सुसंस्कृति परिहार
इन दिनों म०प्र०के मुख्यमंत्री की हालत पतली नज़र आ रही है इसकी वजह राजनैतिक हल्कों में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, बताई जा रही हैं ।ऐसा ज्ञात हुआ है प्रदेश में उमा जी दिलचस्पी बढ़ रही है ।उसकी वजह लोधी वोट बैंक का कांग्रेस की ओर बढ़ता रुझान है ।इस बात से नागपुर कार्यालय परेशान है ।यह सिलसिला तब से शुरू हुआ जब हिंडोरिया राज घराने के दो युवा प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह लोधी और राहुल सिंह लोधी बड़ा मलहरा और दमोह विधानसभा से कांग्रेस टिकट पर विजयी हुए। राहुल ने तो भाजपा के वरिष्ठ नेता वित्त मंत्री जयंत मलैया को पटकनी देकर 35वर्ष बाद कांग्रेस को विजय श्री दिलाई थी।
यह बात संघ के साथ उमा भारती को भी नागवार गुजरी थी और वे प्रद्युम्न को पटरी पर ,ना केवल वापिस भाजपा में लाईं बल्कि नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनवा के मंत्री का दर्जा दिलवाने में सक्रिय रहीं । मलहरा उपचुनाव में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही। विदित हो ,प्रद्युम्न पहले भाजपा में रहकर मंडी वा जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। कुछ समय बाद शिवराज सिंह की बदौलत राहुल भी भाजपा के हो गए उन्हें भी राहुल आजकल वेयर हाउस कारपोरेशन एवं लाजिस्टिक के प्रदेशाध्यक्ष के नाते मंत्री का दर्जा देकर कृतार्थ किया गया ताकि दमोह के होने वाले एकमात्र चुनाव में लोधी वोट बिखरें नहीं। आश्चर्यजनक बात तो ये है कि एक घर के दो भाई मंत्री बने हैं जबकि जिस हिंडोरिया क्षेत्र से वे आते हैं वह हटा विधानसभा में है।
इस बीच उमा भारती के बारे में इस तरह की ख़बरें आना किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं क्योंकि उमा जी लोधी समाज का एक प्रभावी चेहरा हैं और आध्यात्मिक रुझान के कारण महिलाओं में ख़ासी लोकप्रिय हैं।यदि यह ख़बर सच है तो इसमें दम भी है क्योंकि यदि उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाता है तो ना केवल म०प्र०बल्कि उ०प्र०के बड़े लोधी बैंक को अगले चुनाव में साधा जा सकता है। यह भी ज़ाहिर है मोदी और शाह की जोड़ी उमा जी को नापसंद करती है वे कई बार इस तरह की बात कर चुकी हैं ।उनकी दबंगता, राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका और राममंदिर निर्माण के लिए लगातार सक्रियता संघ को पसंद है।उनका यह नारा ‘राम लला घर आएंगे-मंदिर वहीं बनाएंगे’ लगातार गूंजता रहा। यह भी महत्वपूर्ण है कि जब उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं थी तब उनके साथ बड़ा धोखा हुआ जिसे वे भूली नहीं हैं।कर्नाटक के हुबली ईदगाह में तिरंगा फहराने पर 2003 में तीन चौथाई बहुमत से जीती मुख्यमंत्री उमा भारती को 8माहक्षबाद त्यागपत्र देना पड़ा था। उन्होंने अपने विश्वासी बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बना दिया था लेकिन 29नवम्बर 2005 को शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनने पर जो बयान दिया था उसके कारण उन्हें भाजपा से निलंबन झेलना पड़ा।जून 11में उनका छै साल का निलंबन समाप्त हुआ ।इस बीच उमा जी ने जनशक्ति पार्टी भी बनाई।वह असफल रही।संघ ने उन्हें भाजपा में वापस ले लिया।अटल सरकार में वे मानवसंसाधन,पर्यटन,युवाआदि की मंत्री रहीं।1914में मोदी सरकार में जल संसाधन,नदी विकास गंगा सफाई मंत्री रहीं। राजनीति के क्षेत्र में 25वर्ष की वय में ही पहली बार 1984 में खजुराहो लोकसभा सीट से विजयी हुईं थी । तेजतर्रार,इस युवा सांसद ने सदन में अपनी मज़बूत पहचान बनाई ।दबंग एवं निर्भीक इतनी कि आडवाणी जी से भिड़ लीं और निलंबन झेलीं। शायद 2003का इतिहास फिर दोहराया जाने वाला है अब उमा भारती की तरह हो सकता है शिवराज सिंह हटा दिए जाएं और उमा भारती मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो जाएं क्योंकि केंद्र सरकार की उपेक्षा करते हुए भाजपा का हाईकमान नागपुर से सीधे आदेश जारी भी कर सकता है ।
यदि ऐसा होता है, तो दमोह विधानसभा से उन्हें भाजपा प्रत्याशी भी घोषित किया जा सकता है इन दिनों भोपाल में राजनैतिक सरगर्मी बढ़ी है ।दमोह के संभावित उम्मीदवार राहुल लोधी के साथ समाज के जागरूक लोग भोपाल में हैं ।पहले 17,फिर22और अब 27को शिवराज सिंह चौहान के दमोह के आगमन के समाचार है। कुल मिलाकर विधानसभा सभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है ।अभी तक कांग्रेस दमोह विधानसभा अपनी झोली में मानकर चल रही है यदि उमा जी प्रत्याशी बनती हैं तो उन्हें परास्त करना बेहद कठिन होगा।

