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पूर्व विधायक ताहिर हुसैन की जमानत पर सबसे बड़ी बाधा बन गई UAPA की धारा 43D(5)

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दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील जैसी निकली ताहिर हुसैन की किस्मत

नई दिल्ली. साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश’ मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी विधायक ताहिर हुसैन, सलीम मलिक और अथर खान की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान UAPA की धारा 43D(5) एक बार फिर निर्णायक मोड़ बनकर सामने आई है. दिल्ली पुलिस ने अदालत में साफ कहा कि तीनों आरोपियों के खिलाफ ऐसे ‘उचित आधार’ मौजूद हैं, जिनसे यह माना जा सकता है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप शुरुआती तौर पर सही हैं. यही वजह है कि ताहिर हुसैन की जमानत याचिका के दौरान जो दलीलें दी गईं वो उमर खालिद और शरजील इमाम की दलीलों की तरह धरी की धरी रह गई.

एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेयी के समक्ष विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला साधारण आपराधिक कानून का नहीं, बल्कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आता है, जहां जमानत का पैमाना कहीं ज्यादा सख्त है.

UAPA की धारा 43D(5) क्या कहती है?
UAPA की धारा 43D(5) के तहत अगर अदालत केस डायरी या चार्जशीट देखने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि आरोपी के खिलाफ आरोप ‘प्रथम दृष्टया सत्य’ हैं, तो उसे जमानत नहीं दी जा सकती. यानी इस स्तर पर अदालत को यह तय करने की जरूरत नहीं होती कि आरोपी दोषी है या नहीं सिर्फ इतना काफी है कि आरोप पहली नजर में विश्वसनीय लगें. दिल्ली पुलिस ने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि ताहिर हुसैन, सलीम मलिक और अथर खान के खिलाफ मौजूद सामग्री उन्हें कथित मुख्य साजिशकर्ताओं से जोड़ती है. पुलिस के मुताबिक, इनकी भूमिका केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं थी, बल्कि कथित रूप से हिंसा भड़काने और उसे संगठित रूप देने से जुड़ी थी.

दलील क्यों नहीं चली?
तीनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दिए जाने के बाद अपनी याचिकाएं दायर की थीं. उनका तर्क था कि वे समान आरोपों का सामना कर रहे हैं, इसलिए उन्हें भी समान राहत मिलनी चाहिए. लेकिन अभियोजन पक्ष ने कहा कि UAPA मामलों में ‘समानता’ का सिद्धांत यांत्रिक रूप से लागू नहीं होता. हर आरोपी की भूमिका अलग-अलग होती है. सुप्रीम कोर्ट खुद उमर खालिद और शरजील इमाम के मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि सभी आरोपी एक ही स्थिति में नहीं होते.

ताहिर हुसैन पर क्या आरोप हैं?
पूर्व विधायक ताहिर हुसैन पर आरोप है कि वे 2020 के दंगों की बड़ी साजिश में शामिल थे. पुलिस का दावा है कि उन्होंने हिंसा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई. इसी आधार पर उनके खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया.

अथर खान और सलीम मलिक का मामला
अथर खान पर आरोप है कि वह चांद बाग इलाके में विरोध प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में से एक था और उसने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए. पुलिस के अनुसार, उसने गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया और CCTV कैमरों को तोड़ने जैसे कदमों का समन्वय किया. सलीम मलिक पर CAA/NRC विरोध से जुड़ी बैठकों के आयोजकों में शामिल होने का आरोप है. SPP ने अदालत को यह भी याद दिलाया कि इन आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले भी निचली अदालत और हाई कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं. सलीम मलिक ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जमानत याचिका वापस ले ली थी, जबकि ताहिर हुसैन ने ट्रायल कोर्ट से अपनी याचिका वापस ली थी.

Ramswaroop Mantri

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