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उल्टी….दरिंदगी के बरक्स ज़िंदगी-3

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पूरी तरह बुर्क़े में ढकी गर्भवती औरत को उल्टी आने को हुई तो उसने कच्ची सड़क के किनारे जाकर चेहरे से नक़ाब हटाया और उल्टी करने लगी। तभी उसकी पीठ पर कोड़ा पड़ा। वह बिलबिला उठी। उसके सामने धर्मांध लड़ाका खड़ा कह रहा था, “तूने चेहरे से नक़ाब हटाया है, यह गुनाह है।

”          “मुझे उल्टी आ रही….” बात पूरी होने से पहले ही एक और कोड़ा उसकी पीठ पर पड़ा। वह दर्द और अपमान से तिलमिला गई। औरत को फिर से उल्टी आने को थी। अचानक वह घूमी और उस लड़ाके के ऊपर उल्टी कर दी। लड़ाका बौखला गया, वह औरत नक़ाब हटाए, कमर पर हाथ रख इत्मीनान से उसे देखे जा रही थी।

साभार – हरभगवान चावला, सिरसा,हरियाणा

संकलन – nirmalkumarsharma

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