अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

इस पेड़ की खेती चंद सालों में बन जाएंगे लखपति

Share

औरंगाबाद जिले के एक किसान कंचन गुप्ता 2 बीघा जमीन में महोगनी और सागवान के पेड़ लगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं. महोगनी का पेड़ हजारों रुपये किलो के भाव बिकता है.इसकी बाजार में भारी मांग है.आने वाले 10 से 12 वर्षों में तैयार होकर उन्हें बड़ा मुनाफा देंगे

भारत में सिर्फ फलदार पेड़ ही नहीं लगाए जाते हैं, बल्कि फर्नीचर के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षों की खेती भी की जाती है. इन्हीं वृक्षों में से हैं सागवान, सफेदा और महोगनी. बात अगर सागवान की करें तो इसका पेड़ बहुत ही कम समय में फर्नीचर के लिए तैयार हो जाता है. इसकी लकड़ी मजबूत होती है, इसलिए मार्केट में इसका अच्छा रेट भी मिल जाता है.

जानकारों के अनुसार, पौधे लगाने के बाद 10 से 12 साल में इसका पेड़ तैयार हो जाता है. अब आप इसे मार्केट में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. खास बात यह है कि एक एकड़ में सागवान के 400 पौधे लगाए जा सकते हैं. इसकी खेती में तकरीबन 45 से 50 हजार रुपये तक की लागत आती है. वहीं, 12 साल के बाद इसकी एक पेड़ की कीमत 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. ऐसे में यदि आप 12 साल के बाद 400 पेड़ बेचेंगे तो आपकी कुल कमाई एक करोड़ 60 लाख रुपये होगी.

महोगनी की खासियत है कि किसान इसके छाल, बीज और पत्तियों को भी बेच कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. महोगनी के पौधे 12 साल में विकसित हो जाते हैं. कहा जाता है कि महोगनी का पेड़ 200 की ऊंचाई तक बढ़ सकता है. इसकी लकड़ियों का उपयोग जहाज, प्लाईवुड, गहने और फर्नीचर बनाने में किया जाता. इसका रेट 2000 से 2200 रुपये प्रति क्यूबिक फीट थोक में है. इस तरह एक हेक्टेयर में इसकी खेती कर 70 लाख से एक करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं.
महोगनी की खासियत है कि किसान इसके छाल, बीज और पत्तियों को भी बेच कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. महोगनी के पौधे 12 साल में विकसित हो जाते हैं. कहा जाता है कि महोगनी का पेड़ 200 की ऊंचाई तक बढ़ सकता है. इसकी लकड़ियों का उपयोग जहाज, प्लाईवुड, गहने और फर्नीचर बनाने में किया जाता. इसका रेट 2000 से 2200 रुपये प्रति क्यूबिक फीट थोक में है. इस तरह एक हेक्टेयर में इसकी खेती कर 70 लाख से एक करोड़ रुपये तक कमा सकते हैं.3 / 5
सफेदा की खेती भी किसानों के लिए काफी फायदा देने वाली है. खास बात यह है कि इसकी खेती करने में ज्यादा खर्च भी नहीं होता है. इसके पेड़ लगभग पांच साल में ही तैयार हो जाते हैं. सफेदा की लकड़ियों का इस्तेमाल हार्ड बोर्ड, फर्नीचर और पार्टिकल बोर्ड बनाने में किया जाता है. साथ ही ईंधन के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.
सफेदा की खेती भी किसानों के लिए काफी फायदा देने वाली है. खास बात यह है कि इसकी खेती करने में ज्यादा खर्च भी नहीं होता है. इसके पेड़ लगभग पांच साल में ही तैयार हो जाते हैं. सफेदा की लकड़ियों का इस्तेमाल हार्ड बोर्ड, फर्नीचर और पार्टिकल बोर्ड बनाने में किया जाता है. साथ ही ईंधन के रूप में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.4 / 5

एक हेक्टेयर में सफेदा की खेती करने पर 30 हजार रुपये तक खर्च आते हैं. इसके एक पेड़ से 350 किलो से अधिक लकड़ी मिलती है. मार्केट में इसकी लकड़ी का अच्छा रेट भी मिल जाता है. खास बात यह है कि इसकी लकड़ी कीमत मार्केट में 7 रुपये किलो है. ऐसे में अगर आप सफेदा के 3 हजार पेड़ बेचते हैं तो आपको 72 लाख का फायदा होगा. (सांकेतिक फोटो)
एक हेक्टेयर में सफेदा की खेती करने पर 30 हजार रुपये तक खर्च आते हैं. इसके एक पेड़ से 350 किलो से अधिक लकड़ी मिलती है. मार्केट में इसकी लकड़ी का अच्छा रेट भी मिल जाता है. खास बात यह है कि इसकी लकड़ी कीमत मार्केट में 7 रुपये किलो है. ऐसे में अगर आप सफेदा के 3 हजार पेड़ बेचते हैं तो आपको 72 लाख का फायदा होगा. 

Ramswaroop Mantri

Add comment

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें