श्रम कानूनों में राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए कंपनियों में कामकाज समय 9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे और दुकानों में 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे करने की मंजूरी दी है। इसके पीछे कैबिनेट ने तर्क दिया है कि इससे उद्योगों को सुविधा होगी और मजदूरों को कानूनी रूप से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा।

महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने श्रम कानूनों में राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए कंपनियों में कामकाज समय 9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे और दुकानों में 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे करने की मंजूरी दी है। इसके पीछे कैबिनेट ने तर्क दिया है कि इससे उद्योगों को सुविधा होगी और मजदूरों को कानूनी रूप से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। प्राइवेट क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अधिकतम दैनिक कार्य अवधि को मौजूदा नौ घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे काम करना होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में केंद्रीय कार्यबल द्वारा सुझाए गए बदलावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही महाराष्ट्र अब कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों में शुमार हो गया है, जहां ऐसे सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजित करना और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
अब 9 से 12 घंटे की ड्यूटी
आधिकारिक बयान में बताया गया है कि ये संशोधन, फैक्टरी अधिनियम, 1948 और महाराष्ट्र दुकान एवं स्थापना (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम 2017 में किए जाएंगे। संशोधनों के बाद उद्योगों को अधिक मांग या श्रमिकों की कमी के दौरान बिना व्यवधान काम करने की अनुमति होगी, वहीं यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का उचित मुआवजा मिले। इसके तहत उद्योगों में दैनिक कार्य घंटों की सीमा नौ से बढ़ाकर 12 घंटे की जाएगी। वहीं विश्राम का समय पांच घंटे की बजाय छह घंटे के बाद मिलेगा। राज्य सरकार के मंत्री अकाश फुंडकर ने कुछ दिन पहले इस बारे में संकेत दिए थे, उन्होंने कहा कि काम के घंटे बढ़ाए जाएंगे।
बड़ी बातें:
- फैक्ट्रियों में अब रोजाना 12 घंटे काम की अनुमति
- दुकानों-स्थापनाओं में 10 घंटे ड्यूटी तय
- ओवरटाइम की सीमा 115 से बढ़ाकर 144 घंटे
- मजदूरों को ओवरटाइम पर दोगुना वेतन
- उद्योगों के लिए कामकाज आसान, नए निवेश की उम्मीद
- श्रमिक अधिकार सुरक्षित रखने का सरकार का दावा
ओवरटाइम की सीमा भी बढ़ाई
कानूनी ओवरटाइम की सीमा 115 घंटे से बढ़ाकर प्रति तिमाही 144 घंटे की जाएगी और इसके लिए श्रमिकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। साप्ताहिक कार्य घंटे भी साढ़े दस घंटे से बढ़ाकर 12 कर दिए जाएंगे। इसी प्रकार, संशोधित दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत दैनिक कार्य घंटों को नौ से बढ़ाकर 10 घंटे, ओवरटाइम की सीमा 125 से बढ़ाकर 144 घंटे और आपातकालीन ड्यूटी घंटों को 12 घंटे कर दिया जाएगा। यह बदलाव 20 या उससे अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे।




