेकिन यह मामला ऐसे समय में आया है, जब वह 2024 में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनावों के लिए अपनी उम्मीदवारी का एलान और चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं।

क्या हैं आरोप

ऐसे में, पूरे अमेरिका की निगाहें आज न्यू यॉर्क के मैनहटन कोर्ट और उससे बाहर राजनीतिक मैदान में होने वाले ड्रामे की ओर होंगी, जहां ट्रंप एक अभियुक्त की तरह पेश होंगे। उनका फिंगरप्रिंट और किसी सामान्य अभियुक्त की तरह मग-शॉट तस्वीर ली जाएगी और कोर्ट में अभियोग पेश किया जाएगा। इसके बाद ही ठीक-ठीक पता चलेगा कि ट्रंप के खिलाफ किन आधारों पर आपराधिक मुकदमा चलेगा।

डॉनल्ड ट्रंप

क्या होगा असर

कहने की जरूरत नहीं कि किसी और नेता के लिए ये आरोप बड़ी शर्मिंदगी की वजह होते और उसका राजनीतिक करियर भी खतरे में पड़ जाता, लेकिन ट्रंप का कारोबारी और अब राजनीतिक जीवन ऐसे आरोपों और विवादों के बीच ही फलता-फूलता और परवान चढ़ता रहा है।

दो ध्रुवों में बंटा समाज

इस जहरीले प्रचार अभियान का नतीजा यह हुआ है कि आज अमेरिकी समाज न सिर्फ आधे-आधे में बंट गया है बल्कि जबरदस्त रूप से ध्रुवीकृत है। उसमें नस्लीय और सांस्कृतिक विभेद लगातार गहरे हुए हैं। आपसी अविश्वास और डर बढ़ा है। धुर दक्षिणपंथी श्वेत श्रेष्ठतावादी समूहों की उग्रता बढ़ी है। सैन्य मिलिशिया से लेकर क्यू अनॉन जैसे कॉन्स्पिरेसी थियरी के प्रचारकों ने राजनीतिक विमर्श को जहरीला बना दिया है। इनकी एक थियरी है ‘ग्रेट रिप्लेसमेंट थियरी’ यानी अमेरिकी आबादी में श्वेतों की जनसंख्या घटती हुई जल्दी ही अल्पसंख्यक हो जाएगी। जाहिर है, इस माहौल में उलटे-सीधे, भड़काऊ और जहरीले आरोप-प्रत्यारोपों के आगे तथ्य, तर्क और विवेक के लिए बहुत कम जगह रह गई है।

ट्रंप को इस विभाजन और राजनीतिक ध्रुवीकरण का फायदा मिल रहा है। वह अपने धुर दक्षिणपंथी श्वेत समर्थकों को यह समझाने में कामयाब हैं कि सत्ता प्रतिष्ठान उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत फर्जी मामलों में फंसा रहा है। उन्होंने यह नैरेटिव पिछले राष्ट्रपति चुनावों में हार के बाद से बना रखा है। इसमें कोई शक नहीं कि वह न्यू यॉर्क की मैनहटन कोर्ट में पेशी और अभियोग लगाए जाने को भी डेमोक्रेट्स और ‘भ्रष्ट’ सत्ता प्रतिष्ठान के ‘षडयंत्र’ के रूप में पेश करके राजनीतिक सहानुभूति बटोरने, अपने कट्टर समर्थकों को सक्रिय करने और इस तरह रिपब्लिकन पार्टी में अपने विरोधियों को मात देने की कोशिश करेंगे।

लोकप्रियता बढ़ी

ताजा ओपिनियन पोल्स के रुझानों मुताबिक, ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी में अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों से काफी आगे हो गए हैं। ट्रंप समर्थकों के मुताबिक, मैनहटन कोर्ट की ग्रैंड जूरी के फैसले के बाद 6 गवर्नर, 26 सीनेटर, 63 कांग्रेस सदस्य और स्पीकर केविन मैकार्थी ट्रंप के साथ खड़े हैं। दूसरी ओर, ट्रंप के चुनाव फंड में 24 घंटों से भी कम समय में 40 लाख डॉलर से ज्यादा का डोनेशन आ चुका है। साफ है कि ट्रंप कानूनी दावपेंच के खतरों को जानते हुए भी इसे अपनी राजनीतिक वापसी के एक मौके की तरह देख रहे हैं।

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