इंदौर : इंदौर में चोरी की घटनाएं जहां पुलिस के लिए सिरदर्द हैं, वहीं, पुलिस की लाख निगरानी के बावजूद इंदौर में आज भी चोरों की विरासत के रूप में चोर बाजार सजता है. इस बाजार में चोरी से लेकर साहूकारी और शोरूम पर बचने वाले नए-पुराने थोक माल की बिक्री होती है. यहां ऐसे ग्राहक उमड़ते हैं जो शोरूम में जाकर महंगा सामान नहीं खरीद सकते. ऐसे लोग यहां आकर अपनी इच्छा और शौक पूरा करते हैं. ये चोर बाजार इंदौर में 3 दशक से लग रहा है.
चोरी और तस्करी के अलावा नया और पुराना सामान
देश के तमाम महानगरों में मौजूद मार्केट के साथ ही ऐसे भी ग्रे मार्केट भी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में चोरी और तस्करी के अलावा नया और पुराना सामान बिकता है. चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे तमाम बाजारों की खरीदी-बिक्री और कारोबार कई छोटे देशों की अर्थव्यवस्था से ज्यादा है. इन मार्केट के ग्राहक भी अलग हैं, जो महंगी सामग्री नहीं खरीद पाने के कारण इन बाजारों को विकल्प मानते हैं. यही वजह है कि कई बड़े शहरों में आज भी चोर बाजार रोशन हैं.
इंदौर के चोर बाजार में 300 दुकानें
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर भी अब ग्रे मार्केट का बाजार बन चुका है, जहां चोरी से लेकर साहूकारी और दुकानों पर बच जाने वाला सामान कम कीमतों पर मिलता है. शहर के प्रमुख इलाके राजवाड़ा के पास मछली मार्केट कबाड़खाने पर मौजूद इस बाजार में ढाई सौ से 300 दुकानें रोज लगती हैं लेकिन रविवार को यह बाजार सबसे ज्यादा गुलजार रहता है, जहां इंदौर समेत आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में ग्राहक सस्ते जरूरत के सामान की ख्वाहिश लिए पहुंचते हैं.
जरूरत के सारे आइटम्स मिलते हैं
इस बाजार में कपड़े, जूते, रसोई के आइटम, बर्तन इलेक्ट्रिक सामान तरह-तरह के औजार शैंपू, साबुन, जूते-चप्पल और फर्नीचर रियायती और न्यूनतम दामों पर बेचने का दावा किया जाता है. यहां करीब 30 साल से दुकान लगाने वाले बाबू भाई बताते हैं “बाजार में जो सामान 1000 से डेढ़ हजार रुपए का है, वह यहां ढाई सौ से ₹300 में मिल जाता है.” उन्होंने इस बाजार को चोरों का बाजार कहे जाने पर आपत्ति लेते हुए कहा “यहां भी लोग मेहनत करके कमाते हैं. अधिकांश माल वह होता है जो बड़े शोरूम अथवा दुकानों पर बच जाता है, जिसे यहां के दुकानदार खरीद कर सस्ते दामों पर बेचते हैं.”

चोर बाजार में जरूरत के सारे आइटम्स मिलते हैं
क्या कहते हैं दुकानदार, क्या है उनका दर्द
वहीं, शहर के बड़े दुकानदारों का मानना यही है कि यहां पर देवास में होने वाली ट्रक कटिंग और विभिन्न स्थानों पर होने वाली चोरी का माल भी चोरी छुपे भेज दिया जाता है. दुकानदार मोहम्मद नफीस ने बताया “30 साल पुराने इस बाजार में सस्ता सामान खरीदने वाले ग्राहक आते हैं, जिनकी बदौलत बाजार में मौजूद करीब ढाई सौ दुकानदारों का पेट पलता है. हालांकि इस बाजार पर हमेशा पुलिस की नजर रहती है, जिन्हें सभी दुकानदारों को मिलकर एक निश्चित राशि भी देनी पड़ती है. यही स्थिति नगर निगम के कर्मचारियों को लेकर है, जो रोड पर दुकान लगाने के बदले में प्रतिदिन मोटी रकम दुकानदारों से इकट्ठा करके ले जाते हैं.”
इंदौर के चोर बाजार में 300 दुकानें
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर भी अब ग्रे मार्केट का बाजार बन चुका है, जहां चोरी से लेकर साहूकारी और दुकानों पर बच जाने वाला सामान कम कीमतों पर मिलता है. शहर के प्रमुख इलाके राजवाड़ा के पास मछली मार्केट कबाड़खाने पर मौजूद इस बाजार में ढाई सौ से 300 दुकानें रोज लगती हैं लेकिन रविवार को यह बाजार सबसे ज्यादा गुलजार रहता है, जहां इंदौर समेत आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में ग्राहक सस्ते जरूरत के सामान की ख्वाहिश लिए पहुंचते हैं.
