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आखिर क्यों सर्राफा बाजार बेकाबू?…चांदी की कीमतें 3 लाख प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पार 

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चांदी के बेतहाशा बढ़ते भाव से ग्राहक ही सदमे में नहीं हैं, बल्कि कारोबारी भी दहशत में 

चांदी की कीमतें 3 लाख प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई हैं, जिससे भारतीय बाजार में एक अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई है. इस अभूतपूर्व वृद्धि के कारण ग्राहक बाजार से दूरी बना रहे हैं, वहीं पुराने निवेशक अपनी चांदी बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं.भारतीय सर्राफा बाजार में आज एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आया जिसने निवेशकों और आम आदमी, दोनों को हैरत में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, सोने की कीमतें ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने के लिए बेताब हैं, वहीं चांदी ने ₹3.34 लाख प्रति किलो का सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भू-राजनीतिक तनाव और रुपये की कमजोरी के चलते निवेशकों का रुझान तेजी से बुलियन की ओर बढ़ा है, जिससे कीमतों में यह अभूतपूर्व उछाल आया है। पुरानी दिल्ली जैसे प्रमुख बाजारों में ज्वैलरी की दुकानें खाली पड़ी हैं. दुकानदार बताते हैं कि खरीदार अब केवल दाम पूछकर चले जाते हैं, जबकि वे लोग जिन्होंने पहले चांदी में निवेश किया था, वे अब इसे बेचने के लिए आ रहे हैं.

देश में चांदी और सोने के भाव में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि हो रही है. बुधवार को चांदी 3 लाख 25 हजार किलो के भाव को पार कर गई. वहीं प्रति तोला सोना भी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गया है. इन हालातों में अब बाजार में चांदी मिलना मुश्किल हो रही है. बड़े व्यवसायियों ने भी चांदी की खरीदी बिक्री से हाथ खींच लिए हैं. ग्राहक समझ नहीं पा रहे कि चांदी में इतनी ज्यादा चमक क्यों बढ़ गई है.

इंदौर सराफा मार्केट की चमक फीकी

दुनिया भर में चांदी की खरीदी में आ रही तेजी के चलते मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में भी चांदी 325000 के आंकड़े को पार कर गई. इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनीने बताया “बढ़ती कीमतों के कारण कई शहरों में चांदी के व्यापार को लेकर विवाद हो रहे हैं, जो व्यापारी बड़े व्यापारियों से माल खरीद कर बेचने के लिए ले जा रहा है, बढ़ती कीमत के कारण उसे खरीदी की रकम चुकाना मुश्किल हो रहा है.”

मध्यम वर्ग से भी दूर हुई चांदी

सराफा कारोबारी हुकुम सोनी का कहना है “बाजार में ग्राहकों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि अब मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए चांदी खरीदना भी मुश्किल हो गया है. क्योंकि सबसे छोटा चांदी का आइटम भी अब ₹2000 तक पहुंच गया है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है. गुजरात के सूरत में इन्हीं हालातों के कारण कई व्यापारियों ने चांदी का धंधा बंद कर दिया. ऐसी स्थिति अब इंदौर सराफा बाजार में आ रही है कई व्यापारियों में व्यापार के दौरान टकराव हो रहे हैं.”

शादी के सीजन में भी खरीदने की हिम्मत नहीं

शादी का सीजन होने के बाद भी लोग चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं. ग्राहक आते हैं और रेट पूछकर वापस चले जाते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि हो सकता है आगे चलकर चांदी के रेट कम हो जाएं. लेकिन जब वही ग्राहक फिर वापस खरीदारी करने आता है तो कम से कम वजन के आइटम्स के बारे में जानकारी लेता है. दूसरी तरफ, चांदी को गिरवी रखने वाले अब उसे उठाने के लिए आ रहे हैं. इसको लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं.

चांदी के भाव कम होने की उम्मीद नहीं

सोना-चांदी के जानकार बता रहे हैं कि चांदी का फंड एवं कोष विकसित करने के कारण भी दाम बढ़ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के हालातो में चांदी और सोना निवेशकों के लिए भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है. चांदी उत्पादक देश पेरू में 23% चांदी का फंड है, जिसकी मात्रा 149000 टन है. इसी प्रकार चीन में 99000 टन और रूस में 70000 टन का चांदी कोष तैयार किया गया है. ऐसी स्थिति में चांदी के दाम कम होने की संभावना कम है.

कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल: क्या कहते हैं आंकड़े?

  • ‘ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन’ के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को बाजार में भारी खरीदारी देखी गई।
  • सोना: 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 6,500 रुपये (4.24%) की छलांग लगाकर 1,59,700 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। गौरतलब है कि मंगलवार को ही इसने पहली बार 1.5 लाख का स्तर पार किया था।
  • चांदी: चांदी की चमक और तेज हो गई है। लगातार नौवें दिन तेजी दिखाते हुए यह 11,300 रुपये महंगी होकर 3,34,300 रुपये प्रति किलोग्राम (कर सहित) के स्तर पर पहुंच गई।

क्या है सर्राफा बाजार में लगातार तेजी का करण?

कीमतों में इस विस्फोट के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों कारण जिम्मेदार हैं। आइए इस बारे में जानें।

1. रुपये की कमजोरी और सप्लाई का संकट 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी के अनुसार, घरेलू बाजार में टाइट सप्लाई और मजबूत निवेश मांग के कारण कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों की तुलना में अधिक तेज हैं। इसके अलावा, कमजोर रुपया भी आग में घी का काम कर रहा है। रुपया भी रुपया 91.69 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।

2. अमेरिका-ईयू तनाव और ‘ग्रीनलैंड’ मुद्दा 
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक प्रवीण सिंह बताते हैं कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच तनाव बढ़ गया है। इसके साथ ही राजकोषीय और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं ने भी सोने की कीमतों को हवा दी है।

3. दावोस और ‘रिसोर्स नेशनलिज्म’ 
ऑगमोंट की हेड-रिसर्च रेनीषा चेनानी के मुताबिक, निवेशक दावोस की घटनाओं पर नजर गड़ाए हुए हैं, जहां डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ का मुद्दा उठाने की आशंका है। प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ रहे ‘रिसोर्स नेशनलिज्म’ और नाटो सहयोगियों के प्रति अमेरिकी रुख ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है।

वैश्विक बाजार में सोने-चांदी का क्या भाव?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी पैनिक बाइंग देखी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सोने ने पहली बार 4,800 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार किया और 4,888.46 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। भू-राजनीतिक जोखिम और मैक्रो इकोनॉमिक अनिश्चितता को देखते हुए सोने की कीमतें अपनी रैली जारी रख सकती हैं और जल्द ही 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती हैं। निवेशक शेयर बाजार और करेंसी की अस्थिरता से बचने के लिए सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, कीमतों में नरमी की उम्मीद कम ही है।

Ramswaroop Mantri

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