आज के बड़े इवेंट
देशभर में कई संगठनों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है। इस दौरान करीब 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। उधर, ग्वाटेमाला में भूकंप के कई झटके महसूस किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद नामीबिया के लिए रवाना हुए। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड डील को लेकर नई धमकी दी है।
ट्रंप ने भारत समेत BRICS देशों को दी 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत ब्रिक्स देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अपनी चेतावनी दोहराई। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ब्रिक्स समूह अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने के लिए काम कर रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ब्रिक्स समूह को इन देशों से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ब्रिक्स समूह अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने के लिए काम कर रहा है। अपने नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक के दौरान ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “अगर वे ब्रिक्स में हैं तो उन्हें निश्चित रूप से 10% देना होगा क्योंकि ब्रिक्स की स्थापना हमें नुकसान पहुंचाने, हमारे डॉलर को गिराने के लिए की गई थी।” ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित 11 देशों वाले ब्रिक्स ब्लॉक ने ट्रंप की टैरिफ नीतियों की आलोचना की है और उन्हें विश्व व्यापार संगठन के नियमों के साथ असंगत बताया है। ब्रिक्स देशों का सामूहिक रूप से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 40% और दुनिया की लगभग आधी आबादी का योगदान है।
ट्रंप ने डॉलर को बताया ‘राजा’
ट्रंप का प्रशासन वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर जोर दे रहा है, जिसमें 1 अगस्त से उन देशों के लिए नए टैरिफ लागू होने वाले हैं, जिन्होंने अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं किया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती पर अपना रुख दोहराते हुए ट्रंप ने कहा, “डॉलर राजा है, हम इसे ऐसे ही रखेंगे। मैं बस इतना कह रहा हूं कि अगर लोग इसे चुनौती देना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें बड़ी कीमत चुकानी होगी और मुझे नहीं लगता कि उनमें से कोई भी उस कीमत को चुकाने को तैयार है।”
ट्रंप ने भारत को छूट देने से किया इनकार
आगामी व्यापार शुल्कों पर ट्रंप ने कहा, “यह हमेशा 1 अगस्त (समय सीमा) रहा है…अन्य देशों द्वारा टैरिफ ऐसे स्तरों पर लगाए जाते हैं जो हास्यास्पद हैं। मैंने उन अन्य देशों को बुलाया, और अब हर कोई हमें सब कुछ देने को तैयार है…सालों तक, उन्होंने हमें लूटा और हमारे पास ऐसा कोई राष्ट्रपति नहीं था जो इसे समझता हो…।” जब भारत की स्थिति के बारे में पूछा गया, तो एक महत्वपूर्ण अमेरिकी व्यापार भागीदार और ब्रिक्स सदस्य के रूप में इसकी स्थिति को देखते हुए, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि कोई अपवाद नहीं बनाया जाएगा।
ट्रंप बोले- BRICS देश देंगे 10% अतिरिक्त टैरिफ
ट्रंप ने कहा, “वे ब्रिक्स के सदस्य हैं, वे 10% टैरिफ का भुगतान कर सकते हैं। मैंने यह बात लगभग एक साल पहले कही थी और यह काफी हद तक टूट गया। मुझे लगा कि यह काफी हद तक टूट गया है। हम किसी भी समय मानक नहीं खोएंगे। यदि आपके पास एक स्मार्ट राष्ट्रपति है तो आप कभी भी मानक नहीं खोएंगे।” यह बयान अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते के करीब पहुंचने के तुरंत बाद आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देश “सौदा करने के करीब हैं।”
भारत के साथ व्यापार समझौता करेगा अमेरिका
इस महीने के अंत में वाशिंगटन डीसी में एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान या जब ट्रंप भारत का दौरा करेंगे, तब अंतिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को छोड़कर, जल्द ही एक अंतरिम या लघु व्यापार समझौते की घोषणा की जा सकती है। अमेरिका कृषि उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों और औद्योगिक वस्तुओं पर कम शुल्क लगाने पर जोर दे रहा है, जबकि भारत कपड़ा और परिधान जैसे श्रम-गहन निर्यात के लिए तरजीही पहुंच चाहता है। इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 बिलियन तक बढ़ाना और रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में सहयोग बढ़ाना है।
