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*‘ऑपरेशन मूव अर्थ’ का राज उजागर…कब्र‍िस्‍तान से हजारों लाशें निकालकर रेग‍िस्‍तान में क्‍यों दफनाई गईं?*

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दुनिया की नजरों से छिपाकर, मिट्टी में गाड़े गए सीरिया के सबसे काले सच से पर्दा उठा है. एक सीक्रेट मिशन ऑपरेशन मूव अर्थ के जरिए राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार ने हजारों शवों को एक बड़े सामूहिक कब्रिस्तान से निकालकर रेगिस्तान में एक नए गुप्त स्थल पर दफना दिया, ताकि उनके युद्ध अपराधों के सबूत हमेशा के लिए मिटा दिए जाएं. यह खुलासा रॉयटर्स की एक विशेष जांच रिपोर्ट में हुआ है, जिसने सीरिया के दो सबसे बड़े सामूहिक कब्रिस्तानों कुतैफा और धूमैर की सैटेलाइट प‍िक्‍चर, सरकारी दस्तावेजों और 13 प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर रिसर्च की है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान फरवरी 2019 से अप्रैल 2021 तक चला. इस दौरान हर हफ्ते चार रातों तक 6 से 8 ट्रक लाशों और मिट्टी से लदे क़ुतैफ़ा से धूमैर रेगिस्तान की ओर रवाना होते थे. गवाहों के मुताबिक, यह ट्रक सैनिकों और कैदियों की लाशें ले जाते थे, जो असद के कारागारों या सैन्य अस्पतालों में मारे गए थे. एक पूर्व अधिकारी ने बताया, हमें आदेश दिया गया था कि क़ुतैफ़ा को खाली करो. सबूत नहीं बचने चाहिए. जो भी विरोध करता, उसे खुद उन गड्ढों में फेंक दिया जाता. ऑपरेशन का नाम “Move Earth” इसलिए रखा गया क्योंकि हजारों टन मिट्टी को उखाड़कर शरीरों को छिपाने के लिए नए 2 किलोमीटर लंबे गड्ढे खोदे गए थे.
धूमैर- मौत का नया ठिकाना
रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, धूमैर के रेगिस्तान में कम से कम 34 गहरे ट्रेंच यानी खाइयां बनाई गईं. उपग्रह तस्वीरों और गवाहों के बयानों से अंदाज़ा है कि यहां दसियों हजार लोग दफनाए गए हैं. एक ट्रक ड्राइवर ने कहा, हम कई किलोमीटर चलने के बाद एक ऐसे इलाके में पहुंचते जहां सिर्फ रेत और सन्नाटा था. वहां बुलडोजर चलते, मिट्टी हटती और फिर हम शरीर गिराते. कुछ ही मिनटों में सब कुछ मिट्टी के नीचे. दृश्य इतना भयावह था कि कई ड्राइवरों को महीनों तक सड़ांध और चीखों के भ्रम सुनाई देते रहे.

कुतैफा में 2012 से दफन हो रहा था सीरिया का सच

क़ुतैफा सामूहिक कब्रिस्तान की शुरुआत 2012 में हुई, जब सीरिया का गृहयुद्ध अपने चरम पर था. असद शासन ने यहां कैदियों, सैनिकों और विरोधियों की लाशें फेंकनी शुरू कीं. 2014 में एक सीरियाई मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कुछ तस्वीरें जारी कर पहली बार इस कब्रिस्तान का खुलासा किया था. बाद में अदालत के दस्तावेज़ों और मीडिया रिपोर्ट्स से इसका सही स्थान सामने आया. 2019 तक आते-आते, जब असद युद्ध में बढ़त हासिल कर रहा था, उसने फैसला किया कि अब इस भयावह कब्र को मिटाना होगा.
रॉयटर्स के मुताबिक, यही से “ऑपरेशन मूव अर्थ” की शुरुआत हुई.
मौत के कारवां की कहानी

ट्रक ड्राइवरों, मैकेनिकों और एक बुलडोजर ऑपरेटर ने रॉयटर्स को बताया कि हर रात वही डरावना रूटीन दोहराया जाता था.
पहले सैन्य अधिकारी आते, ट्रक लोड कराए जाते, फिर रेगिस्तान की ओर बढ़ते. ट्रक खाली करने के बाद, उन्हीं ट्रेंच पर मिट्टी डालकर समतल कर दी जाती, ताकि कोई निशान न बचे. एक ड्राइवर ने कहा, कोई बोलता नहीं था. जो बोलता, वही अगले दिन गायब होता. असद के रिपब्लिकन गार्ड से जुड़े एक पूर्व अफसर ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद सिर्फ एक था क‍ि सबूत मिटाओ, ताकि दुनिया भूल जाए.
कैसे पकड़ा यह राज
रॉयटर्स की टीम ने सैकड़ों सैटेलाइट इमेज, सरकारी दस्तावेज़ और अंदरूनी सूत्रों के बयान खंगाले. 2019 से 2021 के बीच क़ुतैफ़ा की तस्वीरों में दिखा कि वहां 16 ट्रेंच धीरे-धीरे गायब हो रहे थे, जबकि उसी अवधि में धूमैर के पास नई खाइयाँ और ताजा खुदाई दिखाई दी. यानी, एक कब्रिस्तान बंद हुआ और दूसरा खुला. रॉयटर्स ने धूमैर साइट का सटीक स्थान उजागर नहीं किया है, ताकि वहां दखल न हो सके.
सीरिया का बारूद और अब जमीन में छिपे सबूत
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 1.6 लाख से अधिक लोग सीरिया के सुरक्षा तंत्र में लापता माने जा रहे हैं. क़ुतैफ़ा और धूमैर जैसे कब्रिस्तान इस भयानक दौर के प्रतीक हैं, जहां लोगों को दफनाया गया, फिर उनकी यादों को भी मिटाने की कोशिश की गई. एक पूर्व सैनिक ने कहा, हम जमीन खोद रहे थे, लेकिन असल में इतिहास को दफना रहे थे.

Ramswaroop Mantri

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