भोपाल। एक तरफ राज्य सरकार के तमाम विभाग बजट का रोना पूरे साल रोते रहे हैं, दूसरी तरफ कई विभाग सैकड़ों करोड़ की राशि खर्च करने में असफल रहे हैं। हालात यह बन चुके हैं कि अब इस वर्ष के बजट का करीब 11 फीसदी यानि करीब 15 हजार करोड़ रुपए लैप्स होने वाले हैं। इनमें भी स्वंय वित्त विभाग के अलावा कृषि कल्याण और स्कूल शिक्षा विभाग की राशि सर्वाधिक है। यही नहीं इनके अलावा करीब डेढ़ दर्जन विभाग ऐसे हैं, जिनमें कई सैकड़ों करोड़ की राशि लैप्स होना तय हो चुका है।
यह राशि खर्च होना अब असंभव है, इसकी वजह है इस वित्त वर्ष की समाप्ति का आज आखिरी दिन है। यही नहीं वित्त विभाग भी पहले ही 26 मार्च तक बिल लेने का सर्कुलर भी पहले ही जारी कर चुका है। ऐसे में जब ट्रेजरी में बिल ही स्वीकार नहीं किए जाएंगे तब राशि का भुगतान ही नहीं किया जा सकेगा।खास बात यह है कि जो राशि लैप्स होने जा रही है उसमें से अधिकांश राशि विकास कार्य से संबंधित है। इस मामले में अंतिम दिनों में वित्त विभाग की नींद खुली और उसने आनन फानन में सभी विभागों को तीसरे क्वार्टर में दी गई राशि अंतिम क्वार्टर में खर्च करने की अनुमति प्रदान की। इस राशि को विकास कार्यों और आधारभूत ढांचे पर खर्च करना था। दरअसल चालू वित्त वर्ष के शुरूआती चार माह में कोरोना की वजह से राज्य सरकार की आय में करीब 40 से 50 फीसदी राजस्व का नुकसान हुआ था। यही नहीं इस अवधि में प्रदेश सरकार को केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और जीएसटी की मद से भी कम राशि मिली। जिसकी वजह से विभागों को देरी से राशि मिल सकी। बाद के महिनों में सरकार की आय में वृद्धि होने पर विभागों को पर्याप्त राशि का आवंटन किया गया। यह बात अलग है कि इस मामले में अफसरशाही का रुख लापरवाह भरा रहा, जिसकी वजह से इस तरह की स्थिति बनी है।
इस वजह से बनी यह स्थिति
1. नई सड़कों के निर्माण की जगह सिर्फ पुरानी सड़कों की मरम्मत की गई।
2. बांधों और नहर के लिए राशि स्वीकृत नहीं की गई ।
3. अधिकांश कर्मचारियों को भी नहीं मिली एरियर की राशि
एरियर के बिलों में तकनीकी त्रुटि
राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को होली पर्व के पहले एरियर की राशि के भुगतान के आदेश दिए गए थे , लेकिन इसके लिए जो बिल विभागों द्वारा ट्रेजरी भेजे गए उनमें तकनीकी त्रुटियां निकली, जिसकी वजह से यह राशि कर्मचारियों के खातों में नहीं जा सकी है। यह राशि एरियर की बकाया 75 फीसदी राशि है। इस रवैये को देखते हुए राज्य सरकार को नए सिरे से एरियर की राशि 31 मार्च 2021 तक सभी कर्मचारियों के खाते में पहुंचाए जाने के निर्देश देने पड़े हैं।
योजना मद की राशि खर्च करने के निर्देश
राशि लैप्स होने के आसार बनने के बाद सरकार को विभागों से योजना व्यय के तहत आवंटित बजट राशि को खर्च करने के भी निर्देश देने पड़े हैं। इसकी वजह 31 मार्च को प्रदेश पर कर्ज की राशि 2 लाख 9 हजार करोड़ रुपए हो जाएगी। नए वित्त वर्ष 2021-22 में राज्य सरकार अपने खर्च चलाने के लिए 49 हजार करोड़ रुपए की राशि का कर्ज ले सकती है। इस वजह से बजट की 11 फीसदी राशि लैप्स हो जाने के कारण सरकार की चिंता बढ़ी है।
किस विभाग का कितना हो सकता है बजट लैप्स
विभाग लैप्स होने वाली राशि
जेल 40 करोड़ रु.
वित्त 1811 करोड़ रु.
भू-राजस्व 190 करोड़ रु.
औद्योगिक नीति 31 करोड़ रु.
ऊर्जा 400 करोड़ रु.
जीएडी 60 करोड़ रुपए
गृह 550 करोड़ रु.
किसान कल्याण 1000 करोड़ रु.
पशुपालन 81 करोड़ रु.
लोक निर्माण 650 करोड़ रु.
स्कूल शिक्षा 1700 करोड़ रु.
ग्रामीण विकास 350 करोड़ रु.
आदिम जाति 750 करोड़ रु.
नर्मदा घाटी 380 करोड़ रु.
पंचायत 250 करोड़ रु.
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी 50 करोड़ रु.
जल संसाधन 450 करोड़ रु.
नगरीय विकास 200 करोड़ रु.
आज हो जाएगी बजट की 11 फीसद राशि लैप्स





