अमेरिका में 11 लाख से ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। इसमें लगभग 60 फीसदी भारतीय छात्र होते हैं। इन छात्रों द्वारा लाखों रुपए की फीस अमेरिका के शिक्षण संस्थानों को दी जाती है। विदेशी छात्रों की फीस से अमेरिका के शिक्षण संस्थानों को लाखों करोड़ों रुपए प्रतिवषर् की कमाई होती है।
डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, उन्होंने विदेशियों के बारे में जो राय बनाई है। उसके कारण अमेरिका का शैक्षणिक जगत समाप्त होने की कगार पर पहुंच रहा है। अमेरिका के शिक्षण संस्थानों के ऊपर डोनाल्ड ट्रंप की टेडी नजर है। ट्रम्प के कारण अमेरिका को आगे चलकर बहुत बड़ा नुकसान होने वाला है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का सारी दुनिया में नाम है।
यहां पर एडमिशन लेने के लिए दुनिया के सभी देशों से बच्चे यहां आकर पढ़ना चाहते हैं। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के प्रवेश पर रोक लगा दी। हालांकि अमेरिका के न्यायालय ने ट्रंप के आदेश को रद्द कर दिया है, लेकिन यह खतरा अभी टला नहीं है। ट्रंप सरकार का रवैया विदेशियों के लिए बहुत आक्रामक और अपमानजनक है। ट्रंप के रूख और फैसलों को देखते हुए, अब सारी दुनिया के देशों से अमेरिका में पढ़ने के लिए जो छात्र आते थे।
उनकी संख्या में इस साल भारी गिरावट आई है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी छात्रों के साथ जिस तरह की प्रताड़ना की जा रही है। छात्रों को अनाप-शनाप आरोपों में अमेरिका से निष्कासित किया जा रहा है। उसकी बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया भारत सहित दुनिया के देशों में हुई है। ट्रंप सरकार का कहना है, अमेरिकी के विश्वविद्यालयों में यहूदी विरोधी नीतियां चलाई जा रही हैं। ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई को अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अमेरिका में यह आजादी अब खत्म होती दिखने लगी है।
अमेरिका में सबसे ज्यादा छात्र भारत से पढ़ने के लिए जाते हैं। अमेरिका की जितनी भी यूनिवर्सिटी हैं, वह भारतीय विदेशी छात्रों के बल पर चल रही हैं। कई विश्वविद्यालय में 24 फ़ीसदी से लेकर 51 फीसदी तक विदेशी छात्र महंगी फीस देकर पढ़ रहे है। यह विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों के बल पर चल रहे हैं। अमेरिकी छात्रों की तुलना में विदेशी छात्रों से ज्यादा फीस वसूल की जाती है।
पिछले 4 महीने में ट्रंप प्रशासन द्वारा जिस तरह से शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया गया है। विदेशी छात्रों पर प्रताड़ना की कार्रवाई की जा रही है। उसको लेकर अमेरिका की साख दुनिया भर के देशों में अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा खराब हुई है। यदि यही हाल रहा तो अमेरिका के विश्वविद्यालय आर्थिक संकट के कारण स्वयं बंद हो जाएंगे। अमेरिकी सरकार ने विश्वविद्यालयों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय का तो पूरा अनुदान ही बंद कर दिया है। अमेरिका के सारे विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों के बल पर चल रहे थे। यदि विदेशी छात्र नहीं आएंगे, तो अमेरिका के शिक्षण संस्थान बंद होंगे।
इसके साथ-साथ अमेरिका के शिक्षण संस्थानों को लगभग 3.65 लाख करोड रुपए जो फीस के रूप में एकत्रित होते थे। इससे दो गुना ज्यादा राशि विदेशी छात्रों द्वारा अमेरिका में खर्च की जाती थी, अमेरिका को बड़ा आर्थिक नुकसान होना तय माना जा रहा है। अमेरिका इस समय सबसे बड़े कर्ज के दबाव से गुजर रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही हाथों से अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे समय पर भारत में शिक्षण संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार को स्वायता देने की जरूरत है।
भारत में पढ़ाई और रिसर्च के लिये यदि अच्छे संस्थान विकसित किए जाते हैं। ऐसी दशा में भारतीय छात्रों को अमेरिका और यूरोप के देशों में इतनी बड़ी संख्या में पढ़ने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। भारत के लिए एक अवसर है, अमेरिका में अभी जो चल रहा है, उसका लाभ भारत की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये किया जाये। ताकि भारतीय बच्चों का शिक्षा के लिये विदेश जाना कम हो। इससे भारत को विदेशी मुद्रा की बचत होगी। वहीं भारतीय अर्थ- व्यवस्था बेहतर बनाया जा सकेगा।