जरूरत के सारे आइटम्स मिलते हैं
इस बाजार में कपड़े, जूते, रसोई के आइटम, बर्तन इलेक्ट्रिक सामान तरह-तरह के औजार शैंपू, साबुन, जूते-चप्पल और फर्नीचर रियायती और न्यूनतम दामों पर बेचने का दावा किया जाता है. यहां करीब 30 साल से दुकान लगाने वाले बाबू भाई बताते हैं “बाजार में जो सामान 1000 से डेढ़ हजार रुपए का है, वह यहां ढाई सौ से ₹300 में मिल जाता है.” उन्होंने इस बाजार को चोरों का बाजार कहे जाने पर आपत्ति लेते हुए कहा “यहां भी लोग मेहनत करके कमाते हैं. अधिकांश माल वह होता है जो बड़े शोरूम अथवा दुकानों पर बच जाता है, जिसे यहां के दुकानदार खरीद कर सस्ते दामों पर बेचते हैं.”
इंदौर के चोर बाजार को लेकर डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया का कहना है “चोर बाजार के बारे में उन्होंने भी सुना है, लेकिन जिस बाजार को चोर बाजार कहा जाता है वहां जो सामग्री बिकती है, उस पर पूरी निगरानी पुलिस की रहती है. क्योंकि वहां पास में ही पुलिस चौकी भी है. वहां पर चोरी के सामान की बिक्री ना हो, इसके लिए भी पुलिस सतत सक्रिय रहती है
देश के सबसे बड़े 10 चोर बाजार
पालिका प्लाजा, नई दिल्ली : कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और टैटू की 390 दुकान वाले बाजार का सालाना 100 करोड़ का कारोबार.
कुडूपेट मार्केट, चेन्नई : ऑटोमोबाइल सामग्री का स्पेयर पार्ट्स हर दिन 45000 ग्राहक जिनके जरिए सालाना 1400 करोड़ का कारोबार.
एसपी रोड बैंगलोर : इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक का मार्केट रोजाना 1 लाख ग्राहकों वाले बाजार का सालाना कारोबार ढाई हजार करोड़.
लेमिंगटन रोड मुंबई : 100 साल पुराने इस मार्केट में कंप्यूटर टीवी वॉयरलैस और इलेक्ट्रॉनिक के माइनर डिफेक्ट वाले प्रोडक्ट का बाजार, जहां 1500 से ज्यादा दुकानें, जिन पर सालाना 3000 करोड़ का व्यापार.
सोतीगंज मार्केट मेरठ : 70 साल से चोरी की गाड़ियों की खरीदी बिक्री के लिए प्रसिद्ध मार्केट, यहां चोरी की गाड़ियों को मिनट में खोलकर पुर्जे पुर्जे करके बेच दिया जाता है, जिस पर फिलहाल पुलिस ने रोक लगाई है.
नेहरू प्लेस, नई दिल्ली : आईटी के इस मार्केट में गोलमाल की गई सामग्री की दुकानें हैं. पायरेटेड सॉफ्टवेयर कंप्यूटर और लैपटॉप की बिक्री यहां बड़े पैमाने पर होती है.
चिकपेट मार्केट, बैंगलोर : एंटीक सामान, साड़ी ज्वैलरी और घर की सामग्री का बाजार, जहां 5 हजार दुकानों पर रोजाना करीब 2 लाख लोग आते हैं. इस बाजार का सालाना कारोबार 30000 करोड़.
रिचि स्ट्रीट, चेन्नई : 50 साल पुराने इस बाजार में कंप्यूटर मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक आइटम सस्ती दरों पर मिलते हैं, इस बाजार में स्मगलिंग किए हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान भी बिकता है.
चांदनी चौक, दिल्ली : संडे को लगने वाले बाजार में ज्वैलरी, मोबाइल और तरह-तरह के आइटम बिकते हैं, जहां बाजार का सालों में कारोबार 40000 करोड़.
मुंबई का चोर बाजार : मुंबई के इस बाजार को पहले शोर बाजार भी कहते थे लेकिन बाद में इसका नाम चोर बाजार पड़ गया. पुराने विंटेज म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट और इलेक्ट्रॉनिक सामान. बाद में यहां चोरी का सामान बिकने लगा. 350 दुकानों वाले बाजार का कारोबार ढाई सौ करोड़.