एक्सटेंडेड रेंज एंटी सबमरीन रॉकेट का यूजर ट्रायल सफल
भारतीय नौसेना के लिए अच्छी खबर है। डीआरडीओ की ओर से बनाया गया एक्सटेंडेड रेंज एंटी सबमरीन रॉकेट (ERASR) का परीक्षण सफल रहा। इस रॉकेट को INS कवरत्ती नामक जहाज से लॉन्च किया गया।
भारत के दुश्मन देशों के लिए बुरी खबर है। दरअसल, भारत द्वारा एक्सटेंडेड रेंज एंटी सबमरीन रॉकेट ( ERASR ) का यूजर ट्रायल सफल हो गया है। इस टेस्टिंग के बाद पाकिस्तान और चीन जैसे देशों की टेंशन बढ़ सकती है। इंडियन नेवी के शिप INS कवरत्ती से इसे लॉन्च किया गया। इस एंटी सबमरीन रॉकेट को डीआरडीओ ने नेवी के स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर के लिए डिजाइन और विकसित किया है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ERASR पूरी तरह से स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट है जिसे सबमरीन से लड़ने के लिए बनाया गया है और यह इंडियन नेवी के शिप पर लगे रॉकेट लॉन्चर से दागा जाता है। इसमें दो रॉकेट मोटर लगे हैं जिससे यह अलग-अलग दूरी के लक्ष्यों को सटीकता से भेद सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मिनिमम शॉर्ट रेंज जो कि 500 मीटर है और मैक्सिमम लॉन्ग रेंज 8900 मीटर तक किसी भी दुश्मन की सबमरीन को ढेर कर सकता है।
टाइम फ्यूज का इस्तेमाल किया गया
इसमें स्वदेशी रूप से विकसित इलेक्ट्रॉनिक टाइम फ्यूज का इस्तेमाल किया गया है। इस यूजर ट्रायल के दौरान कुल 17 ERASR रॉकेट्स को अलग-अलग दूरी पर सफलतापूर्वक जांचा गया। ट्रायल के सभी मुख्य लक्ष्य जैसे दूरी, फ्यूज की कार्यक्षमता और वॉरहेड की क्षमता को सफलतापूर्वक साबित किया गया। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, नेवी और इस सिस्टम के विकास और परीक्षण में शामिल सभी उद्योगों को बधाई दी है।
दिल्ली के बाद NCR के 5 जिलों में भी पुरानी गाड़ियों को किया जाएगा सीज
पुरानी गाड़ी रखने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अब दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के 5 जिलों में भी पुरानी गाड़ियों को 1 नवंबर 2025 से सीज कर लिया जाएगा। यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की बैठक में हुआ है। यानी, अब आप अगर 1 नवंबर से पुरानी गाड़ी लेकर एनसीआर में घुसते हैं तो गाड़ी सीज कर ली जाएगी। पुरानी गाड़ियों में 15 साल पुराना पेट्रोल वाहन तो 10 साल पुराना डीजल वाहन आएगा।
पुराने वाहन रखने वाले लोगों के लिए एक और बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, अब दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के 5 जिलों में भी पुरानी गाड़ियों को 1 नवंबर 2025 से सीज कर लिया जाएगा। यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की बैठक में हुआ है। यानी, अब आप अगर 1 नवंबर से पुरानी गाड़ी लेकर एनसीआर में घुसते हैं तो गाड़ी सीज कर ली जाएगी। पुरानी गाड़ियों में 15 साल पुराना पेट्रोल वाहन तो 10 साल पुराना डीजल वाहन आएगा।
एनसीआर के इन 5 जिलों में गाड़ी होगी सीज
बता दें कि एनसीआर के गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और सोनीपत में पुरानी गाड़ियों को 1 नवंबर से सीज कर लिया जाएगा। राजधानी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए यह बड़ा फैसला माना जा रहा है। हालांकि, आम आदमी पार्टी बीजेपी सरकार के इस फैसले का खुलकर विरोध कर रही है।
दिल्ली सरकार को भारी विरोध के बाद फैसला वापस लेना पड़ा था
बता दें कि दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2025 से ही इस नियम को लागू कर दिया था। लेकिन भारी विरोध और खामियों के बाद इसे वापस ले लिया गया था। हालांकि, दिल्ली सरकार ने वापस लेने के फैसले को अस्थायी बताया था और कहा था कि यह सिर्फ दिल्ली में ही नहीं, बल्कि एनसीआर में भी लागू होना चाहिए।
पीएम मोदी को मिला ब्राजील का सर्वोच्च सम्मान, जानिए पूरा मामला
