~ डॉ. विकास मानव
नमस्कार बच्चों!
पहचानो मुझे, मिलो मुझ से. मैं वही हूँ जिसके बारे में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था – “यह भारत का स्विट्जरलैंड बनेगा।”
मैं हूँ सोनभद्र. उत्तर प्रदेश का वो अनमोल रत्न, जो प्रकृति, इतिहास और रहस्यों से भरा हुआ है। जानते हो, यहां मेरे पड़ोस (मिर्जापुर) में भगवान कृष्ण की बहन का शक्तिपीठ है : विंध्यवासिनी/अष्टभुजा मंदिर. कृष्ण की वही बहन जो वध करने के लिए दीवार पर पटकते समय कंस के हाथों से निकल गई थी और आकाश-गमन करते हुए, उससे बोली थी : मूर्ख तुझे मारने वाला जन्म ले चुका है.

चंद्रकांता सीरियल तुमने देखा होगा. यह देवकीनंदन खत्री के उपन्यास ‘चंद्रकांता संतति’ सीरीज पर आधारित है. यह उपन्यास इतना अधिक लोकप्रिय हुआ कि इसको पढ़ने के अनगिनत गैर-हिंदीभाषियों ने हिंदी सीखी. जानते हो, यह पूरा कथाक्रम मेरे ही अंचल में, मेरे ही परिवेश में लिखा गया है. तुम पढ़ना कई खंडों वाला यह उपन्यास. किसी अलग दुनिया में नहीं पहुँच गए, तो कहना.
मैं केवल एक नक्शे का नाम नहीं, बल्कि हजारों कहानियों की ज़मीन हूँ। तो चलो, आज मैं तुम्हें अपने बारे में खुद बताता हूँ – मेरी सुंदरता, मेरा गौरव, मेरा इतिहास और मेरे रहस्य.
*पहाड़ियों की गोद में बसा मेरा घर*
मैं विंध्य और कैमूर की पहाड़ियों की गोद में बसा हूँ। मेरी हवा में ठंडक है, मेरी वादियों में शांति है, और मेरी मिट्टी में इतिहास की खुशबू है। जब 1954 में पंडित नेहरू चुर्क सीमेंट फैक्ट्री के उद्घाटन के लिए मेरे पास आए, तो उन्होंने मेरे पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर चौंकते हुए कहा – “यह भारत का स्विट्जरलैंड बनेगा।”
क्या तुम सोच सकते हो कि मेरे छोटे से गाँव की सुंदरता ने देश के प्रधानमंत्री को भी मंत्रमुग्ध कर दिया था?
*सोन नदी मेरी जीवनरेखा*
मेरे दिल के पास से बहती है एक अद्भुत नदी – सोन नदी। सुबह जब सूरज की किरणें सोन नदी के पानी से मिलती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे सोने की चादर बिछा दी गई हो।
यूपी, एमपी, झारखंड और छत्तीसगढ़ से लोग यहाँ छुट्टियाँ बिताने आते हैं, और इस दृश्य को अपनी आँखों और कैमरों में कैद करते हैं।
*सौ मन सोना, कोना-कोना*
तुमने कहावत सुनी है – “सौ मन सोना, कोना-कोना?”
यह कहावत मेरे ही एक हिस्से सोन पहाड़ी से जुड़ी है। मेरे एक गाँव अगोरी में एक किला है – अगोरी किला, जो आज भी अपनी वीरता की कहानी खुद कहता है।
711 ईस्वी में यहाँ बल शाह नामक खरवार आदिवासी राजा का शासन था। जब दुश्मन हमला करने आए, तो उन्होंने अपने 4000 किलो सोने का खज़ाना इस पहाड़ी के कोने-कोने में छुपा दिया और अदृश्य हो गए।
आज भी लोगों को विश्वास है कि वह खजाना पहाड़ियों में कहीं छिपा है।
*सलखन फॉसिल्स पार्क मेरी प्राचीन धरोहर*
मेरे भीतर एक और अनमोल खज़ाना है – सलखन फॉसिल्स पार्क।
यहाँ 150 करोड़ साल पुराने जीवों के अवशेष (फॉसिल्स) आज भी देखे जा सकते हैं। दुनिया भर के वैज्ञानिक यहाँ आते हैं, क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा फॉसिल्स पार्क है – अमेरिका के येलोस्टोन पार्क से भी बड़ा!
सोचो ज़रा – इतने पुराने जीवों की निशानियाँ मेरे पास हैं। मैं केवल सुंदर नहीं, बुद्धिमान भी हूँ!
*रिहंद बांध मेरी ऊर्जा शक्ति*
मैं तुम्हें ले चलता हूँ अपने एक और अनोखे स्थान पर – रिहंद बांध, जो मेरे पिपरी क्षेत्र में है।
यहाँ से बिजली बनाई जाती है। यह बांध 1962 में बना और आज भी यह ऊर्जा का केंद्र है। जब बारिश में इसके गेट खुले होते हैं, तो हजारों लोग इसे देखने आते हैं। आसमान से गिरते झरनों की तरह पानी बहता है और उसकी आवाज़ और सुंदरता सबका मन मोह लेती है।
*लोरिक-मंजरी की प्रेमकथा- भूमि*
अगर तुम को प्रेम कहानियाँ पसंद हैं, तो यहां मेरे घर आकर सुनो मेरी सबसे प्यारी प्रेमगाथा वीर लोरिक और मंजरी की।
राबर्ट्सगंज से थोड़ी दूर मारकुंडी घाटी में एक बड़ा पत्थर है, जो लोरिक की तलवार से दो भागों में कट गया था। यह पत्थर आज भी लोगों को बताता है कि सच्चा प्रेम अमर होता है।
*खोड़वा पहाड़ी ओम की शक्ति*
मेरी एक ऊँची जगह है खोड़वा पहाड़ी, जो लगभग 1850 फीट ऊँची है। वहाँ एक विशाल ओम पर्वत है।
क्या तुम जानते हो कि ओम से सृष्टि की शुरुआत मानी जाती है?
यहाँ आकर तुम समझ सकते हैं कि कैसे प्राकृतिक रूप में ओम की आकृति बनी हुई है। यह जगह शांति, साधना और आत्मा की आवाज़ से भरी हुई है।
*मैं सुंदर ही नहीं, समृद्ध भी*
मेरे पास केवल सुंदरता और इतिहास ही नहीं, बल्कि संपदा भी है.
बिजली उत्पादन के बड़े-बड़े पावर प्लांट, हरे-भरे जंगल, खनिजों की खानें, और आदिवासी परंपराओं का अनोखा संगम।
मेरे गाँवों में आज भी लोकगीत गाए जाते हैं, नृत्य होता है, और त्योहार पूरे दिल से मनाए जाते हैं।
*तुम बच्चों के लिए एक संदेश*
अब जब तुमने मुझे अच्छे से जान लिया है, तो मेरा एक संदेश सुनो :
> “प्यारे बच्चो! जब तुम बड़े बनो, तो आओ मेरे पास। मेरा ख्याल रखो। मेरी पहाड़ियों को काटो नहीं, मेरी नदियों को गंदा मत करो, मेरे जंगलों को बचाओ।
मैं तुम्हारा हूँ – भारत का स्विट्जरलैंड। तुम मेरे भविष्य के रक्षक हो।”





