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औरत महान होती है : मग़र कब तक!?

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✍️नीलम ज्योति

पौराणिक प्राचीन समय से हम पढ़ते आ रहें हैं…
नारी… स्त्री ..औरत… महान होती है।
पर वो महान कब तक होती है?
एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक वो मर्द की
मार सहती है,
पर जब बदले में वो
आक्रमणकारी हो जाये,
तब वो हिसंक
असंस्कारी कहलाती हैं।

एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक चुप चाप वो
मर्द की गालियां सुनती है,
पर जब वो उन गालियों का‌ ज
वाब दे दे,
तब वो बत्तामीज कहलाती हैं।

एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक वो आसूं के
साथ मर्द का
अत्याचारजुल्म सहती है,
पर जब वो उन अत्याचार
के खिलाफ आवाज उठाये तो,
तब वो बागी कहलाती है।

एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक वो चार दिवारी में
जकड़ी रहतीं हैं,
पर जब वो पांव देहलीज से
बाहर निकाल दे,
तब वो आवारा कहलाती है।

एक औरत महान होती है तब तक
जब तक वो पर्दे में रहती हैं,
पर जब वो पर्दा हठा दे
तब वो बेशर्म कहलाती हैं।

एक औरत महान होती है तब तक
जब तक वो त्याग करती है,
पर जब वो अपना अधिकार मांग ले
तब वो लालची कहलाती है।

एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक वो मर्द के कारण रोती है,
पर जिस दिन मर्द
उसके कारण रो दे
तब वो निर्दय कठोर हैं।

एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक वो पति, घर परिवार,
बच्चे, समाज के लिए जीती है
पर जब वो अपने लिए जीना शुरू दे,
तब वो स्वार्थी कहलाती हैं।

एक औरत महान होती है
तब तक
जब तक वो दुःखो से मौन होती हैं
पर जब वो दुःखो को
किनारे रखकर किसी से
हंसी टिटौली कर ले,
तब वो बदचलन कहलाती हैं।

एक औरत महान होती है तब तक
जब तक वो अपने मन और
भावनाओं को दबा ले
पर जब उसके मन में किसी
पुरुष के लिए प्रेम पनप‌ जाये,
तब वो चरित्रहीन कहलाती हैं।

एक औरत महान होती है,
त्याग, समर्पण, सहनशीलता,‌
ममता इत्यादि अपने
“मूल गुणों” के कारण
पर जब वो अपने इन मूल
गुणों का (नारित्व) त्याग करतीं हैं
तब वो पुरूषों की श्रेणी में आ जाती है।
स्त्री का अपने स्त्रीत्व (नारित्व)
को त्याग कर का पुरूषों की
श्रेणी में आना ही,
स्त्री का
पुरूषों द्वारा धिक्कार
दिये जाना है…!!

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