ब्राजील ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ के ग्रैंड कॉलर से सम्मानित किया है। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने उन्हें इस सम्मान से सम्मानित किया है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्राजील के सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान का नाम ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ सम्मान है। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने PM मोदी को ये सम्मान दिया है। ये सम्मान भारत और ब्राजील के रिश्तों को मजबूत करने के लिए दिया गया है।
राष्ट्रपति सिल्वा ने कहा कि पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में बहुत मदद की है। दोनों देशों ने मिलकर कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी काम किया है। इसलिए उन्हें ये सम्मान दिया गया है। बता दें कि मई 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के पदभार ग्रहण करने के बाद से यह किसी विदेशी सरकार द्वारा उन्हें दिया गया 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
इससे पहले घाना ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से किया था सम्मानित
बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 3 जुलाई को पश्चिम अफ्रीकी देश घाना के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित किया गया था। भारतीय प्रधानमंत्री को यह सम्मान उन्हें उनकी ‘प्रतिष्ठित राजनीति और प्रभावशाली वैश्विक नेतृत्व’ के लिए दिया गया। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने पीएम मोदी को यह पुरस्कार प्रदान किया था। प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा के प्रथम चरण में घाना पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच बैठक हुई, जिसमें अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
इससे पहले साइप्रस के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इससे पहले 16 जून को साइप्रस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस तृतीय’ से सम्मानित किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा था कि साइप्रस के ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस तृतीय’ सम्मान को प्राप्त करके मैं बहुत खुश हूं। मैं इसे हमारे देशों के बीच की मित्रता को समर्पित करता हूं।
गोपाल खेमका हत्याकांड की गुत्थी सुलगी, पुलिस ने क्या बताया जानिए
बिहार के बड़े व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस राजा नाम के अपराधी को हत्या की सुपारी दी गई थी, उसने मना कर दिया था। बाद में पुलिस मुठभेड़ में राजा मारा गया। पुलिस ने शूटर उमेश यादव और सुपारी देने वाले व्यापारी अशोक साह को गिरफ्तार कर लिया है। जमीन विवाद के चलते अशोक साह ने उमेश से खेमका की हत्या करवाई थी।

बिहार के बड़े व्यापारी गोपाल खेमका की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस राजा नाम के अपराधी को हत्या की सुपारी दी गई थी, उसने मना कर दिया था। बाद में पुलिस मुठभेड़ में राजा मारा गया। पुलिस ने शूटर उमेश यादव और सुपारी देने वाले व्यापारी अशोक साह को गिरफ्तार कर लिया है। जमीन विवाद के चलते अशोक साह ने उमेश से खेमका की हत्या करवाई थी।
पहले राजा को ऑफर दिया गया लेकिन…
पुलिस के अनुसार, अशोक साह ने उमेश यादव से कहा था कि उसे एक शूटर चाहिए जो गोपाल खेमका को मार सके। उमेश यादव ने राजा उर्फ विकास से संपर्क किया और उसे सुपारी देने की बात कही। लेकिन राजा ने बहुत ज्यादा पैसे मांगे। उमेश और अशोक इतने पैसे नहीं देना चाहते थे। इसलिए उमेश ने खुद ही हत्या करने का फैसला किया। वह चाहता था कि सारा पैसा उसे ही मिले।
पुलिस ने बताया कि खेमका की हत्या के बाद उमेश के भागने के रास्ते में लगे CCTV फुटेज को देखा गया। इससे पुलिस उमेश के घर तक पहुंच गई। उमेश ने हत्या की बात मान ली। उसने अशोक साह के बारे में भी बताया। पुलिस को पता चला कि उमेश यादव को पिस्तौल अशोक साह ने ही दी थी। उमेश ने पुलिस को बताया कि राजा को सबसे पहले सुपारी का प्रस्ताव दिया गया था। इसके बाद पुलिस उसे पकड़ने गई। पुलिस का कहना है कि रेड के दौरान राजा ने पुलिस टीम पर गोली चला दी। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। पुलिस के अनुसार, वह शूटर खोजने गया था, लेकिन खुद ही किलर बन गया।
रूस की धोखेबाजी का जीता-जागता सबूत है INS विक्रमादित्य… Su-57 विमान पर पुतिन की बातों का कैसे भरोसा करे भारत?
