सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का कहना है कि बिहार के पुर्णिया में विगत दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर हरदम की तरह एक बार फिर बिहार चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने की शुरुआत कर दी है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बार-बार “घुसपैठियों” का मुद्दा उठाना महज़ मुसलमानों को निशाना बनाने और समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति है।
वास्तविकता यह है कि केंद्र में भाजपा को सत्ता में आए 11 साल हो चुके हैं, लेकिन इस पूरी अवधि में न तो घुसपैठ रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए और न ही “चिन्हित कर वापस भेजने” का कोई गंभीर प्रयास किया गया। संसद में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार भाजपा सरकार के कार्यकाल में बाहर निकाले गए घुसपैठियों की संख्या उसके पहले यूपीए सरकार के 10 साल में निकाले गए लगभग 28 हज़ार घुसपैठियों से भी कम है। इसके बावजूद चुनाव के समय यह मुद्दा बार-बार उछालना भाजपा की राजनीतिक मंशा को उजागर करता है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) याद दिलाती है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि “घुसपैठियों” को बाहर किया जाएगा, पर आज तक इसके लिए कोई ठोस नीति या कार्रवाई सामने नहीं आई। इसके उलट, हर चुनाव में भाजपा यही मुद्दा उठाकर लोगों की असली समस्याओं—रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महँगाई—से ध्यान भटकाती है।
यह भी स्पष्ट है कि भाजपा अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी इसी मुद्दे को दोहराएगी और वहाँ भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करेगी।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) स्पष्ट करती है कि भाजपा की यह राजनीति न सिर्फ़ संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि देश की जनता को आपस में बाँटने की साज़िश है। पार्टी जनता से अपील करती है कि वे इस तरह की सांप्रदायिक राजनीति के झाँसे में न आएँ और अपने वोट का इस्तेमाल रोज़मर्रा की वास्तविक समस्याओं को हल करने को प्रतिबद्ध पार्टियों के समर्थन में करें।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337





