सुसंस्कृति परिहार आजकल बहू बेटियों के साथ होने वाले अन्याय के मामले सामने आने लगे हैं क्योंकि वे बोलने लगी हैं। दिक्कत ये है वे जब हद से ज़्यादा परेशान हो जाती हैं तभी कुछ कह पाती हैं जबकि उन्हें इसका अहसास बराबर पहले हो जाता है मां बाप की सीख, खानदान की बदनामी और आगे क्या करेगी जैसे सवाल उसे बहुत कुछ सहने बाध्य करते हैं तब तक आमतौर पर वह तन और मन से टूट चुकी होती है।कहते हैं देर आए दुरुस्त आए इस सबके बावजूद नारीशक्ति अपनी क्षमताओं से नया इतिहास लिखती आई है। ताज़ा घटना लोधी समाज के नरसिंहपुर के एक रसूखदार परिवार से संबंधित है, जिसमें केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के भाई विधायक जालिम सिंह पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश शासन की बहू से सम्बंधित है।ज़ालिम सिंह के पुत्र मोनू के साथ 2016 में दमोह के एक दूसरे राजनैतिक परिवार से भाजपा सांसद रहे चंद्रभानसिंह की 26 वर्षीय बेटी की शादी धूमधाम से सम्पन्न हुई थी जिसमें मुख्यमंत्री सहित कई भाजपा और अन्य पार्टी नेता ,अधिकारी शरीक हुए। आशीर्वाद दिया गया होगा भरपूर लेकिन बाद में उस बेटी के साथ क्या क्या होता रहा किसी ने परवाह नहीं की।बेटी के मायके वाले और ससुराल वाले उसे यह कह समझाने का प्रयास करते रहे कि सब ठीक-ठाक हो जाएगा। जबकि बहू बेटी नीतू सिंह ने अपने पति की तमाम गंदी आदतों से दोनों परिवारों को भली-भांति परिचित कराया । उसका कहना है कि जब उसने अपने ससुर विधायक जालिम सिंह से मोनू से तलाक लेने की बात की तो उन्होंने भी उसे बुरी तरह डांटा फटकारा । वहां पिछले छै साल इस बेटी ने भारी प्रताड़ना में गुजारे हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने यह कहकर पल्ला छुड़ा लिया कि उसने सब कुछ जानकर शादी क्यों की?एक कर्त्तव्य परायण नेता का ये जवाब उन्हें भी इस शादी का जिम्मेदार मानता है। नीतू सिंह ने एक वीडियो के ज़रिए जारी अपनी दुखद दास्तान में ये भी बताया है कि विधायक जालिम सिंह का भोपाल स्थित आवास उसके पति की अय्याशियों का केंद्र बना हुआ है। सबसे दुखद पहलू तो ये है कि शादी से पहले जब उसकी होने वाले पति से मुलाकात होती है तभी वह उससे शारीरिक सम्बंध बनाने की बात कहता है।नीतू उसे मना करती है ।उसे नापसंद की बात करती है तभी से वह उस पर प्रतिबंधात्मक रुख अपनाता है धमकी देता है और कहता है वह उससे शादी ज़रूर करेगा भले एक दिन बाद छोड़ दें।नीतू ये सब घर में नहीं बताती सिर्फ यह कहती है कि वह उसे पसंद नहीं है। राजनीतिक परिवार भला इसे कैसे बर्दाश्त करता उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी होती है। वह ससुराल पहुंचती है । वहां उसे पता चलता है उसके पति मोनू पर 45 अपराधिक मामले दर्ज हैं। उनमें हत्या जैसे गंभीर मामले भी हैं।उसके पास उसके पति की प्रेमिकाओं के साथ शराब और ड्रग्स के नशे में डूबे पति के चित्र मैसैंजर में लगातार आने लगते हैं।ये एक हजार से अधिक 20 से 22 साल की युवतियां होती हैं। नीतू का कहना है कि शादी के दिन से ही मोनू इस कृत्य में लगा हुआ है। जब इस सम्बन्ध में कुछ पूछा जाता तो बेहिसाब मारपीट और अभद्र व्यवहार करते हुए वह कहता है कि यह राजनीति का हिस्सा है।यह सब तो चलता है। इसमें पड़ने की ज़रूरत नहीं।आगे वह कहती है -‘इसी माहौल में लगातार छै साल रहते हुए मैं काफ़ी बीमार रही हूं।शरीर पूरी तरह जर्जर हो चुका था।लगता यहां ज़िन्दगी ख़त्म हो जाएगी।ऐसे में मुझे ससुराल की एक दादी के शब्द बरबस याद आ गए जो कहती थीं-” बेटी भाग जा नहीं तो मर जायेगी।”