भारत और रूस के रक्षा संबंध दशकों पुराने हैं। हालिया समय तक भारत के हथियार भंडार पर रूस का कब्जा रहा है। लेकिन समय के साथ रूस के साथ डिफेंस संबंध को लेकर भारत ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी। रूस अभी भारत को अपने अगली पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 के लिए ‘सोर्स कोड’ और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने का वादा कर रहा है। भारत के रक्षा सचिव आरके सिंह ने संकेत दिए हैं कि भारत तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए ‘दोस्त देश’ के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने के लिए गंभीरता दिखा रहा है। जिसके बाद कुछ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि वो ‘दोस्त देश’ रूस हो सकता है। हालांकि हमें इसके बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन अगर वो रूस है, तो क्या भारत को रूस के वादों पर आंख मूंदकर भरोसा करना चाहिए? INS विक्रमादित्य का अनुभव काफी परेशान करने वाला रहा है।

https://d-3355350302694316468.ampproject.net/2505300108000/frame.html
रूस ने भारत को बार बार एसयू-57 का ऑफर दिया है। SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट को मॉस्को दुनिया के सबसे एडवांस फाइटर जेट्स में गिनता है। रूस दावा करता है कि Su-57 एक दो-इंजन वाला मल्टी-रोल स्टेल्थ जेट है, जो सुपरसोनिक स्पीड, एडवांस्ड एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं से लैस है। भारत पहले भी इस जेट में दिलचस्पी दिखा चुका है, लेकिन कुछ तकनीकी और साझेदारी विवादों के चलते बात आगे नहीं बढ़ सकी थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत एक वक्त इस प्रोजेक्ट का हिस्सा था, लेकिन फिर भारत इस जेट की कमजोर क्षमताओं को देखकर प्रोजेक्ट से बाहर निकल गया था। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर भारत फिर से वही प्लेटफॉर्म क्यों खरीदे, जिसे कमजोर बताकर खुद उससे मुंह फेर आया हो?Su-57 पर रूस के वादे, INS विक्रमादित्य पर धोखा!
भारत को एसयू-57 पर कोई करार करने से पहले रूस के साथ INS विक्रमादित्य परियोजना के दौरान हुई परेशानियों के बारे में जरूर सोचना चाहिए, जिसे रूस से हासिल करने में भारत को ना सिर्फ एक दशक से ज्यादा का वक्त लगा, बल्कि प्रोजेक्ट की लागत भी दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई। साल 2004 में भारत ने रूस के पुराने एयरक्राफ्ट कैरियर ‘एडमिरल गोर्शकोव’ को खरीदने और उसे आधुनिक बनाने के लिए सौदा किया। इस प्रोजेक्ट के लिए मूल डील करीब 947 मिलियन डॉलर की थी, लेकिन डिलीवरी 5 साल लेट हुई और लागत बढ़कर 2.35 बिलियन डॉलर तक जा पहुंची। पत्रकार शिव अरूर की इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर भारतीय नौसेना के अधिकारी ने कहा था ‘बहुत परेशान किया।’
45,000 टन वजनी इस एयरक्राफ्ट कैरियर को 16 नवंबर 2013 को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया, जो वादे से लगभग पांच साल बाद की देरी था। इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले भारतीय अधिकारियों और कर्मियों के मुताबिक रूसियों ने हर सवाल का जवाब यही कहकर दिया “एटा सीक्रेट”, यानि ये सीक्रेट है। इस प्रोजेक्ट को लेकर रूस के सेवेरोडविंस्क के ठंडे तटों पर कई साल बिताने वाले भारतीय अधिकारियों के लिए रूस के साथ काम करने का अनुभव काफी ज्यादा खराब था। रूसियों ने इस दौरान टालमटोल की नीति अपनाई थी। वो हर टेक्नोलॉजी के सवाल को टाल देते थे और जब समुद्री परीक्षण चल रहा था, उस दौरान भी रूसी अधिकारियों ने ज्यादा मदद नहीं की। 19,500 मील की ट्रायल यात्रा के दौरान कमोडोर सुरज बेरी को सिर्फ 1,700 मील के लिए ही कमांड दी गई, जबकि वो कमांडिंग ऑफिसर थे। इस दौरान रूसी लगातार अपनी भाषा में बात करते थे, ताकि भारतीय अधिकारी ना समझ में पाएं। भारतीय अधिकारियों के सवाल को स्थानीय रूसी भाषा में जवाब देते थे।
यानि रूस से एसयू-57 का सोर्स कोड देने का वादा बहुत बड़ा छलावा हो सकता है। भारतीय अधिकारियों ने इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें सेवेरोडविंस्क में काफी परेशान किया गया। इसीलिए रूस अगर वास्तव में सोर्स कोड देने के लिए तैयार होता, तो क्या INS विक्रमादित्य की रिफिटिंग प्रक्रिया में भारतीय इंजीनियरों को बार-बार जानकारी मांगनी पड़ती? क्या INS विक्रमादित्य में इस्तेमाल किए गये हजारों किलोमीटर लंबी केबलिंग, रडार या प्रपोल्शन सिस्टम की टेक्नोलॉजी शेयर की गई थी? इसका जवाब है नहीं। यानि यह सब उस स्थिति में हुआ जब यह सिर्फ एक रिफर्बिश्ड युद्धपोत था, कोई अत्याधुनिक फाइटर जेट नहीं। तो फिर रूस हमें एसयू-57 की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा और सोर्स कोड देगा, भला कैसे मान लें?
