बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 की हिंसा को उग्रवादियों की साजिश बताते हुए कहा कि अंतरिम युनूस सरकार के पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है. उन्होंने मोहम्मद यूनुस प्रशासन पर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाए. हसीना के मुताबिक बांग्लादेश को स्थिरता, सुरक्षा और विकास के लिए संविधान आधारित शासन और निष्पक्ष, समावेशी चुनाव ही एकमात्र रास्ता है.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने देश के मौजूदा हालात पर गंभीर सवाल उठाए हैं. हसीना ने 2024 की अशांति को एक सोची-समझी साजिश बताया है. उनके अनुसार यह कोई छात्र आंदोलन नहीं था, यह कट्टरपंथियों द्वारा किया गया एक विद्रोह था.एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि इस सरकार के पास कोई लोकतांत्रिक वैधता नहीं है. यूनुस ने कट्टरपंथियों को और भी अधिक ताकतवर बना दिया है. अगस्त में हुई हिंसा की न्यायिक जांच को भी रोक दिया गया. हसीना ने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि देश अब आर्थिक पतन की ओर बढ़ रहा है. केवल संवैधानिक शासन ही देश को बचा सकता है. बिना चुनाव के देश में स्थिरता कभी नहीं आएगी.
बांग्लादेश छोड़ने का फैसला क्यों लिया, और वापसी के लिए क्या शर्तें होंगी
शेख हसीना के अनुसार, 2024 में जो कुछ हुआ, उसकी शुरुआत एक वास्तविक छात्र आंदोलन से हुई थी. उन्होंने कहा, ‘छात्रों की मांगों को हमने सुना और शुरुआती दौर में विरोध को पूरी छूट दी’. लेकिन जल्द ही हालात बदल गए. हसीना का दावा है कि उग्र तत्वों ने भीड़ को हिंसा की ओर मोड़ दिया. पुलिस थाने जलाए गए, संचार ढांचा तोड़ा गया और राज्य संस्थानों पर हमले हुए. उन्होंने कहा, ‘उस वक्त यह कोई शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलन नहीं रहा, बल्कि एक हिंसक भीड़ में बदल चुका था’. देश छोड़ने के फैसले पर हसीना ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे कठिन निर्णय था. उनके शब्दों में, ‘मेरा स्वभाव हमेशा देश और नागरिकों की रक्षा करने का रहा है. मैं नहीं चाहती थी कि और खून बहे’. वापसी की शर्तों पर उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेश में संविधान और कानून का शासन बहाल होना चाहिए. अवैध रूप से लगाए गए प्रतिबंध हटें, राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए और वास्तविक रूप से स्वतंत्र चुनाव कराए जाएं. उनका कहना है, ‘जिस पार्टी को नौ बार जनता ने चुना हो, उसे बैन कर लोकतंत्र की बात नहीं की जा सकती’.
न्यायिक जांच को रोककर आखिर क्या छिपाना चाहती है यूनुस की अंतरिम सरकार?
शेख हसीना ने अपनी सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी सरकार के लिए राज्य की संपत्ति और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होती है. उन्होंने कहा, ‘जब पुलिस थाने जलाए जाएं और सरकारी ढांचे पर हमले हों, तो व्यवस्था बहाल करना जरूरी हो जाता है’. उन्होंने यह भी बताया कि अगस्त 2024 की घटनाओं में हुई मौतों की जांच के लिए उन्होंने एक न्यायिक आयोग बनाया था. उनका आरोप है कि युनूस सरकार ने सत्ता में आते ही इस आयोग को भंग कर दिया.
हसीना ने कहा, ‘अगर बल प्रयोग या गलत मामलों को लेकर चिंता थी, तो जांच आयोग को खत्म क्यों किया गया’. उनके अनुसार, सच्चाई सामने आने से रोकने के लिए ही इस प्रक्रिया को रोका गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोषी आतंकियों को रिहा किया गया और जिन्हें वह ‘जुलाई योद्धा’ कह रहे हैं, उन्हें खुली छूट दी गई.
बांग्लादेश फिर चौराहे पर, शेख हसीना बोलीं लोकतंत्र ही देश को बचा सकता है.
क्या अवामी लीग के बिना देश में कभी निष्पक्ष चुनाव संभव हो पाएंगे?
