हिमाचल में 5 जगह बादल फटे पुल और वाहन मलबे के साथ बहे, 325 रास्ते बंद
किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ जिले के चशोती इलाके में गुरुवार को बादल फटने से कम से कम 20 लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा तीर्थयात्रा मार्ग पर हुआ, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई। जहां बादल फटने की घटना हुई वह रास्ता मचैल माता के मंदिर जाता है। इस मार्ग से हर साल हजारों श्रद्धालु मचैल माता के दर्शन करने आते हैं।
हिमाचल राज्य के विभिन्न हिस्सों में पांच स्थानों पर बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। कुल्लू, किन्नौर, लाहौल स्पीति और शिमला व कुल्लु जिला के सीमावर्ती इलाकों में बादल फटने से कई पुल बह गए, वाहन बह गए, मकान व दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। गनीमत रही कि इन घटनाओं में किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने घटना की जानकारी मिलने के बाद किश्तवाड़ के उपायुक्त से बात की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, अभी-अभी जम्मू-कश्मीर के विपक्ष के नेता और स्थानीय विधायक सुनील कुमार शर्मा से संदेश मिलने के बाद किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा से बात की। चशोती क्षेत्र में भीषण बादल फटने की घटना हुई है, जिसमें भारी जनहानि होने की आशंका है। प्रशासन सक्रिय हो गया है, बचाव दल रवाना हो चुका है। नुकसान का आकलन और बचाव एवं चिकित्सा प्रबंधन की व्यवस्था की जा रही है। सभी संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
ताजा जानकारी अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है, जबकि अनेक लोग अब भी लापता बताए गए हैं। बताया जा रहा है कि बादल फटने के कारण मचैल माता यात्रा के शुरुआती प्वाइंट पर अचानक बाढ़ आ गई और कई अस्थायी दुकानों के साथ वाहन बह गए।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रशासनिक अमले के साथ ही पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को राहत व बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराज्यपाल सिन्हां और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बात कर केंद्र की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। सीएम उमर ने बताया कि बचाव कार्यों के लिए जम्मू-कश्मीर के भीतर और बाहर से संसाधन जुटाए जा रहे हैं, फिलहाल श्री मचैल यात्रा को आगामी सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राहत व बचाव कार्य में दर्जनों टीमें लग गई हैं, लेकिन ऊबड़-खाबड़ इलाका और लगातार हो रही बारिश चुनौती खड़े कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित इलाकों में जाने की अपील की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि क्षेत्र में बादल फटा है। यह मचैल माता यात्रा का मार्ग है। बादल फटने की घटना बहुत बड़े पैमाने पर हुई है, जिससे बड़ी संख्या में जनहानि होने की आशंका है। अधिकारियों से संपर्क किया गया है। इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। वह घटनास्थल की ओर रवाना हो गए हैं। हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन चिकित्सा उपचार के लिए हेलीकाप्टर से बचाव की भी व्यवस्था करेगा।
जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने भी इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की और राहत-बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने एक्स पर लिखा– किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने की घटना से दुखी हूं। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। सिविल, पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य को मजबूत करने और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें देश में इन दिनों भारी बारिश का दौर जारी है, जिसका सबसे ज्यादा असर पहाड़ी इलाकों में देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड में बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। हाल ही में चमोली जिले के नंदप्रयाग में बारिश के बाद हुए भूस्खलन से सड़क मार्ग बंद था। उत्तरकाशी में 5 अगस्त को हुए बादल फटने और फ्लैश फ्लड के बाद धराली और हरसिल गांव में भारी तबाही हुई थी। कीर गाड़ क्षेत्र के गांव में आए मलबे और पानी के बहाव से कई घर बह गए थे। प्रशासन ने हरसिल को उत्तरकाशी से जोड़ने वाले पुल का पुनर्निर्माण कर दिया है, जिससे राहत सामग्री और मशीनरी की आवाजाही आसान हो गई है।
