ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण करने वाले विभागों की मशक्कत कम होने वाली है। वजह है मनरेगा की ओर से तैयार सिपरी सॉफ्टवेयर। सिपरी यानी सॉफ्टवेयर फॉर आइडेंटिफिकेशन एंड प्लानिंग ऑफ रुरल इंफ्रास्ट्रक्चर। इसके जरिए ग्रामीण अधोसंरचना विकसित करने में विभागों को काफी मदद मिलेगी। खासतौर पर सड़क निर्माण में और उसकी मॉनिटरिंग सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी कीजा सकेगी।
यह काम होंगे
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती विभागों को जमीन के चिह्नांकन में करनी पड़ती है। इसमें अमला और समय लगता है। सिपरी सॉफ्टवेयर के जरिए सैटेलाइट से सड़कों का चयन किया जाएगा। स्पष्ट बताया जाएगा कि कितनी जमीन सरकारी है और कितनी निजी। गुणवत्ता भी पता चलेगी।
इसरो की मदद
मनरेगा, राज्य रोजगार गारंटी परिषद, एमपीएसईडीसी और इसरो की मदद से सिपरी को तैयार किया गया है। उद्देश्य उपयुक्त स्थलों की सटीक पहचान कर गुणवत्तापूर्ण संरचनाओं का निर्माण करना है। मनरेगा आयुक्त अवि प्रसाद के अनुसार सिपरी सॉफ्टवेयर ग्रामीण अधोसरंचना के निर्माण में सबसे ज्यादा मददगार साबित होगा।





