सोमवार को राजाभोज विमानतल पर अचानक से अजीब सी स्थिति निर्मित हो गई। यात्रियों को कुछ समय में नहीं आ रहा था कि अचानक से ऐसा क्या हुआ कि राज्य और केंद्र सरकार की सभी प्रमुख सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी पूरी टीम के साथ रनवे की तरफ दौड़ते हुए जा रहे हैं। बाद में पता चला कि यह सुरक्षा एजेंसियों की रिस्पांस टाइम को चेक करने के लिए विमान हाईजैक की मॉक ड्रिल थी।
विमान अपहरण की सूचना के बाद एरोड्रम कमेटी तत्काल एक्शन में आई और मध्य प्रदेश की गृह सचिव आईपीएस कृष्णावेणी देशावतु के अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाई गई और उनके निर्देशन में ही विमानतल की सुरक्षा के साथ एनएसजी के मेजर सहित सुरक्षा बल सक्रिय हुए और चंद मिनटों में हाईजैक किए गए विमान के चारों तरफ घेरा बनाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया।
सोमवार को जैसे ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर को विमान हाईजैक की सूचना मिली। सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारी और अमला अचानक से सक्रिय हो गया। ऐसा लग रहा जैसे सच में किसी विमान का अपहरण किया जा रहा हो। हालांकि, यह एक वार्षिक एंटी हाईजैक मॉक ड्रिल थी, लेकिन सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में बेहतर तालमेल दिखा। यह मॉल ड्रिल सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ स्थानीय प्रशासन के रिस्पांस टाइम को देखने के लिए किया गया था।

एजेंसियों की क्षमता को परखा
सभी एजेंसियों की रिस्पांस टाइम और रियल टाइम डिसीजन लेने की क्षमता को भी परखा गया। इसके साथ राज्य और केंद्र सरकार से संबंधित सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बेहतर तालमेल का भी नजारा देखने को मिला। इस मॉक ड्रिल का मकसद ही था कि किसी आपात स्थिति में भोपाल में कैसे निपटा जाएगा। सूचना के बाद सभी एजेंसियों समन्वित तरीके से एक-दूसरे के बेहतर समन्वय के साथ स्थिति को पूरी तरह से संभाला और क्विक रिस्पांस के लिए भी सभी एजेंसियां तत्पर दिखीं।
ऑपरेशन किया लीड
प्रदेश की गृह सचिव कृष्णावेणी देशावतु भी विमान तल पर मौजूद रहीं और पूरे ऑपरेशन को लीड कर रही थीं। उनके साथ एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी भी मौजूद रहे। फील्ड पर एनएसजी कमांडो मेजर विवेक वशिष्ठ, सीआईएसएफ कमांडेंट एयरपोर्ट सुरक्षा अतुल भनोत्रा, एडीएम अंकुर मेशराम और डीसीपी पंकज श्रीवास्तव के साथ सेना और इंटेलीजेंस ब्यूरो के अधिकारी भी ऑपरेशन में शामिल रहे।





