-अजय असुर,
शांतिपूर्ण तरीके से लौट रहे मासूम किसानों को बर्बरता से रौंदने वाली इस तस्वीर ने हिलाकर रख दिया है.इतनी क्रूरता, इतनी नफरत किसानों के लिए ? आप ने भी स्वयं इस विडियो में देखा होगा कि कैसे शांतिपूर्ण तरीके से किसानों की भीड़ पर गाड़ी चढ़ाई गयी !! आज इन निहत्थे और बेकसूर अपने हक की मांग करते हुए कल इन किसानों की जगह इनकी खूनी लत का शिकार आप और हम भी हो सकते हैं !आज इनकी बारी आयी है तो निश्चित ही कल आपकी भी बारी आएगी !तो क्या आपको अपने बारी का इंतजार है ? यदि नहीं तो आओ मिलकर एक साथ इस बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाएं !ये घटना देखकर जलियावाला बाग कांड याद आता है. एक सनकी जनरल डायर निहत्थे बेकसूर जनता पर इसी तरह से गोलियां चलवाता है और आज डायर की जगह मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उसका लौंडा अपने RSS के गुंडों के साथ निर्ममतापूर्वक जनता को गाड़ी से रौंद देता है !बस वो गोरे थे और उनकी जगह इन कालों ने ले लिया है ! बस इतना ही फर्क है दोनों में !
अन्नदाता किसानों को खालिस्तानी /नक्सली /माओवादी और अब तालिबानी बताने वाले देशद्रोही, समाज द्रोही गद्दार और उनका समर्थन करने वाले मूर्ख मानसिक गुलाम आंखें फोड़ कर देख लो !! अगर अब भी शर्म बची है तो किसानों को दोष देना बंद कर दो या चुल्लू भर पानी में डूब मरो !! धरती फट जाए और समा जाओ उसी में ;क्योंकि तुमसे बड़ा गद्दार इस धरती पर नहीं होगा !ऐसे लोग धरती के बोझ हैं !खाते हैं किसानों की और गुण गाते हैं पूंजीपतियों के दलालों की !!
अन्त में आप सभी क्रन्तिकारी साथियों से अपील है कि किसानों की हत्या मे शामिल मंत्री पुत्र के गिरफ्तारी एव केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री की ब॔खास्तगी बिना घर वापसी सही नहीं, क्योंकि अजय मिश्रा टेनी के गृह राज्य मंत्री रहते हुए, किसानों को न्याय नहीं मिल सकता…. क्या किसी की मौत की भरपाई 45 लाख रुपया और एक सरकारी नौकरी के वादों से हो सकती है ?
मतबल जब जी में आया मार दो और बदले में चन्द कागज का नोट और नौकरी वादा कर लो…बस हो गया काम !
अतः हम सभी साथियों को गृह राज्य मंत्री की ब॔खास्तगी और उसके बेटे तथा उसके पालतू गुण्डों समेत मंत्री तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अडिग रहना चाहिए था….. और अब इस पर अड़ ही जाना है कि जब तक गिरप्तारी के साथ मंत्री की ब॔खास्तगी नहीं, तब घर वापसी नहीं !मंत्री पुत्र के गिरफ्तारी एव केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री की ब॔खास्तगी बिना घर वापसी कतई सही नहीं.
अन्त में अयोध्या सिंह की एक कविता
‘चुप कब तक रहूं, अब रहा नहीं जाता,
गुलामी का दंश गहरा,अब सहा नहीं जाता,
तिनके-तिनके सारे सपने बिखर गए,
मर्म पर लगी चोट, अब कहा नहीं जाता।
आजादी क्या है, पूछो आजाद परिंदों से,
मुश्किल है जान बचानी,इन दरिंदो से,
पिंजरे में बंद तोते, हाल बयां नहीं करते,
हकीकत क्या आजादी की,सुनो शहीदों से।
गर जला भी दो उन्हें, मुर्दे कभी बोलते नहीं,
दिल की अपनी बात किसी से कहते नहीं,
शांति हो श्मशान की, हमें कभी मंजूर नहीं,
हम हैं वैसे बागी, जो अन्याय कभी सहते नहीं।
काट भी दोगे गर जुबां, हमारी जमीर बोलेगी,
काट लोगे हाथ भी, खून की लकीर बोलेगी,
बखूबी जानते हो तुम, डरते नहीं हम मौत से,
मर भी गए तो क्या, शहादत की तासीर बोलेगी। ‘
-अजय असुर,जनवादी किसान सभा,संपर्क-8960050402
संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,

