अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

150 करोड़ की जमीन अस्पताल बनाने ट्रस्ट को सिर्फ 4.13 लाख रु. में दी, 37 साल में कोई उपयोग नहीं

Share

इंदौर

एमआर-10 पर स्कीम नंबर 54 में बाबा दिलीप सिंह बेदी चिकित्सालय ट्रस्ट को दी गई 150 करोड़ कीमत की तीन एकड़ जमीन पर मंगलवार को आईडीए कब्जा लेगा। इस संबंध में सोमवार को सीईओ ने आदेश जारी कर दिए हैं। यह जमीन ट्रस्ट को अस्पताल बनाने के लिए दी गई थी, लेकिन इस पर न अस्पताल बन सका और न ट्रस्ट ने कोई पारमार्थिक कार्य किया। 37 साल से इस जमीन का उपयोग शून्य ही रहा, जबकि यह जमीन नो लॉस-नो प्रॉफिट के आधार पर बहुत कम रेट पर ट्रस्ट को दी गई थी।

लीज खत्म होने के बाद भी 7 साल से ट्रस्ट का कब्जा

आईडीए सीईओ विवेक श्रोत्रिय ने बताया कि बाबा दिलीप सिंह बेदी चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र ट्रस्ट को 1984 में 30 साल की लीज पर तीन एकड़ भूमि दी गई थी। इसकी लीज अवधि 2014 में समाप्त होने के बाद भी संबंधित का उक्त भूमि पर कब्जा है। यह भूमि ट्रस्ट को नो प्रॉफिट नो लॉस के आधार पर 3.06 रुपए प्रति वर्गफीट की दर पर दी थी।

इस लिहाज से इसकी कीमत सिर्फ 4 लाख 13 हजार 100 रुपए होती है। शर्त थी कि आवेदक जमीन पर 6 महीने में निर्माण शुरू कर देंगे और 3 साल के अंदर 70 प्रतिशत निर्माण पूरा करना होगा। ट्रस्ट द्वारा यहां बनाए जाने वाले अस्पताल में 50 प्रतिशत ओपीडी के मरीजों को मुफ्त में इलाज दिया जाएगा और 50 प्रतिशत जमीन पर अनुसंधान केंद्र बनाया जाना था।

एग्रीमेंट का भी उल्लंघन इतने साल में अस्पताल का ढांचा भी खड़ा नहीं किया

ट्रस्ट ने एग्रीमेंट की किसी भी शर्त का पालन नहीं किया। इस मामले में ट्रस्ट ने आईडीए पर सिविल केस भी दायर किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद में 2019 में कोर्ट ने फरियादी को फिर से सुनने का आदेश दिया था। इसकी पुन: सुनवाई करने के लिए आईडीए ने लगातार नोटिस दिए। अंतत: यह फैसला लिया गया कि मंगलवार को सुबह 11.30 बजे उक्त भूमि जिसका बाजार मूल्य 150 करोड़ रुपए है, उसका कब्जा आईडीए द्वारा लिया जाएगा। यहां पर अभी अधूरे निर्माण पड़े हैं।

निर्माण नहीं होने पर 2009 में लीज निरस्त की तो ट्रस्ट स्टे ले आया

आईडीए ने निर्माण नहीं होने पर 2009 में ट्रस्ट की लीज निरस्त कर दी थी। इसके बाद ट्रस्ट द्वारा कोर्ट से स्टे लिया गया था और प्रकरण चलता रहा। 2014 के बाद आईडीए ने बेदखली के लिए कलेक्टर को आवेदन भी किया था। 2018 में शासन का नया निर्देश आया कि आईडीए सीईओ अपनी जमीन को लेकर बेदखली की कार्रवाई खुद कर सकते हैं। इस पर आईडीए ने ट्रस्ट को नोटिस देकर पूछा कि उनके पास इस जमीन पर बने रहने के लिए क्या कागजात हैं। इस पर ट्रस्ट ने कोई जवाब नहीं दिया।

Ramswaroop Mantri

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें