भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने महाराष्ट्र में 25 फरवरी को इतिहास रच दिया। 18 घंटे में करीब 26 किलोमीटर लंबी सिंगल लेन सड़क बनाकर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दावेदारी पेश की है।
पूरे देश में ही हाईवे डेवलपमेंट की रफ्तार बढ़ गई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अप्रैल 2020 से 15 जनवरी 2021 तक 8,169 किलोमीटर नेशनल हाईवे (NHs) बनाया है। यानी लगभग 28.16 किमी प्रतिदिन। पिछले साल 15 जनवरी तक 7,573 किलोमीटर हाईवे बना था। रफ्तार थी 26.11 किमी प्रति दिन। इस साल टारगेट भी बड़ा है। 31 मार्च 2021 तक 11,000 किमी हाईवे बनाना है। इसे पूरा करने के लिए ठेकेदारों के बीच भी जल्द से जल्द सड़क बनाने की होड़ शुरू हो गई है।
110 किलोमीटर लंबे सोलापुर-बीजापुर हाईवे पर बने रिकॉर्ड को लेकर हमने NHAI में सोलापुर मंडल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजय कदम से बातचीत की। यह रिकॉर्ड बनाने का दिमाग में कैसे आया, क्या-क्या प्लानिंग की और कैसे उनकी टीम ने यह रिकॉर्ड बनाया? इन प्रश्नों का जवाब संजय कदम के ही शब्दों में…
गुजरात से मिली प्रेरणा
दरअसल, पिछले महीने सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी कॉन्ट्रैक्टर्स को स्पीड बढ़ाने को कहा था। 110 किमी लंबे सोलापुर-बीजापुर हाईवे का काम भी चल ही रहा था। अप्रैल-2021 तक यह काम पूरा होना था, पर लॉकडाउन ने इसकी स्पीड कम कर दी थी। कॉन्ट्रैक्टर को अक्टूबर-2021 तक का समय दिया था। गुजरात में 1 फरवरी को ग्रीनफील्ड दिल्ली-वड़ोदरा-मुंबई आठ लेन एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट के फोर लेन के हाईवे पर 24 घंटे में 2,580 मीटर लंबी पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (पीक्यूसी) सड़क बनी थी। यह हाईवे पर 24 घंटे में सबसे लंबी सड़क का विश्व रिकॉर्ड है। पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की इस उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। गुजरात में यह रिकॉर्ड बना तो हमें लगा कि हमारे पास भी पर्याप्त मशीनें हैं। हम भी यह कारनामा कर सकते हैं। गुजरात में कंक्रीट की सड़क बनी है और हमारे यहां डामरीकरण होना था। हमने कॉन्ट्रेक्टर IJM इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर सिद्धनगौड़ा समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया।

सड़क बनाने के लिए मैटेरियल ढोने के लिए 100 डम्परों की मदद ली गई।
ऐसे बना था प्लान…
15 दिन पहले ही हमने पूरी टीम के साथ मिलकर टारगेट सेट किया। शुरुआत में सोचा था कि दो तरफ से काम शुरू करेंगे। 10 घंटे में 10 किमी लंबी सिंगल लेन सड़क बनाएंगे और इस तरह 20 घंटे में 20 किमी सड़क बना लेंगे। गुजरात के रिकॉर्ड के 10 दिन बाद यानी 10 फरवरी को हमने प्लानिंग मीटिंग की। सबसे पहले यह जानने की कोशिश की कि हमें कितना मैटेरियल लगेगा। कितनी मशीनें लगेंगी। लोकेशन क्या होनी चाहिए। जब यह तय हो गया तब हमने 25 फरवरी की तारीख चुनी। 15 दिन में आवश्यक मैटेरियल, मशीनरी की व्यवस्था की। सिविल वर्क में कई पहलुओं को देखा जाता है। मशीन खराब हो जाएगी तो क्या करेंगे। इस वजह से हमने प्लान ए के साथ प्लान बी भी तैयार रखा। एक जगह यह काम भी आया। मशीन खराब होने पर हमें रिप्लेसमेंट करना पड़ गया था।

टारगेट को 5 हिस्सों में बांटा और 5 पेवर मशीनों का इस्तेमाल डामर बिछाने के लिए किया गया।
फिर आ गई 25 फरवरी…
हमारी पूरी टीम उत्साह से लबरेज थी। सुबह 6 बजे IJM इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी और NHAI के करीब 500 कर्मचारी और अधिकारी साइट पर थे। माहौल ऐसा था कि हम युद्ध लड़ने जा रहे हैं। हाईवे पर इतने सारे कर्मचारी देखकर गांव वाले भी कौतूहल में पड़ गए थे।
ऐसा लग रहा था कि मेला लगा है। टीम तो उत्साह में थी ही, रास्ते में पड़ने वाले पांच-छह गांवों में भी जश्न का माहौल था। 5 पेवर (डामर बिछाने वाली) मशीनें, 20 रोड रोलर, 10 लाइटिंग जंगसेट, 100 डम्पर, 15 हजार टन डामर मिश्रित गिट्टी तैयार थी।
कोई गलती न रह जाए, इसके लिए बारीकी से प्लानिंग की थी। मशीनरी, मैटेरियल, मैनपॉवर से लेकर हर स्तर पर वैकल्पिक प्लान तैयार रखा था। सेफ्टी के लिए एंबुलेंस भी तैनात थी। मशीन खराब हो जाए तो वैकल्पिक मशीनें और मैन पॉवर भी थी।

डामर बिछाने के बाद उसे समतल करने के लिए 20 रोड रोलरों का इस्तेमाल किया गया।
हमने सड़क को 5 हिस्सों में बांटा। बाले से हत्तूर, हत्तूर से नांदणी, नांदणी से होर्ती, होर्ती से तिडगुंदी, तिडगुंदी से बीजापुर। फिर दो तरफ से डामर बिछाने का काम शुरू किया। सोलापुर-बीजापुर हाईवे पर बसवनगर, नांदणी, धुलखेड़, होर्ती, तांडा, कन्नाला गांवों से होते हुए हमने रात दो बजे तक अपना टारगेट अचीव कर लिया था।
यह एक अलग ही अनुभव था। हम कई वर्षों से सड़क बना रहे हैं, पर यह कुछ अलग ही अनुभव था। हमने जो टारगेट सेट किया था, उससे आगे निकल चुके थे। हम दोनों तरफ से 12.75 किमी सड़क बना रहे थे। पर रात 12 बजे तक हमने 25.54 किमी सड़क बनाकर कीर्तिमान रच दिया था। इस दौरान लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारी भी साइट पर थे। उन्होंने भी हमारी उपलब्धि को दर्ज किया है। जल्द ही औपचारिक तौर पर उसे रिकॉर्ड माना जाएगा।
अब आगे क्या…
18 घंटे में करीब 26 किलोमीटर का टारगेट अचीव होने के बाद अब लग रहा है कि नामुमकिन कुछ नहीं है। बस रिसोर्सेस के साथ सही प्लानिंग और इस्तेमाल करें तो कुछ भी हासिल कर सकते हैं। हमारा अगला टारगेट अब 24 घंटे में 40 किलोमीटर सड़क बनाने का होगा।





