मुंबई। नवरात्रि के अवसर पर अभिनेत्री और समाजसेवी ईशा ने महिलाओं से अपील की कि वे एक-दूसरे की प्रतियोगी नहीं, बल्कि साथी बनें। अभिनेत्री ईशा ने कहा, सहयोग करो, साज़िश नहीं। हमें इस तरह ढाला गया है कि हम एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें, जबकि हमें एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए।
आज की दिखावे और बाहरी मान्यता की दुनिया में ईशा का संदेश साफ है दूसरों की मंज़ूरी का इंतजार मत करो, बल्कि पूरे गर्व से खुद का जश्न मनाओ। उन्होंने कहा कि विरासत में मिली मानसिकता को चुनौती देना ही असली बदलाव की शुरुआत है। इस चक्र को तोड़ो, चाहे वह सामाजिक हो या पीढ़ियों से चला आ रहा हो। सिर्फ इसलिए कि चीज़ें हमेशा से ऐसे ही होती आई हैं, इसका मतलब ये नहीं कि आगे भी वैसे ही हों, उन्होंने जोड़ा।
ईशा का संदेश यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने साहसिक कदम उठाने का आह्वान करते हुए कहा, दबाव को अपने आत्मविश्वास या अपने विश्वासों को डगमगाने मत दो। अगर आप अपनी या किसी और महिला की सुरक्षा के लिए आवाज़ नहीं उठाएँगी, तो कौन उठाएगा? उनकी आवाज़ और भी सख़्त हो गई जब उन्होंने महिलाओं की आज़ादी की बात की। महिलाओं को आज़ादी उपहार में नहीं मिली है। हमें इसके लिए लड़ना पड़ा है, और हम अब भी लड़ रहे हैं, ईशा ने दृढ़ स्वर में कहा।
उन्होंने आगे जोड़ा कि जागरूकता ही असली शक्ति है और जितनी ज़्यादा जागरूकता फैलाई जाएगी, उतना ही मुश्किल होगा महिलाओं की आवाज़ को दबाना। नवरात्रि जैसे पर्व पर उनका संदेश और भी गहराई से असर करता है। अंत में ईशा ने कहा, देवी सिर्फ पूजने के लिए नहीं होती हैं। उन्हें जीने के लिए होती हैं।

