डॉ. प्रिया
गलत व्यक्ति से साझेदारी और बिगड़ी हुई जीवन शैली के कारण रोग आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। ऐसे में गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी जैसी समस्या के साथ ही पेशाब की नली में जलन और ब्लैडर इन्फेक्शन का खतरा भी बना रहता है। इसे आमतौर पर हम यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) कहते हैं।
हालांकि, ये एक ऐसी समस्या है जिसे हम सही हाइजीन में बनाए रखते हुए डाइट में उचित भोजन पदार्थों को शामिल करके होने से रोक सकते हैं। इसके लिए डॉक्टरी इलाज के साथ ही घरेलू इलाज भी उपलब्ध हैं।
अमूमन पुरुषों की तुलना में यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। कई बार हाइजीन के प्रति लापरवाही बरतने के कारण पुरूषों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों में परेशानी कम होती है। बीमारी चाहे कोई भी हो समय से पता चलने पर इसका इलाज संभव है। इसके लिए एक तय समय के अंतराल पर शरीर की पूरी जांच करवानी चाहिए। जिससे जो भी बीमारी पनप रही है उसे वहीं रोका जा सके।
यदि यूटीआई को समय से ट्रीट न किया जाए तो यह किडनी और ब्लैडर में इन्फेक्शन (bladder infection) का कारण बन सकती है। वहीं ये धीरे-धीरे शरीर के लिए घातक होता जाता है.
यदि एक हजार महिलाओं और पुरूषों की बात करें तो 600 महिलाएं और 400 पुरूष यूटीआई की समस्या का शिकार हुए हैं।
यूटीआई की समस्या किडनी से जुडी परेशानी के कारण होती है, साथ ही यदि यह लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है। वहीं कुछ केस में तो परेशानी इतनी बढ़ जाती है की किडनी डैमेज होने का खतरा हो सकता है।
इसके साथ ही गॉलब्लेडर में परेशानी आ सकती है। वे सलाह देते हुए कहते हैं की “यूटीआई से बचाव के लिए एक उचित समय अंतराल पर जांच करवाते रहना बहुत जरुरी है। ऐसा करने से भविष्य में गंभीर बिमारियों के खतरे को बढ़ने से रोका जा सकता है।
कारण और लक्षण और प्रभाव :
यूटीआई होने के कई कारण होते हैं जैसे की इंटिमेट हाइजीन को नजरअंदाज करना और अधिक मात्रा में फ़ास्ट और जंक फूड्स का सेवन करना। वे कहते हैं की “यूटीआई (Urinary tract infection) का मुख्य कारण ई-कोलाई बैक्टीरिया होता है।
यह बैक्टीरिया पेशाब के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और आपकी सेहत को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। यह पुरूषों की अपेक्षा में महिलाओं को ज्यादा हानि पहुंचाता है। आप तनाव संबंधी मूत्र अनियमितता से पीड़ित हो सकती हैं।
महिलाओं को यूटीआई की स्थिति में पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, पेशाब में जलन, पेशाब से बदबू आना, बार-बार पेशाब जाने जैसे लक्षण का सामना करना पड़ता है।
ये सभी यूटीआई की समस्या के सामान्य लक्षण हैं, यदि इनमें से कोई भी समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी जांच करवाएं।
यदि समय से जांच न कराई जाए तो बीमारी ब्लैडर से किडनी तक पहुंच सकती है। वहीं पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या, ठंड और बुखार भी हो सकता है। ध्यान दें पेशाब से जैसे ही बदबू आना शुरू हो वैसे ही डॉक्टर को दिखाएं।
यदि आपको यूटीआई है तो किडनी फैल होने का खतरा बना रहता है। कभी-कभी ये किडनी और ब्लैडर दोनों में एक साथ दिक्कत पैदा कर सकता है। वहीं खून में इन्फैक्शन पहुंचने पर ये खून के माध्यम से शरीर के दूसरे अंग को भी डैमेज कर सकता है।
ऐसी स्थिति में ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है। मर्ज कितना अंतर तक है ये जांच में पता चल जाता, जिसके बाद ऑपरेशन की जरुरत है या नहीं इसकी जानकारी मिल पाती है। कभी भी पेशाब को रोककर न रखें।
ऐसे व्यक्ति को होता है यूटीआई से ज्यादा खतरा :
कम पानी पीने वाले
देर तक पेशाब रोकने वाले
सेक्स के बाद हाइजीन को नजरअंदाज कर देना
गंदे व्यक्ति से सेक्स
सेक्सुअल डिस्चार्जहीनता से उपजी गर्मी
एक दिन में जरुरत से ज्यादा बार नहाना
किडनी स्टोन से पीड़ित व्यक्ति
यूरीन की जांच से यूटीआई की समस्या का पता लगाया जा सकता है। डायबिटीज के मरीज भी इस बीमारी से बचने के लिए समय समय पर यूरीन की जांच कराते रहें।
क्या है यूटीआई का इलाज
जिनको यूटीआई (Urinary tract infection) की गंभीर समस्या नहीं होती है, वह अपनी बीमारी का इलाज एंटीबायटिक दवाओं का सेवन करके भी कर सकते हैं।
इसके अलावा आपको हर दिन खूब सारा पीना पीना चाहिए। वहीं यूटीआई में ठंडी चीज़ों का सेवन करना चाहिए, साथ ही प्रोबायोटिक्स भी काफी कारगर होते हैं।