SU-57 प्रोजेक्ट से बाहर निकल गया था भारत
रूस का Su-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर प्रोग्राम कई सालों से सुर्खियों में रहा है। भारत भी इस प्रोजेक्ट में FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) के तहत साझेदार बनने वाला था। लेकिन 2018 में भारत ने खुद को इस प्रोग्राम से अलग कर लिया। इसके पीछे भारत का मानना था कि इस फाइटर जेट की स्टील्थ क्षमता कमजोर है, एविनोमिक्ल और सेंसर टेक्नोलॉजी भी पांचवीं पीढ़ी के विमानों के मुकाबले कमजोर है, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में रूस काफी बहानेबाजी कर रहा था और इस प्रोजेक्ट के भी INS विक्रमादित्य की तरफ काफी लेट होने की संभावना बन गई थी। इसीलिए अब जबकि रूस एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को भारत के सामने रख रहा है और वादा कर रहा है कि वह “सोर्स कोड” भी देगा, तो सवाल पूछना जरूरी हो जाता है कि जो देश एक युद्धपोत के रिफर्बिशमेंट के दौरान परेशानी पैदा करने से बाज नहीं आया, उससे ऐसे हाई वैल्यू टेक्नोलॉजी की शेयरिंग की उम्मीद करना चाहिए?
इसके अलावा हमें ये भी पूछना चाहिए कि क्या SU-30MKI लड़ाकू विमान, जिसका उत्पादन महाराष्ट्र के नासिक में होता है, क्या रूस ने इसके लिए हमें पूरी तरह से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया है? इसका जवाब है नहीं। नासिक में बनने वाले SU-30MKI की लागत रूस से सीधे खरीदे गये SU-30MKI विमानों के मुकाबले ज्यादा पड़ी है। रूस ने अभी भी इस लड़ाकू विमान के क्रिटिकल कंपोनेंट्स जैसे AL-31F इंजन, रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम भारत को नहीं सौंपे हैं, बल्कि अभी भी इन्हें भारत रूस से खरीदकर लाता है और फिर नासिक में उन्हें असेंबल किया जाता है। SU-30MKI लड़ाकू विमान के लिए अभी भी भारत को सौ फीसदी सोर्स कोड और एंबेडेड सिस्टम की पूरी जानकारी नहीं मिली है, इससे भारत को अपग्रेडेशन और रूस के ऊपर निर्भरता खत्म करने में अभी तक आजादी नहीं मिल पाई है।
ऐसे में भारत को INS विक्रमादित्य और FGFA जैसे अनुभवों से सीखकर भारत को रूस से एसयू-57 लड़ाकू विमान के लिए कोई सौदा करनी चाहिए। सोर्स कोड और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भारत को प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले हर एक प्वाइंट को साफ शब्दों में जान लेना चाहिए। आंख मुंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। INS विक्रमादित्य एक शक्तिशाली युद्धपोत है और अब भारतीय नौसेना की रीढ़ बन चुका है। लेकिन उसे हासिल करने की प्रक्रिया से भारत को जो सबक मिला, वो भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक सबक है। इसीलिए भारत को एसयू-57 प्रोजेक्ट को भी INS विक्रमादित्य की लेंस से देखना चाहिए और उसी हिसाब से फैसले लेने चाहिए।
14 महीने में ही कंगना का राजनीति से मोहभंग?
