अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

लोग महामारी से लड़ने के लिए सहयोगी बनना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन कर रहा अनदेखा….शिशुकुंज से लेकर लेडी हलिमा अस्पताल तक लोग बनाना चाहते हैं कोविड हॉस्पिटल ,प्रशासन अनुमति देने को तैयार नहीं

Share

इंदौर।  कोरोना महामारी बन कर पूरे देश में कोहराम मचा रही है । इंदौर भी इससे अछूता नहीं है । इंदौर में कोरोना संक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सभी अस्पतालों में बेड पूरी तरह से भर चुके हैं। ऐसे में मरीजों को समय पर बेड और उपचार नहीं मिलने से उनकी मौतें हो रही हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और नेता मानने को तैयार नहीं हैं। इसका खामियाजा मरीजों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है। 


प्रशासन और शासन की जिम्मेदारी है के लोगों की जान की रक्षा करें । लेकिन इस मामले में शासन निकम्मा साबित हुआ है ।  न अस्पताल की व्यवस्था हो पा रही है, ना दवाई मिल रही है ,ना इंजेक्शन मिल रहे हैं, ना श्मशान में जगह मिल रही है  । शायद इतिहास का यह सबसे काला अध्याय है कि मरने के बाद ही लोगों को अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है ।कोरोना महामारी के लिए जब अस्पताल में जगह नहीं है तो फिर होम क्वॉरेंटाइन और घर में ही इलाज सबसे अच्छा तरीका है ।फिर भी प्रशासन ने वाहवाही लूटने के लिए  एक तरफ राधा स्वामी सत्संग परिसर में सैकड़ों बैड का कोविड सेंटर बनाया गया है  । दूसरी तरफ जो लोग उपचार की व्यवस्था कर सकते हैं , उन लोगों से निवेदन और आवेदन को  प्रशासन अनसुना कर रहा है । एक मामला एम वाय अस्पताल की तीनो मंजिलों में सैकडो बैड  है ,लेकिन उसे कोविड हॉस्पिटल नहीं बनाया गया है  इसी तरह से कनाडिया रोड के शिशुकुंज हास्पिटल को भी  कोविड हॉस्पिटल के रूप में चालू नहीं किया जा रहा है । वहां पर 300 मरीजों के उपचार की व्यवस्था हो सकती है । इसी तरह से खजराना की हेल्थ कमेटी जो बनी है जिसमें बड़ी संख्या में राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता है, पत्रकार है और इलाका के वरिष्ठ नागरिक हैं ।यह कमेटी इलाके के बीमार लोगों के उपचार की हर संभव कोशिश कर रही है । ऑक्सीजन ,इंजेक्शन  से लेकर दवा और अस्पतालों में बैड दिलवाने के लिए  भी प्रयास किए जा रहे हैं । कमेटी के प्रयासों की  पूरे इलाके में प्रशंसा हो रही है  और इसी  को आगे बढ़ाने के लिए कमेटी ने  इस इलाके के बंद पड़े लेडी हलीमा हॉस्पिटल  को कोविड हॉस्पिटल के रूप में विकसित करने  तथा वहां पर उपचार की व्यवस्था  करने की मंशा जताते हुए  जिला प्रशासन से  अनुमति मांगी है ,लेकिन प्रशासन अनुमति देने को तैयार नहीं है इस अस्पताल में 20 बिस्तरों की व्यवस्था है  साथ में ऑक्सीजन  हॉस्पिटल के उपकारण, डाक्टर नर्स आदि की सभी व्यवस्था  है।     शासन एक तरफ मैदान में कोविड सेन्टर बनाने की कोशिश में लगा हुआ है और दूसरी तरफ जो अस्पताल पूरी तरह से सज्जित है जिसमें आक्सिजन की लाइनें लगी हुई है, अस्पताल में लगने वाले उपकरण हैं ,स्टाफ है, उन अस्पतालों को कोविड उपचार के लिए अनुमति नहीं दे रहा है । प्रशासन को इन सब बातों का जवाब देना चाहिए कि आखिर वह इस तरह का भेदभाव क्यों कर रहा है । प्रशासन और शासन की इन हरकतों से एक बात साफ हो रही है कि जीस प्रशासन को निष्पक्ष होना चाहिए , इंसान इंसान में भेद नहीं करना चाहिए वह  राजनीतिक दलों का सिपहसालार जैसा व्यवहार कर रहा है और वर्तमान सत्तारूढ़ दल के कहने पर लोगों को अनुमतियां दे रहा है। प्रशासन। का इस तरह का व्यवहार निश्चित रूप से जनविरोधी है ।
इस समय शासन का एक ही मकसद होना चाहिए कि किसी भी तरह से लोगों की जान बचाई जाए। महामारी से लड़ने के लिए जो भी  सहयोग का हाथ बढा रहा है उसका सहयोग लेकर इस महामारी  का मुकाबला किया जाए  ताकि हम शहर के हर इंसान कीजीवन रक्षा कर सके। 

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें