लॉकडाउन और पुलिस की सख्ती के बावजूद विरोध को रोक नहीं पायी भाजपा सरकार*
*कई जगह पुतला दहन, प्रदर्शन और नारेबाजी के साथ हुआ किसान आंदोलन का समर्थन*
*तीनों कृषि कानून वापस लेने तथा मजदूर संहिता रद्द करने की की गई मांग*
आज 26 मई को किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने तथा मोदी सरकार के कुशासन के 7 वर्ष पूरा होने के अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश से जुड़े किसान संगठनों के आव्हान पर 200 से ज्यादा स्थानों पर काला दिवस मनाया गया। कार्यकर्ताओं ने अपने वाहनों और घरों पर काले झंडे लगाकर जगह-जगह प्रदर्शन और नारेबाजी कर,मोदी सरकार का पुतला जला कर किसान आंदोलन के साथ एकजुटता प्रदर्शित की। किसान संघर्ष समिति को प्राप्त सूचना के अनुसार आज इंदौर ,मुलताई, बेतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, रीवा, सतना, सीधी, देवास, झाबुआ, अलीराजपुर, भोपाल, ग्वालियर, रायसेन ,सिलवानी, नरसिंहपुर ,सीहोर, दोराहा, सागर, सिंगरौली, खरगोन जिले में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और काला दिवस मनाए जाने के समाचार है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन, ऑल इंडिया किसान सभा, जागृति संगठन, भारतीय किसान सभा-अजय भवन, रोको, ठोको क्रांतिकारी संगठन, क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन, अखिल भारतीय किसान सभा, शहीद राघवेंद्र सिंह किसान संघर्ष समिति, एआईकेकेएमएस,जाग्रत आदिवासी दलित संगठन, सीटू, एटक, भारतीय किसान युनियन, श्रमिक जनता संघ, भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति युनियन, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा, भारतीय किसान युनियन (अराजनीतिक) , बर्गी बांध विस्थापित संघ, भारतीय किसान युनियन, भारतीय किसान एवं मजदूर सेना, किसान क्रांति, किसान गर्जना , एन ए पी एम आम किसान युनियन एवं अन्य संगठनो द्वारा काला दिवस और विरोध प्रदर्शन के आयोजन अपने-अपने जिलों में पूरी ताकत से किए गए।
छिंदवाड़ा में उपाध्यक्ष एड.आराधना भार्गव , कटनी में उपाध्यक्ष डॉ.एके खान, बैतूल में जिलाध्यक्ष जगदीश दोड़के, लक्ष्मण बोरबन, नीमच में राजेन्द्र पुरोहित,मंदसौर में दिलीप सिंह पाटीदार इंदौर से रामस्वरूप मंत्री, दिनेश सिंह कुशवाह,छेदीलाल यादव ,भरतसिंह यादव, अरुण चौहान, कैलाश लिंबोदिया, प्रमोद नामदेव, , रीवा में इंद्रजीत सिंह, त्रिनेत्र शुक्ला, सीधी में उमेश तिवारी, निसार आलम अंसारी , टीकमगढ़ से महेश पटेरिया,सुधीर शुक्ला, झाबुआ में राजेश बैरागी, गोपाल डामोर, देवास में लीलाधर चौधरी, रायसेन में श्रीराम सेन , सिवनी में डॉ.राजकुमार सनोडिया, रामकुमार सनोडिया, महेंद्र सिंह बघेल , विदिशा में राजेश तामेश्वरी, ग्वालियर में रमेश परिहार, शत्रुघ्न यादव, बालाघाट में राजकुमार नागेश्वर, हरदा में योगेश तिवारी, अशोक नगर में महेन्द्रसिंह यादव, लखन यादव, मंडला में रामसिंह कुलस्ते , धार में प्रशन्ना मंडोलिया, अलीराजपुर में नवनीत कुमार मंडलोई, निसार मोहम्मद,मुरैना में महेशदत्त मिश्रा आदि के नेतृत्व में काला झंडा, पूतला दहन कर काला दिवस मनाया गया।
पिछले छह माह से किसान दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानून रद्द करने, बिजली संशोधन बिल वापस लेने तथा सभी कृषि उत्पादों की लागत का डेढ़ गुना दाम की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर अनिश्चिकालीन धरना दे रहे हैं। आंदोलन में अब तक 475 किसानों की शहादत हो चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार ने 22 जनवरी के बाद किसानों से चर्चा नही की है। इसलिए देशभर के साथ मध्य प्रदेश के भी किसानों ने यहां के किसान संगठनों के आव्हान पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया हालांकि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस प्रदर्शन को रोकने की पुरजोर कोशिश की और जगह-जगह भारी पुलिस बल तैनात किया गया बावजूद इसके किसान और मजदूर कानूनों के विरोध में विरोध प्रदर्शन को रोक नहीं पाए ।मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों के अलावा छोटे-छोटे गांवों और कस्बों में भी आज जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन हुआ प्रदर्शन में शामिल संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए नहीं बल्कि देश को बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखे अंग्रेजों के कंपनी राज से लड़े थे। मोदी सरकार अडानी-अंबानी राजदेश पर थोपना चाहती है, हम उससे देश के किसानों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि आर एस एस से जुड़ा किसान संघ अब खुलकर मोदी सरकार के पक्ष में आ गया है तथा वह अब संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को राष्ट्रद्रोही, आतंकवादी बतला रहा है। जिससे पता चलता है कि सरकार भारतीय किसान संघ के माध्यम से किसानों को गांव स्तर पर बांटना चाहती है। शिवराज सिंह मोदी सरकार की तरह ही प्रदेश में दमनकारी नीति अपना रही है। किसानों को अपनी उपज , सब्जी और दूध बाजार तक पंहुचाने से रोका जा रहा है। किसान नेताओं ने कहा कि जिस गति से महंगाई बढ़ रही है उस गति से किसानों की उपज का दाम नही बढ़ रहा है। जिससे किसानी कर्जे के गर्त में जा रही है। लॉकडाउन में किसानों को काफी नुकसान हुआ है उसका उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।