तब सचमुच एक दिन मैंने अपने भाई को चुपचाप बुलाया और उसके साथ अपने तमाम प्रमाणपत्र लेकर सब कुछ वहीं छोड़कर मां के घर आ गई।कई दिन ग़मगीन रही फिर अपने को मज़बूत किया ।आज दिल्ली में छोटी सी एक नौकरी कर रही हूं और पति से तलाक लेने की कार्रवाई कर दी हूं। फिर भी इस जालिम राजनैतिक परिवार से ख़तरा बना हुआ है।’ यह दर्दनाक घटना दो बातें साफ करती है कि राजनैतिक परिवार अपनी शान और प्रतिष्ठा के झूठे दिखावे में कैसे अपनी बहू बेटी की ज़िंदगी दांव पर लगा देते हैं। दूसरा संदेश यह कि बेटियों को गलत बात की आज्ञाकारिता का खुलकर विरोध करना सीखना होगा।ये उनका अपना जीवन है जिसे अपनी इच्छानुसार जीने का हक उन्हें भारतीय संविधान देता है। अब जैसा कि नीतू को ख़तरा नज़र आ रहा है उसकी सुरक्षा का दायित्व सरकार को लेना होगा, महिला आयोग को भी भरपूर सहयोग करना होगा और इस जालिम परिवार को कटघरे में खड़ा कर उस आवास को तुरंत छीनना चाहिए। जहां उनके पुत्र की रंगरेलियां चलती हैं।जो हजार युवतियों की फोटो नीतू के पास हैं उनकी तफ़्तीश मोनू से की जाए तथा उन्हें भी इस कुचक्र से निकाला जाए। निश्चित तौर पर वे विपदा की मारी युवतियां होंगी जो ऐसे अश्याशों के षड्यंत्रों की शिकार हुई हैं।ज़ुल्म ढाने वाले इस लड़के को फौरन पुलिस के सुपुर्द किया जाना भी ज़रूरी है जो स्त्री अस्मिता को क्षतविक्षत करने का गुनहगार है।ड्रग्स कहां से यहां पहुंच रहे इसका खुलासा भी ज़रुरी है।लगता है यह राजनीतिक संरक्षण के एक बड़े खेल का हिस्सा है। “बेटी बचाओ बेटी पटाओ “कह जाने के बाद पी एम का अफ़सोस जाहिर ना करना भी ऐसे लोगों का हौसला बुलंद कर रहा है।उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से कुछ-कुछ वैसी ही घटना सामने आई है, जैसी 2020 में हाथरस से सामने आई थी। आरोप है कि बुलंदशहर के एक गांव में 21 जनवरी को नाबालिग युवती से सामूहिक दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। आरोप ये भी है कि पुलिस ने हाथरस की तर्ज पर आधी रात में ही पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि युवती की गोली मारकर हत्या की गई है और इसके बाद उसके प्रेमी ने अपने हाथ की नस काटकर आत्महत्या की कोशिश की थी। हालांकि परिजन आरोप लगा रहे हैं कि उनकी 16 साल की बेटी की गैंगरेप के बाद हत्या की गई। अफ़सोसनाक यह है कि यह बच्ची भी लोधी समाज की है।मारने वाला सवर्ण है। पुलिस योगी जी की है। ये दो घटनाएं ये जाहिर करती हैं कि रसूखदार लोग बहू बेटियों पर आज भी कहर बरपा रहे हैं। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाला नरसिंहपुर का ये परिवार अत्याचार मामले में सवर्णों के रंग ढंग अपनाने लगा है जो चिंताजनक है। उम्मीद है शिवराज सरकार नरसिंहपुर के घटनाक्रम पर “बेटी बचाओ”कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने नीतू की मददगार बनेगी तथा अपराधी विधायक और पुत्र पर बिना भेदभाव समुचित कार्यवाही करेगी।ओ बी सी समाज ने भी नीतू को सहयोग और संरक्षण की बात कही है सरकार से दोनों मामलों में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दमोह की इस बेटी की परेशानी में अब कांग्रेस पार्टी भी सीधे मैदान में आने की तैयारी में है कल कलेक्टर को ज्ञापन देगी। संपूर्ण दमोह जिले में इस बेटी के साथ हुए इस अन्याय के लिए खौल है। नीतू के प्रति संवेदनात्मक प्रतिक्रियाएं हर चौक चौराहों पर सुनी जा सकती हैं। लोधी समाज भी इस घटना से आक्रोशित हैं।