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वर्ल्ड कैंसर डे:74 की उम्र में जीती कैंसर से जंग, कीमाेथैरेपी के दाैरान गाते थे गीत

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रायपुर

ये कहानी है बूढ़ापारा में रहने वाले 74 साल के रिटायर्ड बैंक मैनेजर महेश व्यास की। इस उम्र में जब उन्हें कैंसर हुआ तो हार मानने के बजाय उन्होंने डटकर मुकाबला किया और कैंसर के खिलाफ जंग जीतने में कामयाब भी रहे। डॉक्टर जब उनकी कीमोथैरेपी किया करते थे तब वो गाना गुनगुनाते थे।

उनके विल पावर से प्रभावित होकर डॉक्टर और नर्सिंग टीम भी उनके साथ सुर से सुर मिलाती। कीमो थैरेपी के दौरान वे अपना पसंदीदा भजन- जनम तेरा बातों ही बीत गयो, रे तूने कबहू ना कृष्ण कहो… और मन्ना डे का पूछाे ना कैसे मैंने रैन बिताई, एक पल जैसे एक जुग बीता, जुग बीते माेहे नींद न आई… जैसे गीत गाते थे। उन्हाेंने बताया, मार्च 2020 में मैं बड़ी बेटी के लंदन स्थित घर में था। वहां मुझे सेहत बिगड़ने का अहसास हुआ। तुरंत इंडिया वापस आ गया। चेकअप करया ताे प्रोस्टेट कैंसर निकला। मैं मुंबई में इलाज कराने के लिए हाॅस्पिटल सर्च कर रहा था कि अचानक लॉकडाउन हो गया। इसके बाद नया रायपुर स्थित बालको कैंसर हॉस्पिटल में ही इलाज शुरू कराया। मेरा परिवार संगीत से जुड़ा है।

बड़े भाई गुणवंत व्यास देश के नामी संगीतकार, गीतकार और गायक रहे हैं। मैं खुद भी संगीत गुनगुनाता हूं। माउथ ऑर्गन भी बजाता हूं। इस बीमारी से लड़ने के लिए मैंने संगीत गाकर और सुनकर खुद का हौसला बढ़ाया। इस उम्र में भी मेरे बाल काफी घने थे। मैं 40 सालों से फ्रेंच दाढ़ी रख रहा हूं। मेरी पहली कीमाेथैरेपी 10 सितंबर को हुई। कीमो के बाद मुझे अच्छी नींद आई। सुबह उठा तो अहसास हुआ कि दाढ़ी चुभ रही है। हाथ फेरा तो पूरी दाढ़ी हाथ में आ गई। तकिये में सिर के काफी बाल झड़ चुके थे। बहुत बुरा लगा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। कुल पांच कीमोथैरेपी ली। थैरेपी के दौरान ट्रीटमेंट लेते हुए मैं गीत गुनगुनाता था। हॉस्पिटल का स्टाफ जिन्हें गाने का शौक है, मेरे साथ गाते थे। कई बार ऐसा लगता कि कीमोथैरेपी नहीं, बल्कि म्यूजिकल थैरेपी ले रहा हूं। अब तक 14 किलो वेट लॉस हो चुका है। अब स्टिक लेकर चलता हूं। लेकिन खुशी की बात ये है कि कैंसर से जंग जीत चुका हूं। मेडिसिन चल रही है। धीरे-धीरे रिकवर हो रहा हूं। अब तो सिर पर बाल भी उग आए हैं। मेरा मानना है कि पॉजीटिव थिंकिंग से इंसान किसी भी उम्र में कैंसर से जंग जीत सकता है। महेश व्यास का इलाज बालको मेडिकल सेंटर के कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा, डॉ. अश्वनी सचदेवा, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गुप्ता और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. देबदुलाल बिस्वाल ने किया।

मैं हूं और मैं रहूंगा… है थीम: पहली बार विश्व कैंसर दिवस 1933 में मनाया गया। 4 फरवरी, 2000 को विश्व कैंसर सम्मेलन हुआ, जिसमें निर्णय लिया गया कि हर साल 4 फरवरी को लोगों काे कैंसर के प्रति अवेयर करने कैंसर दिवस मनाया जाएगा। 2019 से 2021 यानी तीन साल तक इसकी थीम मैं हूं और मैं रहूंगा… रखी गई है।

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