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*ज्योति और गांधी नगर संस्था के फर्जीवाड़े में ऑडिटर फंसे, देवी अहिल्या में गिरफ्तारी वारंटी जारी*

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प्राधिकरण की योजना 140 और 171 में शामिल अरबों की जमीनें फिर से हड़पने के प्रयास, अधिकांश सदस्य बोगस भी, नियम के मुताबिक दागी नहीं लड़ सकते चुनाव

इंदौर। जांच के नाम पर गांधी नगर संस्था में तीन भूखंडों (plots) को आबंटित करवाने के साथ ज्योति गृह निर्माण के फर्जीवाड़े में मिलीभगत करने वाले सहकारिता विभाग करने वाले ऑडिटर आशीष सेठिया के खिलाफ जांच शुरू करते हुए नोटिस जारी किए हैं।

सहकारिता आयुक्त और पंजीयक मनोज पुष्प ने उक्त कार्रवाई शुरू करवाई, तो दूसरी तरफ एक और विवादित संस्था देवी अहिल्या श्रमिक कामगार के अध्यक्ष के खिलाफ उपभोक्ता फोरम ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। हालांकि अपने निष् कासन के खिलाफ अजमेरा ने हाईकोर्ट से स्टे भी हासिल कर लिया है, तो दूसरी तरफ चर्चित भूमाफिया दीपक मद्दा एक बार फिर संस्थाओं की अरबों की जमीनों को हड़पने के लिए मय परिवार त्रिशला गृह निर्माण संस्था के चुनाव में कूदा है। प्राधिकरण की योजना 140 और 171 में संस्था की बेशकीमती जमीनें हैं, जिसे प्रशासन सरकारी भी घोषित कर चुका है और नियम के मुताबिक दागी व्यक्ति चुनाव लड़ भी नहीं सकता।

अभी त्रिशला गृह निर्माण संस्था के चुनाव सहकारिता विभाग द्वारा कराए जा रहे हैं, जिसमें 11 पदों के लिए जो 22 नामांकन फॉर्म सामने आए उनमें दीपक मद्दे के अलावा उसका भाई कमलेश, नीलेश, ममता दिलीप जैन, सपना जैन सहित अन्य नाम शामिल हैं। अनेकों एफआईआर मद्दा और परिजनों के खिलाफ दर्ज हुई और महीनों जेल में भी रहे और नियम मुताबिक इस तरह के दागी और विवादित व्यक्ति चुनाव लड़ भी नहीं सकते। बावजूद इसके अपने नाम से नामांकन भर दिया और मजे की बात यह है कि प्रशासन ने तीन साल पहले अपनी जांच में त्रिशला गृह निर्माण के अधिकांश सदस्य बोगस पाए थे और योजना 171 में शामिल खजराना की लगभग 13 एकड़ जमीन को सरकारी भी घोषित कर दिया, जिस पर हाईकोर्ट स्टे चल रहा है और अब प्रशासन उसका जवाब भी दे रहा है।

संस्था की जमीनें योजना 140 में भी शामिल है, जिसका मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है। त्रिशला गृह निर्माण पर पूर्व में शहर के ही एक अन्य कॉलोनाइजर ने कब्जा कर लिया था। दूसरी तरफ देवी अहिल्या संस्था की सदस्यता सूची पर 31 अक्टूबर तक दावे-आपत्तियां ली जा रही हैं। संस्था के उपाध्यक्ष पंकज जायसवाल का कहना है कि सहकारिता विभाग द्वारा बनाई गई सूची ही सबसे अधिक सही थी और पिछले दिनों जो अध्यक्ष अजमेरा ने सूची बनाई उसमें अनेकों गड़बडिय़ां की गई। पिछली आम सभा में भी इसको लेकर जमकर हंगामा मचा। सहकारिता विभाग ने अजमेरा को अध्यक्ष पद से निष् कासित करने का आदेश भी दिया, जिस पर अभी हाईकोर्ट स्टे मिला और सहकारिता विभाग के समक्ष ही अपील करने के निर्देश अजमेरा को दिए गए। वहीं उपभोक्ता फोरम से भी गिरफ्तारी वारंट जारी होने की जानकारी सामने आई है।

दूसरी तरफ पिछले दिनों ज्योति गृह निर्माण संस्था के भू-घोटालों को सिलसिलेवार उजागर किया था। प्राधिकरण की योजना 97 पार्ट-2 और 4 में ये जमीन शामिल है। तेजपुर गड़बड़ी की इस जमीन के विक्रय की एनओसी देने में सब ऑडिटर आशीष सेठिया ने गंभीर लापरवाही बरती। इसी तरह गांधी नगर संस्था की जांच करने के एवज में तीन भूखंड आबंटित करवा लिए। अब सहकारिता आयुक्त श्री पुष्प ने दोनों संस्थाओं में हुए फर्जीवाड़े के मामले में सेठिया को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है।

Ramswaroop Mantri

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