हिमाचल में फिर आफत: 5 जगह बादल फटे पुल और वाहन मलबे के साथ बहे, 325 रास्ते बंद
हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण दो नेशनल हाईवे सहित 300 से ज्यादा सड़कें यातायात के लिए बंद करनी पड़ी हैं। मौसम विभाग ने आज भी चम्बा, कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं कुल्लू जिला के बंजार, मंडी जिला के गोहर और ऊना जिले में सभी शिक्षण संस्थान आज बंद रखे गए हैं।

जनजातीय जिला किन्नौर के सीमावर्ती क्षेत्र ऋषि डोगरी घाटी के ऊपरी हिस्से में बादल फटने से आई बाढ़ ने सतलुज नदी पर बने पुल को बहा दिया। इस घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया है। होजो लुंगपा नाले में बाढ़ आने से सीपीडब्ल्यूडी के तहत गंगथांग-ब्रालाम की ओर चल रहा सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। पूह गांव की उठाऊं पेयजल योजना को नुकसान पहुंचा है और एक निजी कंपनी का परिसर जलमग्न हो गया। सतलुज नदी में पानी और मलबा बढ़ने से करछम वांगतु नाथपा बांध के द्वार खोल दिए गए हैं। भारी बारिश के चलते पागल नाला, नाथपा और निगुलसरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया है।
इसी तरह जनजातीय जिला लाहौल स्पीति की मयाड़ घाटी में बादल फटने से आई बाढ़ से करपट गांव खतरे की जद में आ गया। प्रशासन ने गांव के करीब दो दर्जन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया है।
शिमला जिले के कुल्लू से सटे सीमावर्ती रामपुर उपमंडल के पंद्रह बीस क्षेत्र की नंटी खड्ड में पहाड़ों पर बादल फटने से आई बाढ़ में चार पुल, दो मकान, पांच दुकानें, दो शेड, सेब के बगीचे और कृषि भूमि बह गई। सात मकानों, पांच दुकानों, सात शेड और एक छोटे बिजली प्रोजेक्ट को भी नुकसान हुआ है। खड्ड में एक एंबुलेंस और एचआरटीसी की बस फंस गई है, जबकि तीन पंचायतों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस बीच भारी वर्षा के मददेनजर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों के नजदीक न जाएं और अनावश्यक यात्रा से बचें। मौसम विभाग ने आगमी 19 अगस्त तक भारी वर्षा की चेतावनी दी है।
दो नेशनल हाईवे सहित 325 सड़कें बंद
भाषा की रिपोर्ट के अनुसा, हिमाचल प्रदेश में बारिश के कारण दो नेशनल हाईवे सहित कुल 325 सड़कें यातायात के लिए बंद करनी पड़ी हैं। स्थानीय मौसम विभाग ने गुरुवार को राज्य के तीन जिलों चंबा, कांगड़ा और मंडी में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के मद्देनजर ‘ऑरेंज अलर्ट’जारी किया है। विभाग ने शुक्रवार से रविवार तक के लिए चार से छह जिलों के अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए ‘येलो अलर्ट’जारी किया है।
सेना मदद के काम में जुटी
वहीं, भारतीय सेना की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, हिमाचल में कल शाम किन्नौर के होजिस लुंगपा नाला में अचानक बाढ़ आ गई। यह स्थल गंगथांग ब्रालम की ओर सीपीडब्ल्यूडी के अधीन एक सक्रिय सड़क निर्माण क्षेत्र था। ऋषि डोगरी घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में बादल फटने से आई बाढ़ ने सतलुज नदी पर बने पुल को अपनी चपेट में ले लिया और एक व्यक्ति घायल हो गया। भारतीय सेना ने इस अभियान में सहायता के लिए अपने आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया, जिसमें लॉजिस्टिक्स ड्रोन हाई एल्टीट्यूड प्रणाली भी शामिल थी, जो बाढ़ के पानी में खाने-पीने की चीजें, नारियल पानी जैसी जरूरी चीजें पहुंचाने में मदद कर रही थी ताकि रातभर फंसे लोगों को सहारा मिल सके। उन्होंने फंसे हुए नागरिकों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया और घायल व्यक्ति को रिकांग पियो के क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचाया।





