सतीश मंत्री
जीवनशैली एवं आहार चिकित्सा विशेषज्ञ
हृदय एवं केंसर रोग स्पेशलिस्ट
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ऊपर वाले ने हमें सदा स्वस्थ रहने के लिये बनाया है, किन्तु अज्ञानतावश हमारी गलत दिनचर्या (लाइफ स्टाइल) से निम्न लाइफ स्टाइल डिसीज़ एवं अन्य रोग हो रहे हैं :-

1. डायबिटीज
2. पाईल्स एवं आंतो के रोग
३. एसीडीटी
इन रोगों का प्रिवेंशन सम्भव है एवं ये रोग होने पर इन्हें काबू में रखा जा सकता है एवं ठीक भी हो सकते हैं।
4. मोटापा
5. ब्लड प्रेशर
6. हृदय रोग
7. केन्सर
इनका प्रिवेन्शन सम्भव है एवं ये रोग होने पर इन्हें आहार एवं विहार व्दारा ठीक किया जा सकता है।
उपरोक्त बीमारियां एवं अन्य बिमारियां होने के कारण एवं उनसे बचने के उपाय निम्नानुसार है:-
1. शरीर से कचरा निष्पादन (निकासी) समय पर एवं ठीक से ना होना:-
कचरा निष्पादन के निम्न माध्यम हैं:-
अ. मलः भोजन के 14 से 17 घंटे के भीतर शरीर से मल निकल जाना चाहिये। दो बार पूर्ण भोजन करने वालों को दो बार एवं तीन बार भोजन करने वालों को तीन बार शौच (पोटी) के लिये जाना चाहिये।
ब. मूत्र : एक व्यक्ति को दिन भर में 3 से 5 लीटर पानी पीना चाहिये। जिससे शरीर से व्यर्थ पदार्थ (कचरा) आसानी से बाहर निकल सके।
स. पसीना : शरीर से पसीना निकलना आवश्यक है इसे रोकने के लिये डिओडरन्ट का उपयोग ना करें।
द. कफः दोनो समय फ्रेश होने वाले व्यक्तियों को कफ कम बनाता है। सर्दी एक वायरल रोग है यह रोग 18 दिन में अपने आप ठीक हो जाता है। सर्दी होने पर कुनकुने पानी में नींबू व शहद डालकर लेना लाभदायक होता है।
2. दैनिक आहार में निम्न आवश्यक तत्वों का समावेश नहीं होना या ज्यादा अथवा कम मात्रा में होना:–
हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा (चिकनाई), विटामिन्स, एन्टीऑक्सीडेंट, रेशा (15 से 18 ग्राम प्रतिदिन) आवश्यक है। मिनरल एवं धातुएँ : केल्शियम, आयोडीन, तांबा, सोडियम, आयरन, मेग्नीशियम, जिंक, आदि
नोट: उपरोक्त विटामिन्स एवं मिनरल्स हमें हमारे कार्बनिक भोज्य पदार्थो से ही लेना चाहिये अन्यथा नुकसान कर सकते हैं।
3. उचित एवं आवश्यक व्यायाम का अभावः-
तेज गति से पैदल चलना सर्वश्रेष्ठ व्यायाम है। एक सप्ताह में कम से कम पाँच दिन ३० मिनट रोजाना पैदल चलना अनिवार्य है एवं हमारे स्वास्थ्य के
व्यायाम के अभाव में मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर एवं हार्ट में ब्लाकेज की समस्या होती है। कैंसर का भी यह बड़ा कारण है। व्यायाम के अभाव में पाचन क्रिया सुचारू रूप से नहीं चलती है और शरीर से कचरे का निष्पादन समय पर एवं सुचारू रूप से नहीं होता है।
4. आवश्यक नींद और आराम की कमी:-
वयस्क लोगों को 7 से 8 घंटे की नींद लेना अनिवार्य है। कम नींद लेना अथवा ज्यादा नींद लेना, दोनों से बीमारीयां एवं वजन बढ़ता है। आरामदायक एवं पतली गादी पर, बिना तकिया लगाये, एक दम अंधेरे में सोना चाहिये। भोजन सोने के 3 घंटे पूर्व कर लिया जाये तो लाभदायक होता है।