अभिनेत्री से नेता बनीं कंगना रनौत हाल ही में हिमाचल प्रदेश में अपने संसदीय क्षेत्र मंडी दौरे को लेकर चर्चा में हैं। हिमाचल में बादल फटने, भारी बारिश के कारण राज्य में आपदा की स्थिति बन गई है। इस बीच कंगना ने अत्मन इन रवि (AiR) पॉडकास्ट में अपने राजनीतिक अनुभवों पर खुल कर बात की। हालांकि, कंगना ने पॉडकास्ट के दौरान ऐसी बात कही जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कंगना ने दो टूक कहा कि राजनीति ने उन्हें बिल्कुल भी खुशी नहीं दी है। अब एक सवाल यह है कि क्या मंडी से बीजपी सांसद कंगना का 14 महीने में ही राजनीति से मोहभंग हो रहा है?

मैंने कभी लोगों की सेवा के बारे में नहीं सोचा था
कंगना ने कहा कि मुझे इसकी आदत पड़ रही है। मैं यह नहीं कहूंगी कि मुझे इसमें (राजनीति में) मजा आ रहा है। यह एक बहुत ही अलग तरह का काम है, समाज सेवा जैसा। यह मेरी पृष्ठभूमि नहीं रही है। मैंने कभी लोगों की सेवा करने के बारे में नहीं सोचा। महिला अधिकारों पर अपने मुखर रुख के लिए जानी जाने वाली रनौत ने स्पष्ट किया कि अतीत में उनकी सक्रियता सार्वजनिक पद की जिम्मेदारियों से काफी अलग थी।
मंडी से बीजेपी सांसद कंगना ने कहा कि कैसे मतदाता अक्सर बिल्कुल जमीनी स्तर की समस्याओं के साथ उनके पास आते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है, लेकिन वह अलग है… किसी की नाली टूटी हुई है और मैं कहती हूं कि मैं एक सांसद हूं और ये लोग पंचायत स्तर की समस्याओं के साथ मेरे पास आ रहे हैं। उन्हें कोई परवाह नहीं है। जब वे आपको देखते हैं, तो वे टूटी सड़कों जैसी समस्याओं के साथ आपके पास आते हैं। बीजेपी सांसद ने कहा कि मैं उन्हें बताती हूं कि यह राज्य सरकार का मुद्दा है, और वे कहते हैं, ‘आपके पास पैसा है, आप अपना पैसा ही इस्तेमाल करें।

कंगना की हुई थी आलोचना
हाल ही में कंगना के संसदीय क्षेत्र मंडी में बादल फटने की घटना हुई थी। मंडी के दौरे में देरी के लिए कंगना को आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस ने कंगना पर अपने निर्वाचन क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। हालांकि, रनौत ने बाद में इस मुद्दे पर पलटवार किया था। रनौत ने प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया।
उन्होंने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं का तुरंत समाधान किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं के कारण 14 लोगों की मौत हो गई। राज्य में मौसम खराब है। बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन के कारण राज्य में में 200 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं।
आज ट्रेड यूनियनों और बैंकों की हड़ताल, डाक-रेल सेवाओं पर भी असर होगा; सड़क जाम की चेतावनी
आज देशव्यापी हड़ताल के कारण कई जरूरी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। ट्रेड यूनियन और बैंकों की पूरे देश में हड़ताल से बैंकों के अलावा डाकघर और रेलवे की सेवाओं पर भी असर पड़ेगा। हड़ताल के दौरान सड़कों को जाम करने की चेतावनी भी दी गई है। यूपी में बिजली कर्मियों ने भी अलग से हड़ताल का एलान किया है।

हड़ताल से बैंकिंग, बीमा, डाक, कोयला खनन, राजमार्ग और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सेवाएं बाधित होने की उम्मीद है। सीआईटीयू, इंटक और एटक जैसे केंद्रीय ट्रेड यूनियन चार श्रम संहिताओं को खत्म करने, ठेकाकरण और पीएसयू के निजीकरण, न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रति माह करने, स्वामीनाथन आयोग के सी2 प्लस 50 प्रतिशत के फॉर्मूले के आधार पर फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और ऋण माफी की किसान संगठनों की मांगों पर जोर दे रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और नरेगा संघर्ष मोर्चा जैसे क्षेत्रीय संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल को अपना समर्थन दिया है। हालांकि, आरएसएस से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) हड़ताल में भाग नहीं लेगा। BMS इसे राजनीति से प्रेरित विरोध बता रहा है।
सड़कें जाम करेंगेः सीआईटीयू
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीआईटीयू) की राष्ट्रीय सचिव एआर सिंधु ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शन किए जाएंगे। सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिक विरोध में शामिल नहीं हो पाएंगे, लेकिन उन्हें भी संगठित किया जाएगा और सड़कें जाम की जाएंगी। ट्रेनें भी रोकी जाएंगी।
