,मुनेश त्यागी
जात धर्म के झगड़े छोड़ो
समता ममता की बात करो,
बहुत रह लिए अलग-थलग
अब मिलने जुलने की बात करो
हिंसा के पुजारी ठहरे वो
तुम अमनचैन की बात करो,
ठहरे वह अमीरों के चाकर
तुम मेहनतकश की बात करो।
लूटा और खसौटा जन को
अब तो जन की बात करो,
बहुत पी लिया खून हमारा
अब हिसाब की बात करो।
हडपते हैं जो मेहनत को
उनको हड़पने की बात करो,
बेनूर सुबह के हामी वो
तुम लाल सुबह की बात करो।
हीरे मोती पर्वत सागर
सारी बहारों की बात करो,
एक खेत नहीं एक देश नहीं
सारी दुनिया की बात करो।
सारे ताने-बाने को बदलो
खुद भी बदलने की बात करो,
हारे थके, आधे अधूरे नहीं
पूरे इंकलाब की बात करो।

