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नकल के लिए अक्ल भी जरूरी है

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शशिकांत गुप्ते

फैशन की अंधी दौड़ में बहुत से उम्र दराज़ लोग बांसी कढ़ी में उबाल वाली कहावत को चरितार्थ करतें हैं और बालों में खिजाब लगातें हैं। खिजाब का मतलब बालों को काले करने की दवा,केशकल्प।
आधुनिक भाषा में इसे हेयर कलर (Hair color) कहतें हैं।
मानव अपने शारीरिक रूप को प्रभावशाली बनाने के श्रृंगार करता है। श्रृंगार को सरलता से समझने वाली भाषा मेकअप कहते हैं।
शारीरिक श्रृंगार आधुनिकता का बाह्य स्वरूप मतलब आवरण मात्र हो सकता है। साधरण तया लोग इसी आवरण को भ्रम से प्रगतिशीलता समझ लेतें हैं।
प्रगतिशीलता का शारीरिक श्रृंगार से कोई सम्बंध ही नहीं है। परिपक्वता मानसिक विकास को परिलक्षित करती है।
मानव का असली श्रृंगार होता है,
नम्रता,सरलता,सहजत
आदर्शरूपी चरित्र और आत्मविश्वास।

उक्त गुणों के लिए किसी सौदर्यप्रसाधन की आवश्यकता नहीं होती है।
जो लोग नाटक और फिल्मों में अभिनय करतें हैं, उन्हें जो किरदार निभाना पड़ता है,उस किरदार के अनुरूप उन्हें मेकअप करना पड़ता है। यह मेकअप सिर्फ अभिनय तक सीमित होता है।
अंधानुकरण के दौड़ में आमजन इन अभिनय करने वालो की नकल करतें हैं।
मानव को अपने व्यक्तिव को प्रभावशाली बनाने के लिए यह सूक्ति याद रखनी चाहिए।
Simple living and high thinking. मतलब सादा जीवन उच्च विचार। अंधानुकरण की दौड़ ने इस सूक्ति को बदल दिया। High living and no thinking. मतलब उच्च जीवन और विचार शून्यता। यहाँ उच्च जीवन से तात्पर्य है कीमती बाह्य आवरण ओढ़ना और विचार से शून्य रहना।
आज हरक्षेत्र में जो समस्याएं व्याप्त है। वे विचारविहीन ही है।
विचारहीनता के कारण आज की युवापीढ़ी फ़िल्मी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की नकल करने लगी है।
प्रायः अभिनेता को हीरो Hero कहा जाता है। असल हीरो शूरवीर, बहादुर,सुरमा को कहा जाता है।
Actress मतलब अभिनेत्री होता है। प्रत्येक फ़िल्म में अभिनेत्री को विभिन्न प्रकार के किरदार निभाने पड़ते हैं। विभिन्न किरदार के अनुरूप परिधान धारण करना पडतें हैं।
स्त्रियां,अभिनेत्री के द्वारा किए गए श्रृंगार और परिधान की नकल करती है।
हीरो,हीरोइन की नकल करना तो मानव का स्वाभविक गुण होता है।
चिंता का विषय तो यह है कि, अत्याधुनिकता की दौड़ में देश की युवा पीढ़ी Heroin हेरोइन की आदि हो गई है। युवापीढ़ी Heroin मतलब मादक पदार्थ का नशा करने लगी है।
इसीलिए वैचारिक परिपक्वता होना अनिवार्य हो गया है। परिवक्वता आएगी तो व्यवहारिक ज्ञान में वृद्धि होगी। व्यवहारिक ज्ञान आने से समझ बढ़ेगी,और अंधानुकरण से बचकर हुए युवापीढ़ी में आत्मबल जागृत होगा और संस्कारवान बनेगी।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

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