रांची में निकाला मशाल जुलूस
झारखंड की राजधानी रांची में ट्रेड यूनियनों और वामपंथी दलों के एक संयुक्त मंच ने बुधवार को चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने की मांग को लेकर होने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए मशाल जुलूस निकाला। मंगलवार शाम को आयोजित जुलूस सैनिक मार्केट से शुरू हुआ और अल्बर्ट एक्का चौक पर समाप्त हो गया। यहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और उस पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के अशोक यादव ने कहा, हमने 17 सूत्री मांगों के समर्थन में मशाल जुलूस का आयोजन किया। सीपीआई के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने बताया कि दो घंटे का चक्का जाम किया जाएगा।

हिमाचल के सात जिलों में बाढ़ का अलर्ट, बंगाल-महाराष्ट्र में जोरदार बारिश; कई बड़ी नदियां उफान पर
देश के अधिकांश हिस्से में मूसलाधार बारिश जारी है जिससे कई बड़ी नदियां उफान पर हैं। असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मध्य भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। हिमाचल प्रदेश में आफत की बारिश लगातार हो रही है और सात जिलों में अगले चौबीस घंटों के दौरान आकस्मिक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। पश्चिम बंगाल के भी कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई है और कोलकाता समेत विभिन्न जगहों पर जलभराव की समस्या पैदा हो गई है।
देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हिमाचल के सात जिलों में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। मंडी में सबसे ज़्यादा सड़कें बंद हैं। वहीं अब तक 52 लोगों की मौत हो चुकी है और जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के चांबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला, सोलन और सिरमौर में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है। विभाग ने राज्य के अलग-अलग स्थानों पर सोमवार तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी देते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से प्रदेश में 225 सड़कें बंद हैं जिनमें सर्वाधिक प्रभावित मंडी जिले में 153 सड़कें शामिल हैं। 163 ट्रांसफार्मर और 174 जलापूर्ति योजनाएं भी ठप पड़ी हैं। 1 जून से 8 जुलाई के बीच हिमाचल में 203.2 मिमी वर्षा हुई है, जबकि इस दौरान सामान्य तौर पर 152.6 मिमी वर्षा होती है। वर्षा जनित घटनाओं में अब तक 52 लोगों की जान जा चुकी है।
सतलुज में पानी बढ़ा, फिरोजपुर में बाढ़.
पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश के कारण सतलुज का जलस्तर बढ़ने से फिरोजपुर के टापू कालू वाला क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया है। पंजाब में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश से मंगलवार को तापमान सामान्य से 2.1 डिग्री नीचे गिर गया। मौसम विभाग ने बुधवार और बृहस्पतिवार को राज्य में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है।
जम्मू संभाग में बादल फटने की आशंका
जम्मू संभाग में सक्रिय हुए मानसून से मंगलवार को कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई। अगले दो दिन संभाग में भारी से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस अवधि में 100 से 200 मिलीमीटर तक बारिश होने से बादल फटने का खतरा है।
चंबा के चुराह में फटा बादल, फसलें तबाह
हिमाचल प्रदेश में जारी बारिश के दौर के बीच मंगलवार सुबह चंबा जिले के चुराह में तीन दिन बाद फिर बादल फटा है। इससे नाले में आई बाढ़ से खेतों में मक्की की फसल तबाह हो गई और नकरोड़-थल्ली मार्ग को नुकसान पहुंचा है। करसोग में 30 जून की रात बादल फटने के बाद आई बाढ़ में लापता ललित कुमार का शव मंगलवार को करला के पास सतलुज नदी से बरामद हुआ। मंडी जिले में आपदा में मरने वालों की संख्या 19 पहुंच गई है। बादल छाए रहने से गगल एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट और इंडिगो की दिल्ली से आने वाली उड़ानें रद्द हो गईं।
धनसिरी से नर्मदा तक खतरे के निशान से ऊपर