शेख हसीना का कहना है कि मौजूदा अंतरिम सरकार को जनता से एक भी वोट नहीं मिला है. उन्होंने आरोप लगाया कि कट्टरपंथियों को कैबिनेट में जगह दी गई और अल्पसंख्यकों पर हमलों को रोकने में सरकार विफल रही. हसीना ने कहा, ‘मेरे कार्यकाल में अर्थव्यवस्था चार गुना बढ़ी थी, लेकिन अब वही अर्थव्यवस्था ठहराव की ओर है’. फरवरी 2026 में प्रस्तावित चुनावों पर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना है कि जब अवामी लीग पर प्रतिबंध रहेगा, तो चुनाव वैध कैसे हो सकते हैं. हसीना के अनुसार, यह सिर्फ राजनीतिक संकट नहीं, बल्कि संस्थागत कट्टरता का खतरा है, जो देश की जड़ों को कमजोर कर रहा है.
बिना वोट के सत्ता में आए यूनुस क्या देश को कट्टरवाद की ओर धकेल रहे हैं?
अपने शासनकाल की आलोचनाओं पर शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग की सबसे बड़ी उपलब्धि 1990 के दशक में लोकतंत्र की बहाली थी. उन्होंने याद दिलाया कि सैन्य शासन और गैर निर्वाचित नेतृत्व ने देश को कितना नुकसान पहुंचाया था. हसीना ने कहा, ‘हमने कभी लोकतंत्र को हल्के में नहीं लिया. विपक्ष की भूमिका अहम होती है, लेकिन कुछ दलों ने चुनाव बहिष्कार कर जनता के विकल्प सीमित किए’.
उन्होंने मौजूदा सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि आज वही लोग बिना वोट के शासन कर रहे हैं, जजों को इस्तीफा देने पर मजबूर किया जा रहा है और पत्रकारों को चुप कराया जा रहा है.
‘सवाल यह नहीं कि मैं क्या सुधार करती, सवाल यह है कि क्या सुधार के लिए कोई लोकतांत्रिक संस्था बचेगी भी या नहीं’.
शेख हसीना ने अपने 15 साल के शासनकाल को याद करते हुए कहा कि इस दौरान लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया. महिलाओं को सशक्त किया गया और बांग्लादेश एशिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने हमेशा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की और कट्टरपंथ को लोकतंत्र पर हावी नहीं होने दिया. हसीना का कहना है कि मजबूत और वैध सरकार ही देश को आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिला सकती है.
शेख हसीना ने बताया कैसे रची गई तख्तापलट की खौफनाक साजिश. (File Photo : Reuters)
युनूस सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए शेख हसीना ने कहा कि पश्चिमी समर्थन के भरोसे सत्ता में आई इस सरकार की सच्चाई अब सामने आ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की साख को नुकसान पहुंचा है और वर्षों से बने आर्थिक रिश्ते खतरे में पड़ गए हैं. हसीना के अनुसार, यह सिर्फ अक्षमता नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित तरीके से देश को अस्थिर करने की प्रक्रिया है.
क्या पाकिस्तान का बढ़ता प्रभाव बांग्लादेश के लिए एक नया ‘डेथ वारंट’ है?
पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी पर शेख हसीना ने संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि पड़ोसियों से संबंध जरूरी हैं, लेकिन 1971 के नरसंहार को न मानने वाले पाकिस्तान से जल्दबाजी में नजदीकी चिंताजनक है. उन्होंने कहा, ‘अंतरिम सरकार को विदेश नीति बदलने का कोई जनादेश नहीं है’. हसीना के अनुसार, बांग्लादेश की विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा प्राथमिकताओं और ऐतिहासिक रिश्तों पर आधारित होनी चाहिए, खासकर भारत के साथ.
बांग्लादेश के भविष्य को लेकर शेख हसीना का भरोसा
तमाम आरोपों और चिंताओं के बावजूद शेख हसीना ने बांग्लादेश की जनता पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि देश के लोग लोकतंत्र की ताकत को समझते हैं और अंततः वही विजयी होगा. उनके शब्दों में, ‘बांग्लादेश ने पहले भी कठिन दौर देखे हैं. हमें विश्वास है कि लोकतंत्र फिर से देश को स्थिरता और विकास के रास्ते पर ले जाएगा’.