5. मोटापा :-
हमारा वजन प्रति इंच लम्बाई पर लगभग एक कि.ग्रा. होना चाहिये। 10 प्रतिशत + – तक सामान्य है। मोटापे का मुख्य कारण भोजन में केलोरी की अधिकता एवं नियमित व्यायाम का अभाव है। लगभग 7750 केलोरी अतिरिक्त खाने (लेने) पर 1 किग्रा वजन बढ़ता है। सामान्य सिध्दांत हमारी कमर का माप हमारी लम्बाई का आधा होना चाहिये।
6. आवश्यक धूप का अभावः-
हमें प्रतिदिन आधे से एक घंटे, कम से कम कपड़ो में धूप लेना चाहिये। धूप के अभाव में हमारे शरीर में विटामिन-डी की कमी हो जाती है एवं केल्शियम का अवशोषण (एब्सोर्ब) नहीं हो पाता है जिससे सफेद दाग होने की संभावना होती है एवं हड्डियाँ कमजोर होती है। साथ ही इसकी कर्म अनेक बीमारियों का कारण बनती है।
3 घन्टे से कम समय प्राकृतिक रोशनी में रहने वालों को दूर की नजर (मायोपिया) कमजोर होने की समस्या हो सकती है।
7. जहर का सेवन :-
प्रमुख जहरीले पदार्थ जो हम सामान्यतयाः लेते हैं, निम्न है चाय, कॉफी. नमक (सोडियम क्लोराइड), एसिड, सिरका, भांग, तम्बाखू, अफीम, अल्कोहल, दवाइयाँ, कार्बनडाई आक्साइड, अजीनोमोटो, शक्कर (अधिक लेने पर), ब्लीच, नानस्टिक बर्तन से (PFOA), सोडा आदि। इनमें से जो भी पदार्थ हम सेवन करते हैं, इनमें से कुछ कार्बनिक होते हुए भी इनमें कोई न कोई जहर विद्यमान है, जो कि मानव शरीर को नुकसान पहुंचाता है। अतः हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पदार्थों का सेवन न करें या कम से कम करें।
8. अकार्बनिक वस्तुओं का भोजन में होनाः–
हमारा मानव शरीर कार्बनिक है, अतः इसमें किसी भी अकार्बनिक (मृत) पदार्थ का अवशोषण नहीं होता है। इसे हमारा शरीर वापस बाहर निकालता है। अक्सर, अकार्बनिक पदार्थ शरीर में रह जाते हैं वे हमारे शरीर में विकृती उत्पन्न करते है। प्रमुख अकार्बनिक पदार्थ जो हमारे भोजन में शामिल है जैसे सभी प्रकार के नमक (सोडियम क्लोराइड), चूना (केल्शियम कार्बोनेट), मिट्टी, मीठासोड़ा, एसिड, सिरका, कीटनाशक, धातुएं (लोहा, पीतल, तांबा, एल्युमिनियम, सीसा, केडीयम, क्रोमीयम, जस्ता, चांदी, सोना) इत्यादि । इनके नुकसान से बचने के लिये नमक, चूने एवं अन्य अ कार्बनिक पदार्थो का कम से कम उपयोग करें, भोजन केवल स्टेनलेस स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के बर्तनों में ही पकावें। छपे हुए कागज पर रखकर कुछ ना खाएं, ना ही रोटी लपेटें। चांदी के बरक का सेवन नहीं करें। लिपीस्टिक ना लगायें।
9. उचित पॉइश्चर (एंगल मुद्रा) का ध्यान नहीं रखनाः–
ज्यादा नरम बिस्तर पर नहीं सोना, तकिया नहीं लगाना, सीधे कड़क चलना, सीधे बैठना, बिस्तर से करवट लेकर उठना, गर्दन झुकाकर न रहना और ना ही चलना, वजन उठाने में घुटने मोड़कर, घुटने एवं कमर दोनों का उपयोग करना। साथ ही शरीर में लोच बनाये रखने वाले व्यायाम उचित मार्गदर्शन में नियमित करना चाहिये।
10. मानसिक स्थिति ठीक न होना :-