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों के अनुसार, धनसिरी (दक्षिण) नदी असम के गोलाघाट और नुमलीगढ़ में, नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के मांडला में और वैनगंगा नदी महाराष्ट्र के भंडारा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि, इन नदियों का पानी अब उतार पर है। इनके अलावा, असम, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में कम से कम 11 जगहों पर भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और नदियों का पानी किनारे के निचले इलाकों और गांवों में घुस गया है। सीडब्ल्यूसी ने 35 बांधों और बैराजों के लिए चेतावनी जारी की है, जहां जल प्रवाह महत्वपूर्ण सीमा को पार कर गया है।
बागेश्वर धाम के पास दीवार गिरी, महिला की मौत
मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले में बागेश्वर धाम के पास रातभर हुई बारिश के कारण एक होम स्टे की दीवार गिर गई, जिसमें दबने से एक महिला की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। हादसा मंगलवार तड़के हुआ। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई गई है। सभी पीड़ित उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और शाहजहांपुर के रहने वाले थे और बागेश्वर धाम दर्शन करने आए थे।
10 से 14 जुलाई तक हिमाचल से राजस्थान, यूपी तक होगी बारिश
आईएमडी के अनुसार, एक चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण गुजरात और निचले क्षोभमंडल स्तर पर स्थित है। इसके अलावा अरब सागर से लेकर पश्चिम बंगाल तक और भी मौसम संबंधी प्रणालियां सक्रिय हैं। इसके प्रभाव से 14 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, 10 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, 11 जुलाई तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, 9 और 10 जुलाई को पंजाब, हरियाणा चंडीगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, 12-14 जुलाई के दौरान पश्चिमी राजस्थान, 10-14 जुलाई के दौरान पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश की संभावना है। 11 और 12 जुलाई को पूर्वी राजस्थान में बहुत भारी बारिश हो सकती है।

विनाशकारी बाढ़ में अब तक 109 मौतें, 160 से अधिक अभी भी लापता; ट्रंप शुक्रवार को दौरा कर सकते हैं
अमेरिकी शहर टेक्सास में आई विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आकर अब तक 109 लोगों की मौत हो चुकी है। 160 से अधिक लोग लापता हैं। रेस्क्यू टीम शवों और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। राहत और बचाव कार्य चलाने वाली एजेंसियां हवाई सर्वे कर रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर की मदद भी ले रही हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रभावित इलाकों का दौरा शुक्रवार को कर सकते हैं।
एबॉट ने मंगलवार (स्थानीय समयानुसार) को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का हेलीकॉप्टर से दौरा किया। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिन लोगों का पता नहीं चल पाया है, उनमें से कई राज्य के हिल कंट्री में रह रहे थे, लेकिन उन्होंने किसी कैंप या होटल में पंजीकरण नहीं कराया था।
अब भी बाढ़ पीड़ितों की तलाश कर रहे अधिकारी
सरकारी अधिकारी अब भी बाढ़ के पीड़ितों की तलाश कर रहे हैं। इस बीच, यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ से पहले मौसम की चेतावनी किसने दी और कब दी। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि अभी सबसे जरूरी काम लोगों को बचाना है।
केर काउंटी में अब तक 87 शव मिल चुके
केर काउंटी, जहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, वहां अब तक 87 लोगों के शव मिल चुके हैं। लेकिन अफसर कह रहे हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना है, न कि यह जांच करना कि बाढ़ से पहले क्या-क्या हुआ। टेक्सास गेम वार्डन के लेफ्टिनेंट कर्नल बेन बेकर ने कहा, ‘हम अभी लोगों को सुरक्षित उनके घर पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं।’
केर काउंटी में पिछले चार दिनों ने कोई जिंदा नहीं मिला
जीवित बचे लोगों को खोजने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि केर काउंटी में बाढ़ के बाद पिछले चार दिनों से कोई भी जिंदा नहीं मिला है।
शुक्रवार को टेक्सास का दौरा करेंगे राष्ट्रपति ट्रंप
टेक्सास के गवर्नर एबॉट ने मंगलवार को कैंप मिस्टिक का एक और दौरा करने की योजना बनाई है। यह एक सौ साल पुराना ऑल-गर्ल्स क्रिश्चियन समर कैंप है, जहां केवल लड़कियां आती हैं। बाढ़ के दौरान वहां 27 लड़कियों और स्टाफ की मौत हो गई थी। अभी भी पांच लड़कियां और एक स्टाफ सदस्य लापता हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार को टेक्सास का दौरा करेंगे। उन्होंने इस बाढ़ को एक अभूतपूर्व घटना बताया है।




