वित्त मंत्रालय ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) से गोपनीय जीएसटी फाइलिंग और ई-वे बिल की बिक्री से जुड़े डेटा लीक घोटाले को लेकर चिंता जताई है. फिलहाल इन शिकायतों की जांच शुरू हो गई है. सीए एसोसिएशन की ओर से प्राप्त ज्ञापन में डेटा लीक को एक बड़ा घोटाला बताया गया है. इस बीच CBIC को सचेत करते हुए सूत्रों ने कहा कि नॉर्थ ब्लॉक आरोपों की तेजी से जांच कर रहा है.
वित्त मंत्रालय ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) से गोपनीय जीएसटी फाइलिंग और ई-वे बिल की बिक्री से जुड़े डेटा लीक घोटाले को लेकर चिंता जताई है. फिलहाल इन शिकायतों की जांच शुरू हो गई है. सीए एसोसिएशन की ओर से प्राप्त ज्ञापन में डेटा लीक को एक बड़ा घोटाला बताया गया है. इस बीच CBIC को सचेत करते हुए सूत्रों ने कहा कि नॉर्थ ब्लॉक आरोपों की तेजी से जांच कर रहा है.
इस ज्ञापन में दावा किया गया है कि इस घोटाले को “डेटा सॉल्यूशन” नाम के तहत एक गैंग ऑपरेट कर रहा है. इसके ऑपरेशनल हब्स दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा बन रहे हैं. इस लीक को सबसे पहले सूरत चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन (CAAS) ने इस हफ्ते की शुरूआत में वित्त मंत्री को लिखे पत्र में उजागर किया था.
इतने रुपए में बिक रहा डेटा
घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, “ज्ञापन में कहा गया है कि गोपनीय टैक्सपेयर डेटा को पैकेज बेस्ड सिस्टम के तहत अवैध रूप से ब्लैक मार्केट में बेचा जा रहा है. इसके रेट्स डिटेल के आधार पर 5,000 से लेकर 25,000 रुपए तक हैं. इस गोपनीय टैक्सपेयर डेटा में GSTR-1, जीएसटीआर-2बी, जीएसटीआर-3बी और ई-वे बिल शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि 3 महीने और 6 महीने के डेटा बंडलों की अवैध बिक्री से बेईमान व्यापारियों को कॉम्पिटिटर्स के कामों की नकल करने में मदद मिल रही है. इससे साफ-सुथरे व्यापार और बिजनेस एथिक्स को नुकसान पहुंच रहा है.
इन आरोपों की जांच कर रहे सूत्रों ने बताया कि सीएएएस की ओर से रिव्यु किए गए डाक्यूमेंट्स के अनुसार, बेसिक GSTR-1 डिटेल्स 8,000 से 10,000 रुपए में ऑफर की जा रही हैं. जबकि बड़ा पैकेज 3 महीने के लिए 15,000 रुपए में बेचा जा रहा है. इसमें 2बी, 3बी और ई-वे बिल डेटा शामिल हैं. कुछ मामलों में, क्लाइंट्स से ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, एचएसएन कोड और बायर-सप्लायर डिटेल्स सहित डिटेल्ड प्रोफाइल के लिए 25,000 रुपए तक का चार्ज लिया गया.
एनफोर्समेंट एजेंसियों की एंट्री
एसोसिएशन का दावा है कि उन्हें ब्रोकरों और ग्राहकों के बीच लीक हुई व्हाट्सएप चैट मिली है, जिसमें से एक में सामान्य घरेलू डेटा और क्लाइंट्स की खास मांगों के अनुसार एडवांस बंडलों की उपलब्धता के बारे में बात की गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस घटना के काफी खतरनाक परिणाम हो सकते हैं.
मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, “इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया गया है. CBIC को लीक के सोर्स की जांच करने और इस रैकेट को बंद करने के लिए एनफोर्समेंट एजेंसियों के साथ कोर्डिनेट करने को कहा गया है.” इस घटना ने जीएसटी नेटवर्क (GSTN) के साइबरसिक्योरिटी फ्रेमवर्क पर भी नए सिरे से जांच शुरू कर दी है. एनालिस्ट्स का कहना है कि यह उल्लंघन सरकारी डेटा सिस्टम के बड़े स्तर पर ऑडिट की जरूरत को उजागर करता है.