हमेशा सकारात्मक सोच रखना चाहिये। नेगेटीव नकारात्मक सोच वालों से दूर रहना चाहिये। जब भी टेन्शन हो आहार ना लेवें या हल्का (फल आदि का) आहार लेवें। हमेशा खुश मिजाज रहें। अनावश्यक चिन्ताओं में 40% अघटित, 30% ऐसी घटनाएँ जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते, 20% शुद्र, तुच्छ एवं अनावश्यक चिन्ता, सिर्फ 8% ही चिन्ता के योग्य होती है। अतः इससे बचना चाहिये।
11. हेरीडीटी:-
परिवार में स्वास्थ्यप्रद खानपान एवं आदतों का समावेश होना चाहिये। जिससे परिवार के एक सदस्य की बीमारी से सभी लोग पीड़ित ना होवें।
12. दांतो की सुरक्षाः-
दांतो की सुरक्षा के लिये हमें ठण्डे एवं गरम पदार्थ साथ में नहीं खाना चाहिये। वैज्ञानिको ने एक चने के दाने के बराबर पेस्ट को दांतो की सफाई के लिये पर्याप्त माना है। ध्यान रहे पेस्ट या मंजन पेट में नहीं जाना चाहिये क्योकि इसमें जो अकार्बनिक पदार्थ होते है वें शरीर में एब्सार्ब नही होते है। कोई भी मंजन दांतों को फायदा नहीं पहुंचता है।
13. आँखों की सुरक्षा:–
विटामिन A एवं C आँखो के लिये बेहद लाभकारी है। इनके नियमित सेवन से चश्मे के नम्बर नहीं बढ़ते। अंगूर के सेवन से आँखे जीवन भर साथ निभाती है। आँखों को स्वस्थ्य रखने के लिये ब्लडप्रेशर का नियंत्रण में होना आवश्यक है। कन्जक्टी वाईटीज़ होने पर या आँखो में गिचड़े आने पर आई ग्लास में पानी लेकर 4 से 6 बूंद नींबू का रस मिलाकर आँख धोने से आँखे ठीक हो जाती है। कुछ पानी बहने पर घबरायें नहीं, हल्की सी जलन होती है।
14. एलर्जी बीमारी नहीं हैः–
एलर्जी नाम की कोई बीमारी नहीं होती है। वस्तुतः यह हमारे शरीर में कचरा इकट्ठा होने का परिणाम होता है। अतः शरीर को डिटॉक्स करने से यह रोग दूर हो जाता है।
15. पेट से सम्बधिंत प्रत्यक्ष बीमारीयाँ-
पेट का रोटेशन (गट साइकिल) सही नहीं होने पर निम्न बीमारीयाँ होती है। जिन्हें पेट का रोटेशन सही करके आसानी से ठीक किया जा सकता है
1. जी घबराना, पेट दर्द होना
2. अपच होना
3. खाने की इच्छा ना होना
4. उल्टी होना
5. यात्रा में या झूले में उल्टी होना
6. दस्त लगना
7.कफ अधिक बनना
8. सिरदर्द रहना
9. अपेनडिक्स
10. सी-सिकनेस
11. टांसिल इत्यादि।
पेट से सम्बन्धित अप्रत्यक्ष बीमारीयाँ :–
1. केन्सर 2. पाईल्स 3. हार्ट की बीमारी CAD आदि इनमें भी यदि हम दिनचर्या एवं आहार में सुधार कर लें तो शीघ्र आराम होने लगता है।
हिन्दू धर्म एवं जैन धर्म और स्वास्थ्य :
वैसे तो सभी धर्मों में मनुष्य को स्वस्थ्य एवं मानसिक रुप से सबल करने के उपाय बताए गए है। किन्तु अगर हम गौर करें तो हिन्दू धर्म एवं जैन धर्म में हमें अनेक स्वास्थ्यप्रद विशेषताएं देखने को मिलती है :-
1. नियमित दिनचर्या 2. फलाहारी व्रत या निराहार उपवास व्दारा शरीर का
डिटॉक्सीफिकेशन 3. टेंशन में भोजन का त्याग 4. स्ट्रेस मेनेजमेंट 5. सूर्य
नमस्कार 6. परिक्रमा से व्यायाम 7. आयम्बिल (बिना नमक का भोजन) 8.