फूटी कोठी की ये बेशकीमती जमीन इलाके में करवा सकती है बड़ा गैंगवॉर !
फूटी कोठी मैन रोड़ पर विक्रम स्क्वायर के पास पेट्रोल पंप से सटर कॉर्नर के प्लॉट का सौदा एक बार फिर गैंगस्टरों के दरवाजे तक पहुंचा है…. इंदौर विकास प्राधिकरण के स्कीम नंबर-71 के इस 7500 स्क्वायर फीट का ये प्लांट कोई सामान्य भूखंड नहीं है-पिछले करीब 15 सालों यह प्लॉट खून, सत्ता और सौदेबाजी का अखाड़ा बना हुआ है…. सूत्रों के अनुसार सरकारी कागज चीख रहे है कि ये जमीन टीकम सिंधी उर्फ टीकमचंद उर्फ टीकम करमचंदानी की है, मगर जमीनी हकीकत कहती है यहां तिवारी परिवार की सल्तनत है….
दोनों ओर से करोड़ों की माँग, बड़े-बड़े गैंगस्टरों से लेकर छुटभेचे गुंडे बदमाशी और लोकल नेताओं का हस्तक्षेप, किरायेदारों से महीनों का नकद किराया, लंबी सूनी जंग और एक हत्या अब सवाल सिर्फ मालिक का नहीं है, सवाल है इंदौर की कानून-व्यवस्था के कंधे पर रखी बंदूक कर… क्योंकि जब जमीन से ज्यादा मजबूत हो जाए कब्जा, तो शहर की आत्मा सवाल पूछती है
“जमीन का असली राजा कौन? अब स्थिति यह है कि इलाके का हर बड़ा बदमाश, जमीनों के दल्ने, प्रॉप ब्रोकर मैटरबाज, और फाइनेंसर इस 20 करोड़ी बाजार भाव वाले प्लॉट पर अपना-अपना दिमाग लगाकर हिस्सा खोज रहे हैं. हालांकि यह सूनी कहानी इतनी भी सीधी नहीं है…. और यहीं से मामले में द्विस्ट सुरु होता है कि आखिर यह प्लटि अब तक क्यों अपने सरेजाम तक नहीं पहुंच पाया…. इंदौर पुलिस प्रशासन को भी चाहिए कि भले ही यह केस कोर्ट में चल रहा हो, लेकिन लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने की स्थिति में तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए… इससे पहले कि यह करोड़ों की जमीन 1-2 विकेट और गिरा दे…..
*विवादित प्लॉट्स….गैंगस्टर, भू-माफिया और सफेदपोशों का अदृश्य गठजोड़ कर रहा है कब्जे*
जमीनों में लगी आग से हाथ ताप रहे गुंडे-बदमाश
इंदौर का अन्नपूर्णा इलाका अब मंदिरों और साफ सुथरे शांतिप्रिय मुहल्लों की बात नहीं कर रहा-यहां अब हर इंच ज़मीन पर या तो गोली की बोली है, या गुपचुप समझौते की चुप्पी है…. ये वो ज़मीनें हैं, जहां कानून झांकता तक नहीं है…. यहां कब्ज़ा करने वालों को नक्शों के भूगोल से नहीं, बस बंदूक, छल और बल से मतलब है…. करोड़ों के इन विवादित प्लॉटों पर आज गैंगस्टर, भू-माफिया और सफेदपोशों की अदृश्य गठजोड़ ने ऐसी सत्ता रच दी है जो कानून से लेकर फाइल तक, सबको या तो खरीद चुकी है या डरा चुकी है…. सवाल अब ये नहीं कि ज़मीन किसकी है- सवाल अब ये है कि इलाके में सिक्का किसका चलता है…. जिसकी लाठी है, उसी की भैंस है
इंदौर का पश्चिम इलाका खासकर अन्नपूर्णा, फूटीकोठी, हवा बंगला, सिरपुर क्षेत्र इन दिनों किसी आध्यात्मिक शक्ति का नहीं,
बल्कि भू-माफिया के भूत प्रेतों का तीर्थ बनता जा रहा है….
जहाँ कभी अन्नपूर्णा और रणजीत हनुमान जैसे मंदिरों के साए से बसी बस्तियों में शांति थी,
तो आज वहीं पर बुलेट की गूंज, स्कॉर्पियो-फॉरच्यूनर की हलचल और बंदूकधारी ब्रोकरों की अंडरग्राउंड मीटिंगें हो रही हैं….
नाम है ‘रियल एस्टेट’,
पर असल में यह ‘क्रिमिनल एस्टेट’ बनता जा रहा है….
यहां प्लॉटों की कीमतें आसमान से बातें कर रही हैं,
और उसी ऊंचाई से नीचे गिर रहे हैं न्याय, रहा है…. नीति और नियम….
करोड़ों रुपए के विवादित भूखंड आज ‘किसका है’ से ज़्यादा ये तय कर रहे हैं कि ‘कौन सभी पार्टियों को एक टेबल पर बैठाकर मामला निपटा सकता है’….
नगर निगम और प्रशासन की आँखों के सामने जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं, खुलेआम इधर-उधर रजिस्ट्रियां हो रही है,
और जिन प्लॉटों की मालिकी अदालत तय नहीं कर पाई,
वहां दुकानों के उद्घाटन और मकानों के भूमिपूजन हो रहे हैं,
बाकायदा अगरबत्ती जलाते हुए नारियल फोड़कर….
गैंगस्टर अब जमीन के नक्शे कागज नहीं पढ़ते,
सीधा बाउंड्री बनाकर बोर्ड लगा देते हैं…. और फिर एक फोन जाता है-
लोकल पुलिस को, नेताओं को, और फर्जी दस्तावेज़ बनाने वाले “डिजिटल कलाकारों” को….
जिस जमीन पर कभी मूल मालिक की गाड़ी नहीं चढ़ी,
आज वहां माफिया SUV लेकर चढ़ बैठ इंदौर का पश्चिम इलाका आज जमीन के नाम पर खून मांग रहा है….
और सरकार?
वो या तो “जांच” के नाम पर फाइलें घुमा रही है, या “मौन समर्थन” देकर अपराधियों के कारोबार को वैधानिक बना रही है….
यह भूखंड अब भूगोल नहीं रहे, ये सत्ता की सबसे खतरनाक प्रयोगशाला बन चुके हैं….
प्रशासनिक चुप्पी, राजनैतिक समर्थन और अपराधी सोच –
इस त्रिकोण में पिस रही है आम जनता की उम्मीद, उसकी ईमानदारी, उसका घर बनाने का सपना…. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ये भू-माफिया कौन हैं….
असली सवाल ये है कि ये कौन-कौन से कुर्सियों पर बैठे लोगों से ‘आशीर्वाद’ पाते हैं?
कौन सी कुर्सी इनकी फर्जी रजिस्ट्री की लाल स्याही पर हस्ताक्षर करती है? और कब सीधे साधे लोगों की ज़मीन के साथ-साथ उसकी उम्मीदों की भी लाश बनाकर दफनाया जाता है….
और जब तक प्रशासन चुप है, पुलिस मशगूल है और जनता सोई है -तब तक इन बड़े बड़े करोड़ों के विवादित भूखंडों पर विकास नहीं होगा, बस कब्जा होगा…





